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Cleanest Village: भारत में यहां है एशिया का सबसे स्वच्छ गांव, नदी पर बना पेड़ों का पुल कर देगा हैरान - Video

गांव जंक्शन, नोएडा Published by: Mohammad Aamil Updated Sun, 15 Jun 2025 03:02 PM IST
सार

मावल्यान्नांग गांव भारत के सबसे अनोखे और खूबसूरत गांवों में से एक है। इस गांव की खासियतें और प्राकृतिक सौंदर्य इसे एक आदर्श ऑफबीट डेस्टिनेशन बनाते हैं, खासकर उन यात्रियों के लिए जो भीड़भाड़ से दूर रहकर प्रकृति के बीच कुछ शांत पल बिताना चाहते हैं।

एशिया का सबसे स्वच्छ गांव मावल्यान्नांग
एशिया का सबसे स्वच्छ गांव मावल्यान्नांग - फोटो : धर्मेंद्र कुंतल
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विस्तार
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भारत में यूं तो लाखों गांव हैं, लेकिन इनमें से कुछ चुनिंदा गांव ऐसे हैं जिनकी पहचान देश ही नहीं बल्कि दूसरे मुल्कों में भी है। आज एक ऐसे गांव की बात करने जा रहे हैं, जिसे एशिया के सबसे स्वच्छ गांव का खिताब हासिल है। इस गांव की खूबसूरती देखते ही बनती है। फलों के बगीचे, रंग-बिरंगे फूलों से महकते घर, तेज बहती नदी और उसपर बने प्राकृतिक पुल, इसके अलावा लहराते ताड के पेड़ आपको सुकून के बेहतर पल देंगे।

यह शांत और सुंदर गांव है मेघालय  पूर्वी खासी (Hills District) हिल्स जिले में स्थित है। साफ-सुथरे इस गांव का नाम है मावल्यान्नांग (Mawlynnong)। हाल ही में ब्लॉगर धर्मेंद्र कुंतल ने गांव की यात्रा कर वीडियो साझा किया। आइए जानते हैं इस गांव की खासियत।   

एशिया का सबसे स्वच्छ गांव
धर्मेंद्र कहते हैं कि मावल्यान्नांग गांव भारत के सबसे अनोखे और खूबसूरत गांवों में से एक है। इस गांव की खासियतें और प्राकृतिक सौंदर्य इसे एक आदर्श ऑफबीट डेस्टिनेशन बनाते हैं, खासकर उन यात्रियों के लिए जो भीड़भाड़ से दूर रहकर प्रकृति के बीच कुछ शांत पल बिताना चाहते हैं। मावल्यान्नांग गांव एशिया का सबसे स्वच्छ गांव है। गांव में बांस के रंगीन डस्टबिन लोगों को अपनी और आकर्षित करते हैं। स्वच्छता में स्थानीय लोगों की भागीदारी बेहद सराहनीय है। 

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गांव में मिलगी सुकून और सुंदरता

गांव की प्राकृतिक सुंदरता को देख मन को सुकून और शांति मिलती है। हरा-भरा वातावरण, फूलों से सजी गलियां, पारंपरिक खासी शैली के घर, ऊँचे पेड़ों के बीच बनी लिविंग रूट ब्रिज बेहद अनोखे हैं। यहां आने वाले पर्यटकों को एडवेंचर एक्टिविटीज भी मौजूद हैं, इनमें कायाकिंग, गुफाएं एक्सप्लोर करना, झरना ट्रेकिंग शामिल हैं। इनके लिए गाइड भी उपलब्ध रहता है। मॉनसून में यह गांव और भी सुंदर हो जाता है। 
नदी पर बना नोह्वेत लिविंग रूट ब्रिज
नदी पर बना नोह्वेत लिविंग रूट ब्रिज - फोटो : धर्मेंद्र कुंतल
खास है नदी पर बना नोह्वेत लिविंग रूट ब्रिज
गांव में सबसे जयादा आकर्षित करने वाला यहां नदी पर बना नोह्वेत लिविंग रूट ब्रिज (Nongriat/Nohwet Living Root Bridge)  है।  पुल को फिक्स इलास्टिका पेड़ की जड़ों को एक ढांचे के चारों ओर बुनकर बनाया गया है। जैसे-जैसे ये पुराने होते जाते हैं, ये और भी मजबूत होते जाते हैं। पुल को निहारने के बाद, आप नदी के बहते, ठंडे पानी में डुबकी भी लगा सकते हैं।

यह खासी समुदाय की परंपरागत वास्तुकला, प्रकृति से उनका संबंध और पीढ़ियों से चली आ रही सतत जीवनशैली का अद्भुत उदाहरण है। ये पुल खासी जनजाति के बुज़ुर्गों द्वारा पीढ़ी-दर-पीढ़ी पारंपरिक ज्ञान के माध्यम से बनाए जाते हैं। इसमें धैर्य और वर्षों की मेहनत लगती है क्योंकि एक पुल को पूरी तरह तैयार होने में 15 से 20 साल तक का समय लग सकता है।

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मावल्यान्नांग कैसे पहुंचें?
गांव जाने के लिए सबसे पहले मेघालय की राजधानी शिलांग या चेरापूंजी पहुंचें। शिलांग से मावल्यान्नांग की दूरी लगभग 97 किमी है। शिलांग-चेरापूंजी से दावकी गांव तक बसें या शेयर टैक्सी मिलती हैं। दावकी से मावल्यान्नांग लगभग 17 किमी दूर है। यहां से टैक्सी या बाइक राइड ले सकते हैं। 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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गांव में बजट फ्रेंडली होमस्टे बहुत लोकप्रिय हैं
गांव में बजट फ्रेंडली होमस्टे बहुत लोकप्रिय हैं - फोटो : धर्मेंद्र कुंतल
ठहरने की सुविधा
गांव में बजट फ्रेंडली होमस्टे बहुत लोकप्रिय हैं, जो स्थानीय जीवनशैली और खासी संस्कृति का अनुभव देते हैं। यहां घूमने का समय अक्टूबर से अप्रैल अच्छा माना जाता है। इनदिनों मौसम साफ और सुहावना रहता है। मॉनसून (जून–सितंबर) में हरियाली चरम पर होती है, लेकिन कुछ रास्ते फिसलन भरे हो सकते हैं।

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क्यों जाएं मावल्यान्नांग?
अगर आप शांति, स्वच्छता और सादगी से भरी जगह में कुछ दिन बिताना चाहते हैं, प्रकृति के करीब रहना चाहते हैं, एडवेंचर, फोटोग्राफी और लोकल संस्कृति का अनुभव लेना चाहते हैं, तो मावल्यान्नांग गांव आपके लिए बेहद शानदार जगह है।
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