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खाद के हर बोरे का रखा जाएगा हिसाब: आईएफएमएस के दायरे में पूरी सप्लाई चेन, कालाबाजारी पर कसेगा शिकंजा

उमेश चतुर्वेदी, स्तंभकार Published by: Umashankar Mishra Updated Tue, 22 Sep 2026 04:11 PM IST
सार

खाद उत्पादन से बिक्री तक सप्लाई चेन को किसान, जमीन व फसल के डेटा से जोड़कर निगरानी मजबूत की जा रही है। आईएफएमएस के विस्तार से जमाखोरी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

आईएफएमएस से अब खाद की हर कड़ी डिजिटल दायरे में।
आईएफएमएस से अब खाद की हर कड़ी डिजिटल दायरे में। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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खेती से जुड़ी मेहनत के साथ ही खाद के लिए भी किसानों को अक्सर किल्लत, कालाबाजारी और जमाखोरी से जूझना पड़ता है, जिसका सबसे ज्यादा असर छोटे और सीमांत किसानों पर पड़ता है। अब सरकार खाद की पूरी सप्लाई चेन को डिजिटल निगरानी से जोड़ रही है, ताकि पता चलता रहे कि खाद कहां बनी, कहां पहुंची, कितना स्टॉक है, किसने कितनी खरीदी और इस पर कितनी सब्सिडी दी गई। 

खाद की पूरी यात्रा पर डिजिटल नजर
देश में खाद प्रबंधन के लिए इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम (आईएफएमएस) पहले से मौजूद है, जिसे उर्वरक विभाग के लिए एनआईसी ने विकसित किया है। अब इसका दायरा बढ़ाकर खाद के उत्पादन, आयात, परिवहन, स्टॉक, खुदरा बिक्री और सब्सिडी को एक डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है। इससे 14 करोड़ से ज्यादा किसान और 2.5 लाख से अधिक खुदरा विक्रेता जुड़े हैं, जबकि सिस्टम सालाना करीब 7 करोड़ मीट्रिक टन उर्वरक लेनदेन और करीब 2 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी का प्रबंधन करता है।

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दुकान पर स्टॉक कम तो सिस्टम को पता चलेगा
नए डैशबोर्ड से राष्ट्रीय से लेकर खुदरा स्तर तक खाद के उत्पादन, आयात, डिस्पैच, स्टॉक और बिक्री की निगरानी की जा सकेगी। डेटा के जरिए किसी क्षेत्र में असामान्य बिक्री या आपूर्ति में कमी के संकेत पहले ही मिल सकेंगे, जिससे खाद की किल्लत और जमाखोरी पर समय रहते नजर रखी जा सकेगी।

किसान की जमीन से जुड़ेगी खाद की खरीद
आईएफएमएस को किसान, भूमि और फसल के डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ने का काम किया जा रहा है, ताकि खाद की खरीद को किसान की वास्तविक जरूरत से जोड़ा जा सके। हरियाणा में ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ और एग्रीस्टैक के साथ इसके एकीकरण का सफल परीक्षण हो चुका है। इससे किसान की जमीन, फसल और खरीदी गई खाद के आंकड़ों का मिलान कर जरूरत और वास्तविक खरीद का बेहतर आकलन किया जा सकेगा।

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मोबाइल से बुकिंग, क्यूआर कोड से मिलान
नए खाद बिक्री फ्रेमवर्क में मोबाइल बुकिंग ऐप को पॉइंट-ऑफ-सेल नेटवर्क से जोड़ा गया है। किसान जमीन और मालिकाना हक सत्यापित कर एग्रीस्टैक आईडी से खाद बुक कर सकते हैं। बुकिंग पर बने क्यूआर कोड से जरूरत और वास्तविक खरीद का मिलान होगा। डेटा एनालिटिक्स से किसान की श्रेणी, जमीन, फसल, जिला और खाद के प्रकार के आधार पर खरीद की निगरानी भी की जा सकेगी।

प्रति हेक्टेयर खाद की खपत भी दिखेगी
डिजिटल व्यवस्था से खाद की खपत का आकलन कुल बिक्री के बजाय प्रति हेक्टेयर और फसल के आधार पर भी किया जा सकेगा। बुकिंग में बताई गई जरूरत और वास्तविक खरीद का अंतर सामने आने से असामान्य खपत की पहचान होगी और सरकार को क्षेत्र व फसल के अनुसार खाद की वास्तविक मांग का बेहतर अनुमान मिल सकेगा।

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ट्रक भी नहीं होगा नजर से बाहर 
खाद की ढुलाई पर नजर रखने के लिए व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम को भी जोड़ा गया है। इससे वाहन की स्थिति, तय रास्ते, देरी या अनावश्यक ठहराव को डिजिटल रूप से ट्रैक किया जा सकता है। इससे आपूर्ति रोककर कृत्रिम कमी पैदा करने और जमाखोरी जैसी गतिविधियों पर समय रहते नजर रखने में मदद मिल सकती है।

सब्सिडी का पैसा भी डिजिटल निगरानी में
खाद पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी भी इस डिजिटल तंत्र से अब जुड़ गई है। 1 जनवरी 2026 से सब्सिडी बिलों की इलेक्ट्रॉनिक रसीदें सिस्टम में जोड़ी जा चुकी हैं, जिससे सब्सिडी से जुड़े दावों और वास्तविक भुगतान की निगरानी अब कहीं अधिक आसान हो गई है। अब आईएफएमएस केवल बिक्री का रिकॉर्ड तक सीमित नहीं, बल्कि उत्पादन से किसान तक खाद की पूरी आपूर्ति शृंखला और सब्सिडी को जोड़ने वाला डिजिटल तंत्र बन रहा है।

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किसान के लिए ये होगा असली बदलाव 
इस व्यवस्था की असली सफलता तभी मानी जाएगी, जब किसान को जरूरत के समय खाद उपलब्ध हो। इसके लिए जमीन, फसल और खरीद के आंकड़ों का सही व अद्यतन होना जरूरी है। आईएफएमएस के जरिए उत्पादन से लेकर परिवहन, स्टॉक और बिक्री तक निगरानी मजबूत हो सकती है, जिससे कालाबाजारी और जमाखोरी पर नियंत्रण में मदद मिलेगी।

किसानों को भी अपनी जानकारी अपडेट रखकर उपलब्ध होने पर डिजिटल बुकिंग का इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि खरीद पारदर्शी रहे और सरकार को खाद की वास्तविक मांग का बेहतर आंकड़ा मिल सके।

(यह लेख मूल रूप से अमर उजाला गांव जंक्शन पत्रिका के सितंबर 2026 अंक में प्रकाशित किया गया है।)
 
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