उत्तर प्रदेश के कई जिलों में किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ नकदी फसलों की ओर भी रुख कर रहे हैं। इनमें केले की खेती किसानों के लिए आमदनी का अच्छा जरिया बनकर उभर रही है। बाजार में केले की मांग और बेहतर उत्पादन की उम्मीद के चलते जिले में इसकी खेती का चलन बढ़ रहा है। खास बात यह है कि किसानों के बीच केले की G9 किस्म काफी लोकप्रिय हो रही है।
15 महीने में मिलने लगता है फल
केले के पौधों की रोपाई के करीब 15 महीने बाद फल मिलने लगते हैं। अच्छी पैदावार के लिए उन्नत किस्म का चुनाव, समय पर सिंचाई और खाद का सही इस्तेमाल जरूरी है। इसके अलावा पौधों की नियमित देखभाल और खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखना भी जरूरी होता है।
G9 किस्म से 35 किलो तक उत्पादन
G9 किस्म को केले की अच्छी उत्पादन देने वाली किस्मों में गिना जाता है। इसके एक पौधे से करीब 25 से 35 किलो तक केले का उत्पादन मिल सकता है। हालांकि, वास्तविक पैदावार मिट्टी, मौसम, सिंचाई, खाद और फसल प्रबंधन पर निर्भर करती है। बेहतर उत्पादन के लिए किसानों को समय-समय पर पौधों की देखभाल करनी चाहिए।
उद्यान विभाग भी कर रहा किसानों को प्रोत्साहित
केले की खेती को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग किसानों को जागरूक कर रहा है। विभाग की ओर से किसानों को केले की पौध भी उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि अधिक से अधिक किसान इस नकदी फसल को अपनाएं। उन्नत किस्मों की पौध मिलने से किसानों को बेहतर उत्पादन की उम्मीद है।
पारंपरिक फसलों के साथ केले जैसी नकदी फसल अपनाकर किसान अपनी खेती में विविधता ला सकते हैं। हालांकि, खेती शुरू करने से पहले स्थानीय बाजार की मांग, पौध की गुणवत्ता, सिंचाई की सुविधा और उत्पादन लागत का आकलन करना जरूरी है।
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