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Home› Misal Bemisal› From Crop Losses To 20 25 Lakh Annual Income How A Basti Farmer Built A Tech Driven Farming Model

मिसाल : केले में घाटा, गेहूं की फसल बर्बाद, फिर बस्ती जिले के किसान ने तकनीक से बनाया 20-25 लाख कमाई का मॉडल

बृहस्पति कुमार पाण्डेय (कृषि पत्रकार), बस्ती, उ.प्र. Published by: Umashankar Mishra Updated Tue, 15 Sep 2026 01:46 PM IST
सार

बस्ती जिले के किसान अरविंद कुमार सिंह ने नकदी फसलों और आधुनिक कृषि यंत्रों से सालाना 20-25 लाख रुपये की कमाई का मॉडल बनाया है। एफपीओ के जरिये वे 400 किसानों की आय बढ़ाने में जुटे हैं। 

अरविंद कुमार सिंह ने मजदूरों पर निर्भरता घटाने के लिए मशीनीकरण को अपना हथियार बनाया।
अरविंद कुमार सिंह ने मजदूरों पर निर्भरता घटाने के लिए मशीनीकरण को अपना हथियार बनाया। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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खेती को घाटे का सौदा मानने की धारणा को उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के भेलवल गांव के 50 वर्षीय किसान अरविंद कुमार सिंह ने अपनी मेहनत और सूझबूझ से बदलकर रख दिया है। आज वह सालाना 20-25 लाख रुपये कमाकर दूसरे किसानों के लिए मिसाल बन गए हैं।

करीब 20 साल पहले उन्होंने पारंपरिक खेती से हटकर नया प्रयोग शुरू किया, लेकिन पहले ही साल केले की खेती में भारी नुकसान हुआ। इसके बाद 12 एकड़ में गेहूं की मड़ाई मजदूरों की कमी से अटक गई और खराब मौसम ने पूरी फसल बर्बाद कर दिया। इन लगातार झटकों के बावजूद अरविंद ने हार नहीं मानी और खेती का तरीका बदलने का फैसला किया। 
 
घाटे से सबक लेकर अरविंद ने ऐसी फसलें लगानी शुरू की, जिनकी बाजार में मांग बनी रहती है।
घाटे से सबक लेकर अरविंद ने ऐसी फसलें लगानी शुरू की, जिनकी बाजार में मांग बनी रहती है। - फोटो : गांव जंक्शन

नकदी फसलों से बदली खेती की दिशा

घाटे से सबक लेते हुए अरविंद ने दूसरे साल से ऐसी फसलें लगानी शुरू की, जिनकी बाजार में मांग बनी रहती है और उनसे नियमित आमदनी होती रहती है। करीब चार एकड़ सिंचित भूमि पर उन्होंने अरहर, तिल, सरसों, चना, गन्ना, आलू, सावां, मडुआ और कोदो जैसी फसलें उगानी शुरू की।

इसके साथ ही, आठ एकड़ में आम, स्ट्रॉबेरी, करेला और केला जैसी बागवानी फसलों को जगह दी। इसके अलावा, दो एकड़ में एक तालाब लीज पर लेकर मछली पालन का काम भी शुरू कर दिया और एक ही खेत से आय के कई स्रोत खड़े कर दिए।
 
रोटावेटर, सुपर सीडर, पावर टिलर, ड्रोन, पैडी स्ट्रॉ चॉपर जैसे कई यंत्र अरविंद के पास हैं।
रोटावेटर, सुपर सीडर, पावर टिलर, ड्रोन, पैडी स्ट्रॉ चॉपर जैसे कई यंत्र अरविंद के पास हैं। - फोटो : गांव जंक्शन

मशीनों को बनाया अपनी खेती का साथी

अरविंद की सबसे बड़ी सूझबूझ यह रही कि उन्होंने मजदूरों पर निर्भरता घटाने के लिए मशीनीकरण को अपना हथियार बनाया। शुरुआत एक ट्रैक्टर, रोटावेटर और जीरो टिल सीड ड्रिल मशीन से हुई। धीरे-धीरे सुपर सीडर, पावर टिलर, थ्रेसर, पैडी स्ट्रॉ चॉपर जैसे यंत्र भी इस सूची में जुड़ते गए।

अरविंद की कोशिशों का नतीजा यह हुआ कि महज पांच साल में उनकी सालाना आमदनी करीब 15 लाख रुपये तक पहुंच गई, जिससे उन्होंने न सिर्फ यंत्रों के लिए लिया गया कर्ज चुकाया, बल्कि लीज पर जमीन लेकर खेती का रकबा भी बढ़ाना शुरू कर दिया।

आज उनके पास कृषि ड्रोन से लेकर लेजर लैंड लेवलर, ड्रिप इरिगेशन सिस्टम और डीएसआर मशीन तक खेती के लगभग हर काम के लिए आधुनिक यंत्र मौजूद हैं। ये कृषि यंत्र जुताई से लेकर कटाई और फसल अवशेष प्रबंधन तक खेती के हर चरण को आसान, तेज और किफायती बना रहे हैं।
 
एक प्रदर्शनी में अपने उत्पादों के बारे में राज्यपाल आनंदीबेन को बताते हुए अरविंद कुमार सिंह।
एक प्रदर्शनी में अपने उत्पादों के बारे में राज्यपाल आनंदीबेन को बताते हुए अरविंद कुमार सिंह। - फोटो : गांव जंक्शन

पानी की कद्र और पराली का समाधान 

सिंचाई में सोलर पंप, ड्रिप इरिगेशन, स्प्रिंकलर और रेनगन जैसी तकनीकों को अपनाकर अरविंद ने करीब 70 प्रतिशत तक पानी की बचत की है, जिससे न सिर्फ लागत घटी बल्कि श्रम की जरूरत भी काफी कम हो गई। जहां आज भी कई किसान पराली जलाने को मजबूर हैं, वहीं अरविंद पैडी स्ट्रॉ चॉपर, मल्चर और वेस्ट डी-कम्पोजर जैसे उपायों से फसल अवशेषों को खेत में ही गलाकर खाद में बदल देते हैं। उनकी यह पहल आसपास के किसानों को भी प्रेरित कर रही है।

400 किसानों की आय बढ़ाने की मुहिम

अपनी सफलता को सिर्फ अपने खेतों तक सीमित न रखते हुए अरविंद सिंह ने भेलवल एग्रीकल्चर प्रोड्यूसर कंपनी की स्थापना की, जिससे आज करीब 400 किसान जुड़े हुए हैं। इस एफपीओ के जरिये 100 किसानों को कालानमक धान की खेती से जोड़ा गया है, जिसमें से जैविक विधि अपनाने वाले किसानों की आय करीब तीन गुना तक बढ़ चुकी है।

खेती में नवाचार के लिए अरविंद सिंह को गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों 51 हजार रुपये का पुरस्कार मिल चुका है। इसके साथ ही, उन्हें दो बार उत्तर प्रदेश के राज्यपाल ने भी सम्मानित किया है।

आज अरविंद कुमार सिंह की कहानी यह भरोसा देती है कि सही सोच, तकनीक और मेहनत के साथ खेती भी शानदार की जिंदगी दे सकती है।

(यह स्टोरी मूल रूप से गांव जंक्शन पत्रिका के सितंबर 2026 अंक में प्रकाशित की गई है)
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