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गोबर की खाद में मिलाएं ट्राइकोडर्मा : मिट्टी में पनपेंगे लाभकारी कवक, जानें 100 किलो खाद तैयार करने का तरीका

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sun, 01 Nov 2026 05:24 PM IST
सार

गोबर की खाद में ट्राइकोडर्मा मिलाकर जैविक खाद तैयार कर सकते हैं। जानें 100 किलो गोबर की खाद में ट्राइकोडर्मा मिलाने, 7-10 दिन तक संवर्धन करने और खेत में इस्तेमाल करने की पूरी विधि।

मिट्टी की जांच
मिट्टी की जांच - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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खेती में फसलों को कई तरह के रोग मिट्टी में मौजूद हानिकारक फफूंदों के कारण लगते हैं। इनसे बचाव के लिए किसान रासायनिक दवाओं का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसका एक जैविक विकल्प भी है। किसान गोबर की सड़ी हुई खाद में ट्राइकोडर्मा मिलाकर उसका संवर्धन कर सकते हैं। इससे खाद में लाभकारी कवक की संख्या बढ़ाने और उसे खेत की मिट्टी में स्थापित करने में मदद मिल सकती है। 

खास बात यह है कि इसके लिए किसान को महंगे संसाधनों की जरूरत नहीं होती। आइए जानते हैं 100 किलो गोबर की खाद में ट्राइकोडर्मा मिलाने की आसान विधि। यह तकनीक डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर (बिहार) के पोस्ट ग्रेजुएट डिपार्टमेंट ऑफ प्लांट पैथोलॉजी एवं नेमेटोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. एसके सिंह ने बताई है।

क्या है ट्राइकोडर्मा और कैसे करता है काम?
ट्राइकोडर्मा एक लाभकारी कवक (फंगस) है, जो मिट्टी में मौजूद कई हानिकारक फफूंदों को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसमें फ्यूजेरियम (Fusarium), राइजोक्टोनिया (Rhizoctonia), स्क्लेरोटियम (Sclerotium) और पाइथियम (Pythium) जैसे रोग पैदा करने वाले कवक शामिल हैं।

ये फफूंद पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे जड़ सड़न, पौधों का मुरझाना और दूसरी बीमारियां हो सकती हैं। ट्राइकोडर्मा इन हानिकारक फफूंदों से भोजन और जगह के लिए प्रतिस्पर्धा करता है। साथ ही, यह कुछ ऐसे पदार्थ बनाता है जो रोग पैदा करने वाले कवकों की वृद्धि को रोकने में मदद करते हैं। यह पौधों की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को सक्रिय करने में भी सहायक होता है।

100 किलो गोबर की खाद में कितना ट्राइकोडर्मा मिलाएं?
गोबर की खाद में ट्राइकोडर्मा का संवर्धन करने के लिए बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं होती। किसान इन चीजों की व्यवस्था करके यह काम कर सकते हैं।

जरूरी सामग्री-
  • अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद- 100 किलो
  • ट्राइकोडर्मा का गुणवत्तायुक्त पाउडर- 1 से 2 किलो
  • साफ पानी- जरूरत के अनुसार
  • जूट की बोरी या पुआल- खाद को ढकने के लिए

ध्यान रखें कि ट्राइकोडर्मा का उत्पाद प्रमाणित और जीवित कवक वाला होना चाहिए। खरीदते समय पैकेट पर दी गई CFU संख्या, निर्माण की तारीख और इस्तेमाल की अंतिम तारीख जरूर जांचें।

गोबर की खाद में ट्राइकोडर्मा मिलाने का तरीका
  • सबसे पहले खाद तैयार करें : संवर्धन के लिए पूरी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद लें। खाद भुरभुरी, ठंडी और बिना दुर्गंध वाली होनी चाहिए। ताजा गोबर या ऐसी खाद का इस्तेमाल न करें जो अभी सड़ रही हो और गर्म हो रही हो। अधिक गर्मी से ट्राइकोडर्मा की वृद्धि प्रभावित हो सकती है।
  • खाद में ट्राइकोडर्मा मिलाएं : अब 100 किलो गोबर की खाद में 1 से 2 किलो ट्राइकोडर्मा पाउडर मिलाएं। इसे सीधे खाद में डालकर अच्छी तरह मिला सकते हैं। चाहें तो पहले थोड़े पानी में घोल बनाकर खाद पर समान रूप से छिड़क सकते हैं। ध्यान रखें कि ट्राइकोडर्मा खाद के सभी हिस्सों में अच्छी तरह मिल जाए।
  • खाद में नमी बनाए रखें : मिश्रण में करीब 25 से 30 प्रतिशत नमी बनाए रखने की सलाह दी गई है। इसके लिए जरूरत के अनुसार पानी का हल्का छिड़काव करें। नमी जांचने का आसान तरीका यह है कि खाद को हाथ में लेकर दबाएं। खाद नम महसूस होनी चाहिए, लेकिन दबाने पर उसमें से पानी नहीं टपकना चाहिए। ज्यादा पानी होने से खाद में हवा का संचार कम हो सकता है और दूसरे अवांछित सूक्ष्मजीव पनप सकते हैं।
  • छायादार जगह पर रखें : ट्राइकोडर्मा मिली खाद को छायादार जगह पर ढेर बनाकर रखें। इसे जूट की बोरी या पुआल से ढक दें, ताकि नमी बनी रहे और हवा का आना-जाना भी जारी रहे। इसे सामान्य तौर पर 7 से 10 दिन तक रखा जा सकता है। हर 3 से 4 दिन में खाद को हल्के हाथ से पलट दें। जरूरत पड़ने पर पानी का छिड़काव करके नमी बनाए रखें। तापमान और उत्पाद की गुणवत्ता के अनुसार संवर्धन में लगने वाला समय बदल सकता है।
तैयार खाद की पहचान कैसे करें?
संवर्धन के दौरान खाद की सतह पर सफेद से हरे रंग का कवकीय जाल या परत दिखाई दे सकती है। यह ट्राइकोडर्मा की वृद्धि का संकेत हो सकता है। हालांकि, केवल हरे रंग की परत देखकर यह पक्का नहीं माना जा सकता कि खाद में ट्राइकोडर्मा ही मौजूद है। इसकी सही पुष्टि प्रयोगशाला में जांच या CFU परीक्षण से ही होती है।

