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Horticulture in Maharashtra: भारत के फल उत्पादन का केंद्र महाराष्ट्र स्वच्छ पौध कार्यक्रम से भरेगा नई उड़ान

शिरीष खरे, पुणे Published by: Umashankar Mishra Updated Sun, 20 Jul 2025 11:21 AM IST
सार

Horticulture in Maharashtra: जीआई टैग वाली फसलों (GI TAG CROPS) और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से महाराष्ट्र में बागवानी किसानों की आय (Farmers' Income) वृद्धि और टिकाऊ विकास (Sustainable Development) का एक सशक्त माध्यम बन रही है। 

पिछले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र फल उत्पादन में अग्रणी बनकर उभरा है।
पिछले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र फल उत्पादन में अग्रणी बनकर उभरा है। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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Horticulture in Maharashtra: महाराष्ट्र को भारत का फलोत्पादन केंद्र (Fruit Production Hub) बनाने के लिए मास्टर प्लान तैयार किया गया है। 300 करोड़ रुपये की लागत से तीन स्वच्छ पौधा परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं। स्वच्छ पौधा कार्यक्रम (Clean Plant Programme) को केंद्र ने 9 अगस्त, 2024 को 1765.67 करोड़ रुपये के बजट के साथ मंजूरी दी, जिसकी घोषणा फरवरी, 2023 के बजट में की गई थी। इसका उद्देश्य किसानों को वायरस-मुक्त, कीट-मुक्त, रोग-मुक्त, फफूंद-मुक्त उच्च गुणवत्ता वाली रोपण सामग्री उपलब्ध कराना है। इससे उच्च गुणवत्ता वाले पौधे तैयार होंगे और बागवानी फसलों की उत्पादकता एवं गुणवत्ता बढ़ेगी। पुणे (अंगूर), नागपुर (संतरा) और सोलापुर (अनार) जिलों में इसकी शुरुआत हो रही है। किसानों को नर्सरी विकास, ड्रिप सिंचाई, रोग प्रबंधन और कोल्ड स्टोरेज के लिए भी सहायता दी जाएगी। 

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वैश्विक व्यापार में बढ़ेगी हिस्सेदारी
पिछले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र फल उत्पादन में अग्रणी बनकर उभरा है, जिसके चलते केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र में निवेश का फैसला लिया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल में इन परियोजनाओं की घोषणा की है। स्वस्थ रोपण एवं बुवाई सामग्री उपलब्ध कराने के लिए नर्सरियों को सहायता दी जाएगी, जिसमें प्रमाणन प्रक्रिया और बुनियादी ढांचे का समर्थन शामिल है। इससे उच्च गुणवत्ता वाले स्वादिष्ट, आकर्षक और पोषक तत्वों से भरपूर फल, अनाज और सब्जियों का उत्पादन मिल सकेगा। इसका सीधा लाभ उपभोक्ताओं को मिलेगा। इस योजना के माध्यम से महाराष्ट्र की बागवानी क्षमता को बढ़ाने का लक्ष्य है, जिससे फलों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी। उच्च गुणवत्ता वाले फलों के उत्पादन से भारत से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। 

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इस्राइल और नीदरलैंड से मदद
महाराष्ट्र फलोत्पादन केंद्र बनकर उभरा है। यहां अंगूर, अनार, संतरा, मौसमी, केला, पपीता और चीकू सहित विभिन्न फलों तथा सब्जियों का उच्च गुणवत्ता आधारित उत्पादन होता है। हालांकि, इन फलों एवं सब्जियों की खेती के लिए उपलब्ध पौधे कितने रोग-मुक्त, उत्पादक तथा गुणवत्तापूर्ण हैं, इसकी किसानों को कोई गारंटी नहीं मिलती। किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध कराने के लिए स्वच्छ पौधा कार्यक्रम महत्वपूर्ण है। इसके तहत, आधुनिक नर्सरियां स्थापित की जाएंगी। इनके माध्यम से हर साल किसानों को 8 करोड़ रोग-मुक्त पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। इस कार्यक्रम को लागू करने के लिए इस्राइल और नीदरलैंड जैसे देशों का सहयोग भी लिया जाएगा।

