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Father S Day 2025 Father Planted Jackfruit Tree 43 Years Ago Son Became A Millionaire Farmer
Father's Day 2025 : पिता ने लगाया 43 साल पहले अनोखा पेड़, आज बेटा बन गया करोड़पति किसान
गांव जंक्शन, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Sun, 15 Jun 2025 01:47 PM IST
सार
कर्नाटक के तुमकुरु जिले की तालुका चेलुर के गांव सीगेनहल्ली में साल 1982 में एसके सिद्दप्पा ने अपनी जमीन पर एक कटहल का पेड़ लगाया था। उन्हें शायद नहीं पता था कि यह पेड़ उनके बेटे एसएस परमेशा की किस्मत को बदल देगा। इस पेड़ पर आने वाला कटहल का फल अनोखा निकला।
पिता ने लगाया 43 साल पहले अनोखा पेड़
- फोटो : गांव जंक्शन
आज फादर्स डे मनाया जा रहा है। लोग अपने-अपने पिता को विश कर रहे हैं। कई ऐसी कहानियां भी सामने आ रही हैं, जिनमें पिता के किस्सों को साझा किया जा रहा है। आज इस खास दिन पर हम उस किसान पिता का जिक्र करेंगे, जिसने 43 साल पहले एक पेड़ लगाया, जो उसके बेटे के लिए वरदान बन गया। पिता के लगाए इस पेड़ से आज उनका बेटा करोड़पति बन गया है और हर साल वह एक करोड़ से अधिक की कमाई करते हैं। यह कहानी कर्नाटक के एक किसान की है, जिसकी जमीन पर चार दशक पहले उसके पिता द्वारा लगाया गया एक कटहल का पेड़, जो आज की तारीख में न सिर्फ उन्हें करोड़ो की कमाई करा रहा है, बल्कि उनकी अलग पहचान देश में बना दी है।
1982 में पिता ने लगाया कटहल का पेड़
कर्नाटक के तुमकुरु जिले की तालुका चेलुर के गांव सीगेनहल्ली में साल 1982 में एसके सिद्दप्पा ने अपनी जमीन पर एक कटहल का पेड़ लगाया था। उन्हें शायद नहीं पता था कि यह पेड़ उनके बेटे एसएस परमेशा की किस्मत को बदल देगा। इस पेड़ पर आने वाला कटहल का फल अनोखा निकला। इस कटहल में सामान्य कटहल की तुलना में फाइबर, विटामिन A, C, पोटैशियम और एंटीऑक्सिडेंट जैसे पोषक तत्व अधिक पाए गए। पिता के गुजरने के बाद बेटे परमेशा ने पेड़ का नाम अपने पिता के नाम पर सिद्दू रख दिया।
IIHR ने किया करार, बना कमाई का साधन
इस अनोखे कटहल की जानकारी 2017 में हॉर्टिकल्चर रिसर्च विभाग (IIHR) को हुई। उन्होंने किसान परमेशा के साथ एक करार किया, ताकि इस किस्म के कटहल को ज्यादा से ज्यादा मात्रा में उगाया जा सके। वैज्ञानिकों की टीम ने इसकी नस्ल तैयार की। पौध बनने पर उसे बेचा जाने लगा। इसके लिए परमेशा को कमाई का 75 फीसदी हिस्सा दिया जाने लगा। कुछ दिन में परमेशा को अच्छी कमाई होने लगी। 2017 के आंकड़े के मुताबिक, उन्हें 10 लाख रुपये का मुनाफा हुआ। आज उनका सिद्धू कटहल कर्नाटक का पहला ऐसा फल बन गया है जिसे उसके विशिष्ट गुणों के लिए केंद्र सरकार द्वारा मान्यता दी गई है, जिससे इसके किसानों को इस फल पर विशेष अधिकार प्राप्त हो गया है।
पिता के पेड़ से बनाई नर्सरी, कमा रहे करोड़ो
धीरे-धीरे किसान परमेशा ने अपने पिता के उगाए अनोखे कटहल के पेड़ से नर्सरी तक का सफर तय किया। द वीक की रिपोर्ट के मुताबिक, 2017 तक किसान परमेशा की सालाना आमदनी कम थी, आज 'सिद्दू' के 30000 से अधिक पौधे हर साल बेचकर वह 1 करोड़ से ज्यादा कमा रहे हैं। इसमें उन्हें सबसे बड़ा योगदान वैज्ञानिक सहयोग का है। IIHR (भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान) के सहयोग से किस्म का प्रमाणीकरण और प्रचार हुआ। उनके बीच PPV & FRA अधिनियम के तहत 18 साल का पेटेंट संरक्षण (2023–2041) तय हुआ।
रॉयल्टी से कमाए 16 लाख रुपये
रिपोर्ट के मुताबिक, किसान परमेशा ने साल 2023 में रॉयल्टी से ही 16 लाख रुपये कमाए थे। उन्हें हर पौधे पर 40% यानि 170 रुपये मिलते हैं। उनकी नर्सरी में स्थानीय महिलाओं को रोजगार मिला है। नर्सरी में 10 महिला मजदूर काम कर रही हैं। किसान परमेशा iPhone से कीमतें और फसल पर निगरानी करते हैं। 500 पौधों की डिलीवरी के लिए निजी वाहन और कूरियर सेवा का उपयोग होता है।
किसान की कमाई कैसे बढ़ी?
जब इस कटहल की गुणवत्ता और अनोखे स्वाद की खबर फैली, तो इसकी मांग तेजी से बढ़ी। एक बार में पेड़ से 100 से ज्यादा कटहल निकाले जा सकते हैं, जिनकी कीमत बाजार में 500–1000 रुपये प्रति पीस तक जाती है। बड़े व्यापारी और निर्यातक किसान के खेत तक आने लगे। इस पेड़ से तैयार कलम/पौधे भी 1000–2000 रुपये में बिकने लगे।
स्वाद में खास
इसका स्वाद सामान्य कटहल से अलग, ज्यादा मीठा और सुगंधित होता है, जिससे यह प्रीमियम श्रेणी में आता है। इसकी एक खास बात यह भी है कि इसमें बीज बहुत कम या न के बराबर होते हैं, जिससे इसका उपयोग और प्रसंस्करण (processing) आसान हो जाता है। इसकी गुणवत्ता और स्वाद के चलते विदेशों में इसकी भारी मांग है – खासतौर पर खाड़ी देश, मलेशिया, सिंगापुर आदि में। इस कटहल की गुणवत्ता को देखकर वैज्ञानिकों और कृषि विभाग ने इसे क्लोनिंग और ग्राफ्टिंग के जरिए बढ़ावा देने की प्रक्रिया शुरू की।
इस अनोखे कटहल को क्या बनाता है खास?
अनूठा रंग और स्वाद।
फल के गुच्छे तांबे जैसे लाल रंग के होते हैं।
सामान्य पीली या सफेद किस्मों की तुलना में ज्यादा मीठा और सुगंधित स्वाद।
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