खेत में कब और कैसे डालें ट्राइकोडर्मा वाली खाद?
संवर्धित खाद को बुवाई या रोपाई से पहले खेत में समान रूप से बिखेरकर मिट्टी में मिला सकते हैं। इसे पौधों की जड़ों के आसपास या फसल की कतारों में भी डाला जा सकता है। बेहतर परिणाम के लिए बुवाई से करीब 10 से 15 दिन पहले इसका इस्तेमाल करना एक व्यावहारिक तरीका हो सकता है। हालांकि, कितनी मात्रा में खाद डालनी है, यह फसल, मिट्टी में रोग की स्थिति और ट्राइकोडर्मा उत्पाद की गुणवत्ता पर निर्भर करेगा। इसलिए उत्पाद के पैकेट पर दी गई मात्रा या कृषि विशेषज्ञ की सलाह का पालन करें।

ट्राइकोडर्मा वाली खाद इस्तेमाल करते समय रखें ये 5 सावधानियां
  1. हमेशा अच्छी तरह सड़ी और ठंडी गोबर की खाद का इस्तेमाल करें।
  2. खाद को तेज धूप, अधिक गर्मी और पानी भरने से बचाएं।
  3. ट्राइकोडर्मा को रासायनिक फफूंदनाशकों के साथ मिलाकर न रखें। दोनों के इस्तेमाल के बीच उचित अंतर रखें।
  4. तैयार संवर्धित खाद को लंबे समय तक जमा करके न रखें। इसे जल्द खेत में इस्तेमाल करें।
  5. अलग-अलग कंपनियों के ट्राइकोडर्मा उत्पादों में सक्रिय कवक की मात्रा अलग हो सकती है। इसलिए 1 से 2 किलो की मात्रा को सामान्य उदाहरण मानें और उत्पाद के लेबल पर दी गई सलाह को प्राथमिकता दें।

किसानों को क्या होंगे फायदे?
  • गोबर की खाद में ट्राइकोडर्मा का संवर्धन करने से किसानों को कई तरह से फायदा मिल सकता है।
  • मिट्टी से होने वाली बीमारियों का प्रबंधन: जड़ सड़न और मुरझाने जैसी समस्याएं पैदा करने वाले हानिकारक फफूंदों को दबाने में मदद मिलती है।
  • लाभकारी सूक्ष्मजीवों को बढ़ावा: खाद के जरिए मिट्टी में ट्राइकोडर्मा की स्थापना और फैलाव में मदद मिल सकती है।
  • मिट्टी की सेहत में सुधार: जैविक खाद के इस्तेमाल से मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • रासायनिक दवाओं पर निर्भरता कम: फसल रोगों के समन्वित प्रबंधन में जैविक विकल्प के तौर पर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • कम लागत वाली तकनीक: किसान अपनी उपलब्ध गोबर की खाद का उपयोग करके इस तकनीक को अपना सकते हैं।

बीज उपचार और जड़ उपचार के साथ भी करें इस्तेमाल
ट्राइकोडर्मा से संवर्धित गोबर की खाद का इस्तेमाल फसल रोगों के समन्वित प्रबंधन का एक तरीका है। बेहतर परिणाम के लिए इसे बीज उपचार, पौधों की जड़ों के उपचार और दूसरी अनुशंसित जैविक विधियों के साथ अपनाया जा सकता है। इससे मिट्टी में रोग पैदा करने वाले फफूंदों का दबाव कम करने और स्वस्थ फसल तैयार करने में मदद मिल सकती है।

ध्यान दें: ट्राइकोडर्मा का इस्तेमाल किसी भी फसल रोग को पूरी तरह खत्म करने की गारंटी नहीं है। इसका असर उत्पाद की गुणवत्ता, सक्रिय कवक की संख्या, फसल और खेत की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

 
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