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शुरुआत महाराष्ट्र से क्यों?
महाराष्ट्र की जलवायु, मिट्टी और सिंचाई सुविधाएं फलों के उत्पादन के लिए आदर्श है। राज्य के 12.90 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फलोत्पादन होता है, जिसमें 36.36 लाख हेक्टेयर (2004-05) सिंचित है। अंगूर में 81.22% हिस्सेदारी के साथ नासिक, सांगली और पुणे अग्रणी हैं, जहां 70% उत्पादन होता है। वहीं, संतरा उत्पादन के मामले में नागपुर प्रमुख है। महाराष्ट्र में अनार की खेती 1.3 लाख हेक्टेयर में होती है और देश का 70% अनार उत्पादन (10-12 लाख टन) राज्य में होता है। ड्रिप सिंचाई से अंगूर और केले की खेती को बढ़ावा मिला है। नासिक व सांगली के अंगूर, रत्नागिरी के आम और जलगांव का केला वैश्विक बाजार में लोकप्रिय है। स्वच्छ पौधा कार्यक्रम राज्य के बागवानी क्षेत्र की संभावनाओं को भुनाने और चुनौतियों से निपटने में अहम योगदान दे सकता है।

ये रहेंगी चुनौतियां
फसलों में रोग और कीटों के प्रकोप से बागवानों की चुनौती बढ़ी है। बैक्टीरियल ब्लाइट (जीवाणु झुलसा) अनार की खेती में प्रमुख समस्या है, जो फसल को भारी नुकसान पहुंचाने के लिए जाना जाता है। सोलापुर और सांगली में इस रोग के कारण किसानों को काफी नुकसान होता है। पानी की कमी भी कई इलाकों में बड़ी समस्या है। हालांकि, ड्रिप इरिगेशन और जल संचयन से इस समस्या का समाधान किया जा रहा है। लेकिन, यह समाधान सीमित है।

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अनिश्चित बारिश और तापमान में उतार-चढ़ाव से भी फूलों एवं फलों की गुणवत्ता प्रभावित होती है। दूसरी ओर, बाजार मूल्य में उतार-चढ़ाव से किसानों को अपनी फसल कम कीमत पर बेचनी पड़ती है, जिससे उनकी आय प्रभावित होती है। संतरा की बात करें, तो कोल्ड स्टोरेज और परिवहन सुविधाओं की कमी से फलों का खराब होना बड़ी चुनौती है। यह समस्या छोटे किसानों के लिए बहुत बड़ी है। वहीं, निर्यात के लिए कड़े गुणवत्ता मानकों को पूरा करना भी चुनौतीपूर्ण है। 

इस परियोजना के तहत बागों का विकास करते समय इन चुनौतियों दूर किए जाने की उम्मीद बढ़ी है। बैक्टीरियल ब्लाइट जैसी बीमारियों के प्रति प्रतिरोधी किस्में विकसित की जाएंगी। किसानों को सरकारी सहायता मिलने से उन्हें फायदा होगा। इस बीच, एक अच्छी खबर यह है कि मुंबई, पुणे और अन्य शहरों में जैविक अनार की मांग बढ़ी है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिल रहा है। वैश्विक बाजार में भी भारतीय अनार की मांग बढ़ रही है और महाराष्ट्र इसका प्रमुख आपूर्तिकर्ता है।
पिछले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र फल उत्पादन में अग्रणी बनकर उभरा है।
पिछले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र फल उत्पादन में अग्रणी बनकर उभरा है। - फोटो : गांव जंक्शन

महाराष्ट्र की जीआई टैग प्राप्त बागवानी फसलें (अनुमानित कवरेज क्षेत्र और उत्पादन)

1. महाबलेश्वर स्ट्रॉबेरी
विशेषता : रसीली, मीठी और चमकीला लाल रंग 
कवरेज : 500-600 हेक्टेयर 
सालाना उत्पादन : 20000-25000 मीट्रिक टन

2. नासिक अंगूर
विशेषता : हरे, काले और लाल रंगों में उपलब्ध
कवरेज :45000 हेक्टेयर 
सालाना उत्पादन : 15 लाख मीट्रिक टन



3. सिंधुदुर्ग-रत्नागिरी कोकम
विशेषता : औषधीय गुणों और अपने स्वाद के लिए मशहूर कोकम वंडर फ्रूट के नाम से विख्यात है।   
कवरेज : 5000 से 7000 हेक्टेयर 
सालाना उत्पादन : 10000-15000 मीट्रिक टन

4. वेंगुरला काजू
विशेषता : उच्च पोषण, विटामिन-सी संतरे से पांच गुना अधिक 
कवरेज : 50000 हेक्टेयर 
सालाना उत्पादन : 40000-50000 मीट्रिक टन

