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Home› Misal Bemisal› Gujarat News Amazing Feat Of Farmer From Junagadh 12 Indigenous Varieties Of Mangoes Growing On Single Tree

गुजरात के किसान का कमाल : एक ही पेड़ पर उग रहे 12 किस्मों के आम, सभी देसी किस्म के

गांव जंक्शन, जूनागढ़ Published by: Mohammad Aamil Updated Sun, 08 Jun 2025 05:25 PM IST
सार

गुजरात के जूनागढ़ जिले के छोटे से गांव दितला में आम के पेड़ पर लगे आम स्वाद, रंग, आकार और वजन में एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। कुछ आम 50 ग्राम के हैं तो कुछ का वजन 2 किलो तक है।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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गुजरात के जूनागढ़ जिले के छोटे से गांव दितला में एक आम के पेड़ पर एक-दो नहीं बल्कि 12 वैरायटी के आम उग रहे हैं। आम का यह पेड़ लोगों को अपनी और आकर्षित कर रहा है। खास बात यह है कि इस पेड़ पर तीनों मौसम, सर्दी, गर्मी और बरसात में आम की फसल आती है। इस अनोखे पेड़ के पीछे प्रगतिशील किसान उकाभाई की मेहनत का कमाल है, जिन्होंने परंपरागत कृषि ज्ञान और आधुनिक ग्राफ्टिंग तकनीक के माध्यम से एक ही पेड़ पर 12 किस्मों की कलमें जोड़ दीं।

एक पेड़ और बारह आम की किस्म
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उकाभाई के इस पेड़ पर लगे आम स्वाद, रंग, आकार और वजन में एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। कुछ आम 50 ग्राम के हैं तो कुछ का वजन 2 किलो तक है। उकाभाई कहते हैं कि सभी आम देसी किस्मों के हैं, जिनकी खुशबू और मिठास आधुनिक हाइब्रिड आमों से कई गुना बेहतर है। 

उकाभाई का कहना है कि उनका मकसद सिर्फ खेती करना नहीं, बल्कि देसी आमों की विरासत को बचाना है। वह कहते हैं कि “अगर हम अपनी परंपरागत किस्मों को अब नहीं बचाएंगे, तो अगली पीढ़ियां सिर्फ नाम सुनेंगी, स्वाद नहीं जान पाएंगी,”

ऐसे किया किसान ने कमाल
उकाभाई ने बताया कि उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों से देसी किस्मों के आम इकट्ठा किए हैं और उन्हें ग्राफ्टिंग के जरिए अपने पेड़ पर जोड़े हैं। वह कहते हैं कि हर बार नई किस्म सफल होते ही वे अगली जोड़ने की तैयारी शुरू कर देते हैं। उकाभाई के पास आम की खेती का एक व्यावसायिक बगीचा है, जहां वे खासतौर पर 'केसर आम' उगाते हैं, लेकिन उनके घर के आंगन में खड़ा यह पेड़ उनके सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है। 

उकाभाई कहते हैं कि “मेरे लिए यह पेड़ सिर्फ फल देने वाला नहीं है, यह संस्कृति और विरासत को जिंदा रखने वाला है।” आज उनके गांव से लेकर जिले तक के किसान और कृषि विशेषज्ञ उनके काम की तारीफ कर रहे हैं। 
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