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Himachal Pradesh Kangra Farmer Apple Orchard Flourished On Barren Land Success Achieved Through Mnrega Scheme
हिमाचल के किसान का कमाल : बंजर जमीन पर लहलहा दिया सेबों का बाग, मनरेगा योजना से पाई सफलता
गांव जंक्शन, नोएडा
Published by: Mohammad Aamil
Updated Fri, 20 Jun 2025 12:20 PM IST
सार
कांगड़ा के किसान प्रीतम की सफलता को देखते हुए, ग्रामीण विकास विभाग अब कांगड़ा जिले में सेब और ब्लूबेरी जैसी उच्च मूल्य की फसलों को बढ़ावा देने की योजना पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य है स्थानीय रोजगार सृजन, गरीबी उन्मूलन और आय में वृद्धि।
कांगड़ा के किसान प्रीतम का कमाल
- फोटो : गांव जंक्शन
कहते हैं, अगर मेहनत की जाए तो एक दिन सफलता जरूर मिलती है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के कनेड़ ग्राम पंचायत के सीमांत किसान प्रीतम चंद ने। उन्होंने कड़ी मेहनत कर बंजर पड़ी भूमि को हराभरा कर दिया। आज उस जमीन पर सेब के लहलहाते बागान नजर आते हैं। यह परिवर्तन महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के सहयोग से संभव हो सका, जिसने न केवल जमीन को उपजाऊ बनाया बल्कि एक किसान को सशक्त भी किया। किसान प्रीतम की कहानी अब ग्रामीण नवाचार और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी है।
4 साल पहले लगाए 330 सेब के पौधे
ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, धर्मशाला के तत्कालीन खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) अभिनीत कात्यायन ने बताया कि वर्ष 2020-21 में प्रीतम चंद की 0.4 हेक्टेयर जमीन को मनरेगा के अंतर्गत सेब की खेती के लिए चयनित किया गया था। कुल 1 लाख रुपये की परियोजना लागत में से 52,074 रुपये मजदूरी पर खर्च किए गए और 330 सेब के पौधे लगाए गए।
बंजर जमीन को कर दिया हराभरा
जिस जमीन पर सेब के पौधे लगाए, वह पहले अनुपजाऊ और आर्थिक दृष्टि से निष्क्रिय थी। प्रीतम चंद ने पहली ही फसल में 250 किलो सेब की बिक्री से 30,000 रुपये की आय अर्जित की, जबकि फसल का एक बड़ा हिस्सा अभी भी पेड़ों पर है। वे रॉयल और गोल्डन सेब की किस्में उगा रहे हैं, जो अब स्थानीय बाजार में मांग में हैं और गुणवत्ता के प्रतीक बन गए हैं।
दूसरे किसानों को कर रहे प्रेरित
प्रीतम सिर्फ एक सफल बागवानी किसान नहीं बने हैं, बल्कि उन्होंने प्राकृतिक खेती की ओर रुख कर गांव में टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल खेती को बढ़ावा देना भी शुरू किया है। वह अपने अनुभवों से अन्य किसानों को भी पर्यावरण-हितैषी तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। प्रीतम की सफलता को देखते हुए, ग्रामीण विकास विभाग अब सेब के साथ-साथ ब्लूबेरी जैसे उच्च मूल्य की फसलों को भी बढ़ावा देने की योजना बना रहा है। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय रोजगार सृजन, गरीबी उन्मूलन और बागवानी आधारित आय के अवसर विकसित करना है।
किसान प्रीतम ने दिलाई पहचान
आज प्रीतम चंद की यह यात्रा न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को बदल चुकी है, बल्कि पड़ोसी गांवों में वृक्षारोपण आधारित खेती को लेकर जागरूकता और प्रेरणा का स्रोत बन गई है। मनरेगा जैसी योजनाओं का सही क्रियान्वयन और स्थानीय भागीदारी किस तरह ग्रामीण भारत का चेहरा बदल सकती है, इसकी मिसाल अब कनेड़ ग्राम पंचायत बन चुका है।
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