5. लासलगांव प्याज
विशेषता : तीखा स्वाद, बड़ा आकार (4-6 सेमी) और 8-9 महीने की शेल्फ लाइफ 
कवरेज : 1 लाख हेक्टेयर से अधिक 
सालाना उत्पादन : 25 लाख मीट्रिक टन 



6. सांगली किशमिश
विशेषता : नरम गूदा, मीठा व रसीला स्वाद 
कवरेज : 10000 से 15000 हेक्टेयर 
सालाना उत्पादन : 50000 से 70000 टन
 
7. बीड कस्टर्ड एप्पल (शरीफा)
विशेषता : मलाईदार, एंटी-ऑक्सीडेंट, पोटेशियम और मैग्नीशियम से भरपूर शरीफा 
कवरेज : 10000-12000 हेक्टेयर 
सालाना उत्पादन : 50000 से 60000 टन
 
8. जालना की मौसमी
विशेषता : विटामिन-सी की उच्च मात्रा, फाइबर और एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर
कवरेज : लगभग 20000 हेक्टेयर 
सालाना उत्पादन : 2-3 लाख मीट्रिक टन 



9. वैगांव हल्दी
विशेषता : 6% करक्यूमिन की मात्रा
कवरेज :  2000 से 3000 हेक्टेयर 
सालाना उत्पादन : 10000-15000 मीट्रिक टन  
 
10. पुरंदर अंजीर
विशेषता : फाइबर, विटामिन (ए, बी,के) और खनिज (पोटेशियम, मैग्नीशियम) से भरपूर कवरेज : पुणे जिले में पुरंदर अंजीर का कुल क्षेत्र 1500 से 2000 हेक्टेयर 
सालाना उत्पादन : 5000-7000 मीट्रिक टन 

11. जलगांव भरित बैंगन
विशेषता : अनूठे स्वाद और ‘भरित’ (भुना हुआ बैंगन) व्यंजन के लिए प्रसिद्ध 
कवरेज : 5000 हेक्टेयर 
सालाना उत्पादन : 50000-70000 मीट्रिक टन


 
17. सोलापुर अनार
विशेषता : भगवा रंग, मीठा-खट्टा स्वाद, रसदार,
शेल्फ लाइफ अधिक 
कवरेज : 80000 हेक्टेयर 
सालाना उत्पादन : 8-10 लाख मीट्रिक टन

18. भिवापुर मिर्च
विशेषता : गहरा लाल रंग, तीखा स्वाद और कॉस्मेटिक्स में उपयोग 
कवरेज : 5000-7000 हेक्टेयर 
सालाना उत्पादन छ 20000-30000 मीट्रिक टन



19. दहानू घोलवड़ चीकू
विशेषता : दानेदार गूदे और स्वाद के लिए प्रसिद्ध 
कवरेज : 5000 से 7000 हेक्टेयर 
सालाना उत्पादन : 50000-60000 मीट्रिक टन

20. जलगांव का केला
विशेषता : मीठा, रसीला, नरम गूदा और सुगंध 
कवरेज : 50000 हेक्टेयर 
सालाना उत्पादन : 15-20 लाख मीट्रिक टन



21. मराठवाड़ा केसर आम
विशेषता : अधिक गूदा, किफायती आम 
कवरेज : 10000-15000 हेक्टेयर 
सालाना उत्पादन : 50000-70000 मीट्रिक टन

22. अल्फांसो आम (हापुस)
विशेषता : कम रेशा, मलाईदार गूदा, लंबी शेल्फ लाइफ, निर्यात में अग्रणी 
कवरेज :1.5 लाख हेक्टेयर 
सालाना उत्पादन : 4 से 5 लाख मीट्रिक टन 



23. अलीबाग का सफेद प्याज
विशेषता : नो-टियर गुण, मीठा स्वाद, औषधीय गुण 
कवरेज : 2000 से 3000 हेक्टेयर 
सालाना उत्पादन : 20000-30000 मीट्रिक टन

24. नागपुर का संतरा
विशेषता : मीठा-खट्टा स्वाद, रसीला, विटामिन-सी से भरपूर, आसानी से छीलने योग्य पतला छिलका 
कवरेज : लगभग 1 लाख हेक्टेयर 
सालाना उत्पादन : 10-12 लाख मीट्रिक टन


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