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सब्जी की खेती से लाखों की कमाई: पहाड़ियों के बीच बसे इस गांव ने बनाई नई पहचान, किसान मालामाल
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Sun, 01 Nov 2026 03:06 PM IST
सार
राजस्थान के दौसा जिले के पाटोली गांव में 100 एकड़ से अधिक क्षेत्र में सब्जियों की खेती हो रही है। जानिए कैसे किसान ड्रिप सिंचाई और मलचिंग तकनीक से टमाटर, मिर्च और गोभी उगाकर लाखों रुपये कमा रहे हैं।
सब्जी की खेती से लाखों की कमाई
- फोटो : गांव जंक्शन
राजस्थान के दौसा जिले के पाटोली गांव में किसान पहाड़ियों के बीच 100 एकड़ से अधिक क्षेत्र में सब्जियों की खेती कर रहे हैं। यह क्षेत्र टमाटर, मिर्च और गोभी जैसी विभिन्न सब्जियों के उत्पादन के लिए जाना जाता है। किसान पारंपरिक फसलों की तुलना में सब्जियों से बेहतर आमदनी प्राप्त कर रहे हैं।
जगदीश जैसे किसान छह हेक्टेयर में टमाटर, मिर्च और गोभी उगाते हैं। एक हेक्टेयर में हाइब्रिड मिर्च से आठ लाख रुपये तक की बिक्री होती है, जिसमें करीब सात लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा मिलता है। टमाटर की एक हेक्टेयर फसल से लगभग 2500 कैरेट (प्रत्येक 25 किलो) उत्पादन होता है। इसकी औसत दर 120 रुपये प्रति किलो रहती है। गोभी की फसल भी एक बीघे में डेढ़ लाख रुपये तक की आमदनी देती है। यहां की दोमट मिट्टी और मीठा पानी सब्जियों के लिए बहुत उपयुक्त है। पहाड़ियों के बीच होने से सर्दी और पाले का असर कम होता है।
आधुनिक खेती की तकनीक
डिप्टी डायरेक्टर हॉर्टिकल्चर बृजवासी मीणा के प्रयासों से पाटोली गांव में 100 फीसदी मलचिंग और ड्रिप सिंचाई का उपयोग हो रहा है। इस तकनीक से खरपतवार नहीं होते पानी की बचत होती है और पौधे स्वस्थ रहते हैं। मलचिंग से फल साफ और अच्छी गुणवत्ता के होते हैं, जिससे उत्पादन भी बढ़ता है। पहले फसल मिट्टी के संपर्क में आकर सड़ जाती थी, जो अब नहीं होता। आत्मा योजना के तहत जगदीश सैनी को 10,000 रुपये का पुरस्कार भी मिला था। इस क्षेत्र में करीब 70-80 परिवार सब्जी की खेती से जुड़े हैं।
बागवानी का नया प्रयोग
सब्जियों की खेती के साथ अब किसान बागवानी में भी हाथ आजमा रहे हैं। जगदीश ने आधा हेक्टेयर में मौसमी का बगीचा लगाया है, जिससे अगली साल से फसल मिलने की उम्मीद है। यह प्रयोग सब्जियों से मिलने वाले अच्छे मुनाफे को देखते हुए किया जा रहा है। किसान मार्च-अप्रैल के बाद लौकी, तरबूज और कद्दू जैसी बेल वाली फसलें भी लगाते हैं।
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