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Khadi Handloom Handicrafts Boost Government May Launch Scheme Worth 8000 Crore
Government Scheme: खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को मिलेगा बढ़ावा, ₹8000 करोड़ की योजना ला सकती है सरकार
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Wed, 04 Nov 2026 12:05 PM IST
सार
खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प उद्योग को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार 8,000 करोड़ रुपये की महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल पर विचार कर रही है। इससे कारीगरों और बुनकरों को रोजगार, बेहतर तकनीक और विदेशी बाजारों तक पहुंच मिलने की उम्मीद है।
केंद्र सरकार देश में खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प उद्योग को बढ़ावा देने के लिए 8,000 करोड़ रुपये की नई योजना लाने की तैयारी कर रही है। इस योजना का नाम 'महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल' हो सकता है। इसके तहत अगले पांच वर्षों में इन क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ाने, कारीगरों और बुनकरों को मजबूत बनाने, बेहतर तकनीक उपलब्ध कराने और भारतीय उत्पादों को विदेशी बाजारों तक पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा।
मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार इस योजना को पांच साल की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के रूप में तैयार कर सकती है। इसका उद्देश्य कपड़ा क्षेत्र में पहले से चल रही पीएलआई योजना के दायरे को बढ़ाना और पारंपरिक उद्योगों को नई ताकत देना है।
विदेशी बाजारों में भारतीय उत्पादों को मिलेगा मौका
भारत ने ब्रिटेन और यूरोपीय संघ (EU) समेत कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं। इन समझौतों से भारतीय कपड़ों, हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों को विदेशी बाजारों में बिना आयात शुल्क के पहुंचने का अवसर मिल सकता है। ब्रिटेन के साथ समझौता जुलाई में लागू हो चुका है, जबकि यूरोपीय संघ के साथ समझौता अगले साल की शुरुआत में लागू होने की संभावना है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल व्यापार समझौतों से निर्यात नहीं बढ़ेगा। इसके लिए भारतीय कारीगरों, छोटे उद्योगों और कारोबारियों को उत्पादन की क्षमता बढ़ाने, उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने और विदेशी खरीदारों से सीधे जुड़ने की जरूरत है।
2030 तक 100 अरब डॉलर निर्यात का लक्ष्य
भारत ने वर्ष 2030 तक कपड़ा और परिधान निर्यात को बढ़ाकर 100 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा है। पिछले साल तत्कालीन कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा था कि भारत के 15 मुक्त व्यापार समझौतों के तहत करीब 199 अरब डॉलर का कपड़ा बाजार उपलब्ध है। इसके मुकाबले भारत का निर्यात इन बाजारों में केवल 11.5 अरब डॉलर है। इससे निर्यात बढ़ाने की बड़ी संभावना का पता चलता है।
हालांकि, हथकरघा और हस्तशिल्प के निर्यात में अभी खास तेजी नहीं आई है। वर्ष 2024-25 में इनका निर्यात 1.2 प्रतिशत और 2025-26 में केवल 0.6 प्रतिशत बढ़ा। वहीं, घरेलू बाजार में खादी उत्पादों की बिक्री 2025-26 में 10 प्रतिशत बढ़कर 7,869 करोड़ रुपये पहुंच गई।
कारीगरों और बुनकरों की आय बढ़ाने पर जोर
खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी ए.के. झा के मुताबिक, खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने, ग्रामीण आय सुधारने और भारतीय उत्पादों की वैश्विक पहचान बनाने की काफी संभावनाएं हैं। नई पहल से उत्पादन क्षमता बढ़ाने, बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने, नई तकनीक अपनाने और बाजार तक पहुंच मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
वाराणसी की हथकरघा सहकारी समिति अंगिका हथकरघा विकास उद्योग समिति के अध्यक्ष अमरेश कुशवाहा का कहना है कि खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों को आम लोगों के बीच लोकप्रिय बनाने की जरूरत है, ताकि इनका इस्तेमाल रोजमर्रा की जिंदगी में बढ़े। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र रोजगार देने वाला है, इसलिए सरकार को कारीगरों के हितों और उनकी आजीविका की सुरक्षा पर भी ध्यान देना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, उत्पादों की डिजाइन, गुणवत्ता, ब्रांडिंग, शोध और बाजार से जुड़ाव पर निवेश बढ़ाने से पारंपरिक उद्योगों को नई पहचान मिल सकती है। इसमें स्टार्टअप भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।
खादी और ग्रामोद्योग से 2.04 करोड़ लोगों को रोजगार
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र से करीब 2.04 करोड़ लोगों को रोजगार मिला। सरकार की नई पहल से इस क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा करने और ग्रामीण कारीगरों व बुनकरों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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