विज्ञापन
Home› Sair Sapata› Chhattisgarh Bastar Dhoodmaras Village Not On Google Map International Identity Tourists Come From Abroad

Google map पर नहीं पहाड़ी-नदी से घिरा ये खूबसूरत गांव : फिर भी अंतरराष्ट्रीय पहचान, विदेशों से आते हैं पर्यटक

गांव जंक्शन, नोएडा Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 09 Jun 2025 05:20 PM IST
सार

यह खूबसूरत गांव छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में मौजूद है, जिसे धूड़मारास के नाम से जाना जाता है। यह गांव बिना डिजिटल मौजूदगी के भी आज वैश्विक पर्यटकों का आकर्षण बन गया है। धूड़मारास को हाल ही में संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन (UNWTO) के "बेस्ट टूरिज्म विलेज अपग्रेडेशन प्रोग्राम" के तहत मान्यता मिली है।

बस्तर जिले की घनी हरियाली के बीच बसा गांव धूड़मारास
बस्तर जिले की घनी हरियाली के बीच बसा गांव धूड़मारास - फोटो : गांव जंक्शन
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

देश का एक गांव ऐसा है जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाए हुए है। लेकिन, आज के डिजिटल युग में यह गांव गूगल मैप से कटा हुआ है। प्रकृति के खजाने से घिरे इस गांव में देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी पर्यटक घूमने के लिए आते हैं। हैरत की बात यह यह है कि इस गांव में कोई होटल भी नहीं है। गांव की खबूसरती का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि यह हरी-भरी पहाड़ियों, जंगलों और शांत नदी से घिरा हुआ है। यह खूबसूरत गांव छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में मौजूद है, जिसे धूड़मारास के नाम से जाना जाता है। यह गांव बिना डिजिटल मौजूदगी के भी आज वैश्विक पर्यटकों का आकर्षण बन गया है।

गांव को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले की घनी हरियाली के बीच बसा गांव धूड़मारास को हाल ही में संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन (UNWTO) के "बेस्ट टूरिज्म विलेज अपग्रेडेशन प्रोग्राम" के तहत मान्यता मिली है। गांव में आने वाले पर्यटक यहां के प्राकृतिक नजारों के साथ परंपरा और संस्कृति से भी रूबरू होते हैं। गांव में कोई होटल नहीं है, फिर भी यहां रुकने वालों को लगता है कि उन्होंने असली भारत को छू लिया है। गांव में आने वाले पर्यटक  बांस, लाल ईंट और पत्थरों से बने घरों में होमस्टे करते हैं। 

पारंपरिक शैली में बनता है खाना 
गांव में खाना भी पारंपरिक शैली में पकाया जाता है। खाना बनाने के लिए जंगल से इकट्ठा की गईं लकड़ियों और अन्य सामग्री का उपयोग होता है, लकड़ी के चूल्हे में सुलगती आग से पकता भोजन यहां की मेहमाननवाजी को और खास बना देता है। पर्यटक यहां सिर्फ देखने नहीं, जीने आते हैं और वह भी गांव का हिस्सा बन जाते हैं। 

गांव न मेप पर और न किसी एप पर 
गांव में जाने के लिए एक एंट्री गेट बना हुआ है। उसपर अंग्रेजी में 'धरवा डेरा' लिखा हुआ है। यह गांव न तो किसी मानचित्र पर दिखता है, न ही किसी एप पर इसकी रेटिंग है। फिर भी यह गांव अपने प्राकृतिक सौंदर्य, धुरवा जनजाति की सांस्कृतिक विरासत, और आदिवासी जीवनशैली के कारण दिल जीत रहा है।

धुड़मारस में पर्यटन सिर्फ कमाई का जरिया नहीं, बल्कि सशक्तिकरण का माध्यम बन गया है। स्थानीय लोग स्वयं अपने घरों में पर्यटकों की मेजबानी करते हैं, उन्हें जंगलों की सैर कराते हैं, और अपनी लोककथाओं व जीवनशैली से परिचित कराते हैं। गांव की युवा पीढ़ी को अब न केवल रोजगार मिला है, बल्कि अपनी संस्कृति पर गर्व करने का अवसर भी मिला है।

प्राकृतिक रोमांच भी भरपूर
गांव के पास बहती कांगेर नदी राफ्टिंग, कयाकिंग, ट्रैकिंग और पक्षी अवलोकन जैसे रोमांचक गतिविधियों के लिए आदर्श स्थान बन गई है। बांस की नावों में सैर, और पक्षियों की आवाज के बीच जंगल की सैर यहां की सबसे लोकप्रिय गतिविधियों में से हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन