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डिजिटल गांव : महाराष्ट्र में बनी AI कृषि नीति, डाटा आधारित खेती से होगी एक नए युग की शुरुआत

शिरीष खरे, स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखक Published by: Umashankar Mishra Updated Sat, 16 Aug 2025 01:50 PM IST
सार

डाटा-आधारित खेती के लिए एआई नीति लागू करने वाला महाराष्ट्र देश का पहला राज्य बन गया है। इसके तहत डिजिटल सार्वजनिक ढांचा स्थापित किया जाएगा। महाराष्ट्र के चार कृषि विश्वविद्यालयों में कृषि-कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

महा-कृषि एआई नीति को मंजूरी देने के साथ ही महाराष्ट्र ऐसा करने वाला पहला राज्य बन गया है।
महा-कृषि एआई नीति को मंजूरी देने के साथ ही महाराष्ट्र ऐसा करने वाला पहला राज्य बन गया है। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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महाराष्ट्र सरकार ने डाटा-आधारित खेती को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल सार्वजनिक ढांचा स्थापित करने की तैयारी कर ली है। 17 जून, 2025 को राज्य मंत्रिमंडल द्वारा महा-कृषि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) नीति (2025-29) को मंजूरी देने के साथ ही महाराष्ट्र ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इसके तहत महाराष्ट्र के चार कृषि विश्वविद्यालयों में कृषि-कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

ऐसा होगा एआई कृषि नीति का ढांचा
नई एआई नीति को चार वर्षों तक लागू करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक संचालन समिति का गठन की गई है। इसके लिए, 500 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया है। जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान से बचाव और कम लागत में उत्पादन बढ़ाने के लक्ष्य से यह नीति बनाई गई है।

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महाराष्ट्र की 55% से अधिक जनसंख्या कृषि पर निर्भर है, परंतु बदलते मौसम, बीमारियों और मूल्य संकट से खेती सिकुड़ रही है। हालांकि, अंगूर, अनार, आम, काजू, केले, प्याज, सब्जी और फूलों के निर्यात में महाराष्ट्र अग्रणी रहा है। लेकिन, सिकुड़ती कृषि भूमि को देखते हुए, किसान और कृषि विभाग के लिए फसल उत्पादन को स्थिर बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है। इन हालातों में सरकार ने कृषि के लिए एआई का उपयोग चुना है।

कृषि डाटा एक्सचेंज (ए-डेक्स) 
नई नीति का फोकस कृषि में एआई के उपयोग से विभिन्न कृषि डाटासेट, भू-स्थानिक बुद्धिमत्ता, कृषि-खाद्य सुरक्षा का मानकीकरण, किसानों को वास्तविक समय में मार्गदर्शन और कृषि संबंधी आवश्यक जानकारी प्रदान की जाएगी। सरकारी और निजी डाटासेट के साथ-साथ अन्य हितधारकों को जोड़ने वाला एक कृषि डाटा एक्सचेंज (ए-डेक्स) भी स्थापित किया जाएगा।

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ए-डेक्स, सरकारी डाटासेट; जैसे- एग्रीस्टैक, महा-एग्रीटेक, महावेद और भंडारण आदि से संबंधित अन्य डाटासेट और निजी डाटासेट; जैसे- निर्यात डाटा, बाजार सूचना, उपग्रहों पर आधारित जानकारी, आपूर्ति शृंखला, जलवायु आधारित डाटा, वित्तीय सेवाएं, कृषि-तकनीक प्लेटफॉर्म आदि को जोड़ेगा। स्टार्टअप, उद्योग, किसान उत्पादक संगठन, अनुसंधान संस्थान और सरकार जैसे अन्य हितधारक भी इससे जुड़ेंगे।

महा-विस्तार एआई का विकास 
नई नीति के तहत कृषि संसाधनों तक पहुंचने के लिए एकीकृत प्रणाली, जिसे महा-विस्तार एआई के रूप में भी जाना जाता है, विकसित की जाएगी। इस प्रणाली के तहत, चैटबॉट, इंटरैक्टिव वॉयस रिस्पांस सिस्टम (आईवीआरएस), वेब पोर्टल जैसे डिजिटल तरीकों का उपयोग किया जाएगा। यह कृषि से संबंधित सूचनाओं पर एक खुला नेटवर्क होगा।

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एआई, ड्रोन और ब्लॉकचेन 
एआई और ड्रोन के उपयोग से कृषि में बदलाव लाने के लिए डिजाइन की गई यह नीति सटीक खेती, मौसम पूर्वानुमान और किसानों के लिए परामर्श को बढ़ावा देगी। इससे स्टार्टअप्स, डिजिटल बुनियादी ढांचे और ट्रेसेबिलिटी को भी बढ़ावा मिलेगा। इसकी एक विशेषता ब्लॉकचेन ट्रेसेबिलिटी है, जो अंगूर, केले और अनार जैसी फसलों से खाद्य सुरक्षा और निर्यात अनुपालन सुनिश्चित करने तक क्यूआर कोड-आधारित ब्लॉकचेन प्रणाली पर जोर देती है।

सरकार इस नीति के जरिए अपने लक्ष्य को पूरा करने की तरफ बढ़ती है तो महाराष्ट्र एआई-संचालित कृषि में अग्रणी राज्य बन सकता है। महाराष्ट्र की यह नीति भारत की कृषि को समर्पित पहली व्यापक एआई नीति है। एआई-संचालित प्लेटफॉर्म इस पूरी रणनीति को अंजाम देगा। इसके तहत, रियल-टाइम सलाह प्रणाली, उपज अनुमान के लिए पूर्वानुमान उपकरण और सटीक कृषि तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। 

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राष्ट्रीय प्लेटफार्म्स से भी जुड़ेगी पहल 
एक किसान-केंद्रित पहल भी शुरू की जाएगी, जो एग्रीस्टैक और भाषिणी जैसे राष्ट्रीय प्लेटफार्मों के साथ एआई-आधारित एकीकृत बहुभाषी सलाह प्रदान करेगा। साथ ही, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों में एआई कृषि प्रौद्योगिकी नवाचार और अनुसंधान केंद्रों का निर्माण होगा। इसकी निगरानी के लिए राज्य स्तरीय संचालन समिति (एसएलएससी) और तकनीकी समिति (एसएलटीसी) की स्थापना की जाएगी। 

कृषि एआई तकनीक का उपयोग करने वाली परियोजनाओं को राज्य स्तरीय जांच समिति से अनुमोदन प्राप्त करना होगा। राज्य स्तरीय तकनीकी समिति परियोजना की व्यवहार्यता की जांच करेगी, जिसमें सरकारी सहायता, मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता हेतु अनुशंसा शामिल होगी। परियोजना का प्राथमिक मूल्यांकन एग्री-एआई प्रकोष्ठ करेगा। कृषि समस्याओं से निपटने वाली परियोजनाओं को आमंत्रित करने के लिए हैकाथॉन जैसी प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाएगा।

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ग्राम पंचायत में स्वचालित मौसम केंद्र 
मौसम संबंधी परामर्श सेवाओं को मजबूत करने के लिए, विंडस (मौसम सूचना नेटवर्क डाटा सिस्टम) पहल के अंतर्गत महावेद परियोजना का विस्तार किया जा रहा है, जिसमें हाइपरलोकल डाटा एक्सेस के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में स्वचालित मौसम केंद्र स्थापित करने की योजना है। दूसरी तरफ, सरकार ने कृषि में वार्षिक वैश्विक एआई सम्मेलन और निवेशक शिखर सम्मेलन आयोजित करने की  घोषणा भी कर दी है, जिसका उद्देश्य इस दिशा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को आकर्षित करने के साथ ही नवाचारों को प्रदर्शित करना तथा कृषि-तकनीक में निवेश को बढ़ावा देना है। 

