अगर मानसून हुआ मेहरबान : किसानों के लिए कितना होगा वरदान?
गांव जंक्शन, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Fri, 13 Jun 2025 07:51 PM IST
सार
सामान्य से अधिक बारिश के अनुमान से खरीफ फसलों की बुवाई को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। बारिश का लाभ उठाने के लिए किसानों को जल संरक्षण और फसल प्रबंधन की तैयारी करनी होगी।
मानसून आने से भारत के कृषि क्षेत्र को बड़ी बढ़त मिलेगी
- फोटो : गांव जंक्शन
इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून ने आठ दिन पहले केरल में दस्तक दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) का मानना है कि समय से पहले मानसून आने से भारत के कृषि क्षेत्र को बड़ी बढ़त मिलेगी। मानसून में देश के बड़े हिस्से में विभिन्न फसलें उगाई जाती हैं, क्योंकि यह मौसम बारिश और नमी प्रदान करता है, जो पौधों की वृद्धि के लिए आदर्श है। आईएमडी के अनुसार, इस साल 105% मानसूनी बारिश की संभावना है। बरसात संतुलित रही तो फसलों के लिए यह वरदान साबित हो सकती है। लेकिन, कम या अधिक बारिश फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है। आइए, जानें कि मानसूनी बारिश में किसानों को अपनी फसलों की देखभाल कैसे करनी चाहिए।
किसानों को मिलेगा सहारा
मानसूनी बारिश उन किसानों के लिए अमृत के समान है, जिनके पास जल संसाधन नहीं हैं। पहाड़ी और मैदानी इलाकों में, जहां पानी की कमी है, यह बारिश जीवनदायिनी है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि समय से पहले मानसून की दस्तक से फसलें बेहतर होंगी और भूजल रीचार्ज होगा। हालांकि, चिंता है कि जल्दी आने वाला मानसून जल्दी वापस लौट सकता है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. एस.एस. राठौर बताते हैं कि मानसून का समय पर आना कृषि के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन जल्दी आने पर जल संरक्षण, खेत की देखभाल, और फसल प्रबंधन की सटीक प्लानिंग जरूरी है।
मानसून और खरीफ की खेती
खरीफ सीजन फसलों की बुवाई मानसून पर निर्भर है। यह बारिश चावल, दाल, तिलहन, कपास, और सब्जियों की जल्दी बुवाई में मदद करती है। मानसून में देरी से कृषि प्रभावित होती है। दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून-सितंबर) देश में होने वाली 75% बारिश का योगदान देता है।
मानसूनी सीजन में सावधानी जरूरी
- फोटो : गांव जंक्शन
बुवाई के लिए लाभदायक
डॉ. राठौर बताते हैं, मानसूनी सीजन में सावधानी जरूरी है। केरल में मानसून 24 मई को पहुंच गया, जिसके बाद दिल्ली, यूपी, बिहार जैसे राज्यों में इसे पहुंचने में एक महीना लगेगा। एक जून से पहले इन इलाकों में होने वाली बारिश मानसून-पूर्व की बारिश ही कही जाएगी। हालांकि, जागरूक किसान इस बारिश का उपयोग सब्जी, दाल, और मूंगफली की बुवाई के लिए कर सकते हैं।
पानी का भंडारण जरूरी
मानसून का सामान्य रहना फसलों के लिए जरूरी है, ताकि फसलों को समय पर पानी मिलता रहे। वहीं, कम बारिश फसलों के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है। किसानों को जल संरक्षण के साधन, जैसे - तालाब या जलाशय, बनाए रखने होंगे। खेतों में पपड़ी नहीं जमने देना और मौसम के अनुसार कृषि कार्य शुरू करना भी महत्वपूर्ण है।
मानसून का चक्र और चुनौतियां
उत्तराखंड के हल्द्वानी के प्रगतिशील किसान नरेंद्र सिंह मेहरा कहते हैं कि मानसून का जल्दी आना या जाना कृषि प्रणाली को बिगाड़ता है। 15 जून के बाद की जाने वाली खेत की तैयारी प्रभावित होती है। हालांकि, पहाड़ी खेती के लिए यह फायदेमंद है। वह मानते हैं कि मानसून का नियमित समय पर आना ही बेहतर है। समय से पहले मानसून किसानों के लिए सुनहरा अवसर है, लेकिन इसका लाभ उठाने के लिए समय रहते तैयारी करना जरूरी है। सही रणनीति से किसान इस मानसून को अपनी समृद्धि का आधार बना सकते हैं।
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