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किसान का कमाल : मजबूरी में करनी पड़ी मजदूरी, अब दे रहे रोजगार, नकदी खेती से पांच महीने में कमाए 18 लाख रुपये

गांव जंक्शन, महराजगंज Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 21 Jun 2025 07:19 PM IST
सार

यह कहानी है एक ऐसे किसान की, जिसके पास हाईस्कूल की पढ़ाई के लिए फीस जमा करने के लिए पैसे नहीं थे। मजदूरी के लिए पंजाब और मुंबई गए। आमदनी नहीं हुई तो गांव वापस आकर खेती में किस्मत आजमाई। आज इस किसान की सफलता ने महराजगंज जिले के छोटे-से गांव मठिया इंदु को ग्रामीण भारत के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बना दिया है।

नगदी खेती ने बदल दी किस्मत
नगदी खेती ने बदल दी किस्मत - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के छोटे से गांव मठिया इंदु की तस्वीर एक किसान के हौसले और मेहनत ने बदल दी है। यह कहानी है किसान विजेंद्र चौरसिया की, जो कभी हाईस्कूल की फीस भरने के लिए भी संघर्ष कर रहे थे। मजदूरी के लिए पंजाब और मुंबई गए लेकिन आमदनी नहीं हुई। तब वे गांव लौटे और खेती को अपना जीवन बना लिया। पारंपरिक खेती छोड़कर उन्होंने नगदी फसलों की ओर रुख किया और अब उनका गांव ग्रामीण भारत के लिए प्रेरणास्त्रोत बन चुका है।

नगदी खेती ने बदल दी किस्मत
विजेंद्र चौरसिया ने गांव के अन्य किसानों को संगठित कर पारंपरिक खेती की जगह स्ट्रॉबेरी, करेला, लौकी और खीरा जैसी नगदी फसलों की खेती शुरू करवाई। उन्होंने 10 एकड़ भूमि पर खेती कर पांच महीने में करीब 18 लाख रुपये का शुद्ध लाभ कमाया। इस दौरान उन्होंने 4 लाख रुपये से अधिक मजदूरी और ट्रांसपोर्ट पर खर्च किए, जिसमें गांव की 30 से अधिक महिलाएं और 10 पुरुष नियमित रूप से कार्यरत रहे।

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जुड़े हैं 500 से ज्यादा किसान

आज विजेंद्र “मां पाटेश्वरी वेजिटेबल प्रोड्यूसर कंपनी” के निदेशक हैं, जो एक किसान उत्पादक संगठन (FPO) है। इसमें 516 किसान जुड़ चुके हैं। यह संस्था अनुबंध आधारित खेती के माध्यम से छोटे किसानों को बेहतर बाज़ार और तकनीक उपलब्ध करवा रही है। विजेंद्र गांव में ही एक स्कूल भी चला रहे हैं, जहां 500 से अधिक बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

गांव बना सब्जी उत्पादन का केंद्र
जहां पहले गांव के लोग गेहूं बेचकर सब्जी खरीदते थे, अब यहां 500 एकड़ से अधिक भूमि पर सब्जी की खेती हो रही है। पहले उपज को बेचने के लिए किसानों को 20 किमी दूर फरेंदा जाना पड़ता था, लेकिन अब मठिया इंदु गांव में ही मंडी लगने लगी है। गोरखपुर, बस्ती, खलीलाबाद, देवरिया जैसे जिलों से व्यापारी गांव में ही आकर फसल खरीदते हैं।

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जहरमुक्त सब्जी ग्राहकों तक पहुंचाना 

विजेंद्र का अगला लक्ष्य 100 से अधिक लोगों को रोजगार देना और जैविक, जहरमुक्त सब्जी ग्राहकों तक पहुंचाना है। वे खुद जैविक कीटनाशकों का प्रयोग करते हैं और अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं। 

राज्यपाल, सीएम और वित्त मंत्री ने सराहा
विजेंद्र चौरसिया की इस पहल की सराहना उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण तक कर चुके हैं। उन्हें राज्य स्तर पर सम्मानित भी किया गया है। किसान विजेंद्र की यह यात्रा बताती है कि यदि जुनून और दृष्टिकोण सही हो, तो सीमित संसाधन भी किसी गांव को आर्थिक समृद्धि का केंद्र बना सकते हैं। मठिया इंदु अब न केवल कृषि उत्पादन में आगे है, बल्कि ग्रामीण बदलाव का एक शानदार उदाहरण भी बन चुका है।


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