स्टार्टअप और पीपीपी पर फोकस
कृषि-तकनीक पर आधारित स्टार्टअप्स के लिए लक्षित अनुदान दिया जाएगा। डाटा आधारित समर्थन भी जुटाया जा सकेगा, ताकि सार्वजनिक-निजी भागीदारी और क्षेत्र-विशिष्ट नवाचार से जुड़ी चुनौतियों को हल किया जा सके। नीति को जमीन पर उतारने के लिए डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम चलाया जाएगा। किसानों और कृषि विस्तार कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल, फेलोशिप और व्यावहारिक प्रदर्शन की व्यवस्था होगी। 

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एआई-आधारित बाजार विश्लेषण 
एआई-आधारित सटीक खेती से संसाधनों (पानी, उर्वरक, कीटनाशक) का कुशल उपयोग हो सकता है, जिससे फसल उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है। एआई मॉडल किसानों को जलवायु और मिट्टी के आधार पर उपयुक्त फसलों का चयन करने में मदद कर सकते हैं। एआई-आधारित बाजार विश्लेषण और मूल्य अनुमान से किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकते हैं। मौसम संबंधी डाटा के आधार पर एआई किसानों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में सहायता कर सकती है। डिजिटल अवसंरचना और प्रशिक्षण कार्यक्रमों से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। इन सबका लाभ किसानों की आय बढ़ाने में मिल सकता है। अंततः मृदा स्वास्थ्य व जैविक खेती बढ़ने से दीर्घकालिक पर्यावरणीय लाभ भी मिल सकते हैं।

चुनौतियों से लड़ने की तैयारी जरूरी 
महाराष्ट्र की इस नई एआई कृषि नीति को लागू करने में छोटे व सीमांत किसानों के लिए तकनीक की उच्च लागत, ग्रामीण कनेक्टिविटी की कमी और ड्रोन एवं अन्य तकनीकों के उपयोग से जुड़ी कई चुनौतियां हैं। प्रशिक्षण, जागरूकता और डाटा गोपनीयता व सुरक्षा भी एक मुद्दा है। बिखरी हुई जमीन और निर्यात नीतियों में बार-बार होने वाले बदलावों पर आधारित प्रतिबंध भी इसके लाभ को सीमित कर सकते हैं। इन चुनौतियों से लड़ने के लिए रणनीतिक तैयारी करनी होगी। 

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ऐसे आगे बढ़ेगी परियोजना 
  • पहला चरण : संस्थागत व्यवस्था और प्लेटफॉर्म डिजाइन। 
  • दूसरा चरण : चुनिंदा जिलों में पायलट कार्यक्रम की शुरुआत।
  • तीसरा चरण : पूरे महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन। 
  • चौथा चरण : नीति में सुधार, तृतीय-पक्ष का मूल्यांकन और अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में इसका

अंतरराष्ट्रीय नीतियों से सबक 
  1. यूरोपीय संघ की ग्रीन डील : यह नीति टिकाऊ खेती और जैविक खेती को बढ़ावा देती है। ग्रीन डील पहल महाराष्ट्र की नीति से मेल खाती है।
  2. चीन की डिजिटल कृषि नीति : चीन ने डिजिटल तकनीकों को ग्रामीण क्षेत्रों में लागू करने के लिए बड़ा निवेश किया है, जो महाराष्ट्र के लिए ग्रामीण कनेक्टिविटी और डाटा सुलभता के लिए मॉडल हो सकता है।
  3. इस्राइल की जल-दक्षता नीति : इस्राइल ने ड्रिप इरिगेशन और एआई-आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम से जल उपयोग की दक्षता बढ़ाई, जिससे मरुस्थलीय क्षेत्रों में भी खेती की उत्पादकता में इजाफा हुआ।

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