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सरसों की खेती में बंपर पैदावार का मौका : जानें किस राज्य में कौन-सी किस्म देगी 25 क्विंटल तक उत्पादन

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sun, 01 Nov 2026 12:19 PM IST
सार

सरसों की खेती करने वाले किसान जानें रुक्मणी, गिरिराज, राधिका और बीपीपीएम 11 जैसी उन्नत किस्मों की खासियत, बुवाई का सही समय और प्रति हेक्टेयर पैदावार।
 

सरसों की खेती
सरसों की खेती - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सरसों की खेती से अधिक उत्पादन और लाभ के लिए सही किस्म का चयन महत्वपूर्ण है। भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान, भरतपुर के प्रधान वैज्ञानिक भगीरथ राम ने विभिन्न क्षेत्रों के लिए उपयुक्त सरसों की किस्मों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसान अपनी जलवायु और बुवाई के समय के अनुसार किस्मों का चुनाव कर सकते हैं।

संस्थान ने 2020-21 में 'रुक्मणी' (डीआरएमआर 1165 40) किस्म विकसित की है। इसकी बुवाई 5 नवंबर तक की जा सकती है। यह राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और मध्य प्रदेश के लिए बहुत अच्छी किस्म है। रुक्मणी की पैदावार 24 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होती है। इसमें 42 फीसदी तक तेल की मात्रा पाई जाती है। इसके लिए 3.5 से 4 किलो प्रति हेक्टेयर बीज दर की सलाह दी गई है। यह किस्म 130 से 140 दिन में पककर तैयार होती है और इसमें पानी की कम आवश्यकता होती है। संस्थान में इसका प्रमाणित बीज 150 रुपये प्रति किलो पर उपलब्ध है।

अन्य प्रमुख किस्में
देर से बुवाई की स्थिति के लिए 'राधिका' किस्म 10 नवंबर तक लगाई जा सकती है। इसकी पैदावार 18 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और तेल की मात्रा 38 से 39 फीसदी होती है। 'गिरिराज' (डीआरआरआईजे 31) एक और लोकप्रिय किस्म है। यह राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के लिए उपयुक्त है। गिरिराज की औसत पैदावार 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और तेल की मात्रा 42 फीसदी है। यह 140 से 145 दिन में पकती है और इसमें रोग रोधी क्षमता अधिक है।

पूर्वोत्तर राज्यों के लिए विशेष किस्में
पूर्वोत्तर राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल, बिहार, असम और अरुणाचल प्रदेश के लिए 'बीपीपीएम 11' किस्म उपयुक्त है। यह 120 से 125 दिन में पक जाती है और इसकी पैदावार 17 से 18 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इन क्षेत्रों में बुवाई 15 से 25 नवंबर तक करनी चाहिए। पीली सरसों की 'एनआरसी' किस्म भी पूर्वोत्तर के लिए बेहतर है। इसकी पैदावार 14 से 15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और तेल की मात्रा 42 से 43 फीसदी होती है। पीली सरसों का बाजार मूल्य काली सरसों से अधिक होता है। 
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