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चक्रवात 'मुरासु' ने मचाई भारी तबाही : आंध्र प्रदेश में 52 हजार हेक्टेयर फसल बर्बाद, 2 लोगों की मौत

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 04 Nov 2026 01:32 PM IST
सार

आंध्र प्रदेश में चक्रवात मुरासु ने भारी तबाही मचाई है। 52,459 हेक्टेयर में फसलें प्रभावित हुईं और दो लोगों की मौत हो गई। जानें किसानों को कितना नुकसान हुआ और किन जिलों में तूफान का सबसे ज्यादा असर पड़ा।

चक्रवात
चक्रवात - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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आंध्र प्रदेश में भीषण चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ ने भारी तबाही मचाई है। तूफान और तेज बारिश के कारण 52 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में खड़ी फसलें प्रभावित हुई हैं, वहीं कम से कम दो लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा 312 से ज्यादा घरों और बिजली के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। हजारों पेड़ उखड़ गए और बिजली के 2,750 खंभे क्षतिग्रस्त हो गए। अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती अनुमान में राज्य को करीब 344 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

एक सप्ताह के भीतर आंध्र प्रदेश के तट से टकराने वाला यह दूसरा चक्रवात है। मंगलवार तड़के तूफान के तट से टकराने के बाद राज्य के 15 जिलों में भारी बारिश हुई। इससे खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूब गईं। कृष्णा, बापटला और नंद्याल जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। वहीं, प्रकाशम और बापटला में बिजली व्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा है।

52 हजार हेक्टेयर से अधिक फसल प्रभावित
आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के प्रबंध निदेशक प्रखर जैन ने पीटीआई-भाषा को बताया कि शुरुआती आकलन के अनुसार, चक्रवात से 52,459 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलें प्रभावित हुई हैं। राज्य को करीब 344 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।

तूफान के कारण 312 घर भी प्रभावित हुए हैं। कई इलाकों में पानी भरने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। सरकार 814 छोटे सिंचाई जलाशयों पर नजर रख रही है। इनमें से 776 जलाशयों को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

2,750 बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त, हजारों पेड़ उखड़े
तेज हवाओं और भारी बारिश के कारण बिजली व्यवस्था को बड़ा नुकसान हुआ है। राज्य में बिजली के 2,750 खंभे क्षतिग्रस्त हो गए। बिजली की मुख्य लाइनें, उपकेंद्र और बिजली वितरण से जुड़े उपकरण भी प्रभावित हुए हैं। कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई।

प्रकाशम जिले में मछली पकड़ने वाली कुछ नावें भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों पर कई वाहन फंस गए। भारी बारिश और तेज हवाओं के कारण सड़कों पर दृश्यता कम हो गई, जिससे वाहन चालकों को परेशानी हुई।

35 से ज्यादा ट्रेनें रद्द, उड़ानों पर भी असर
चक्रवात के कारण रेल और हवाई यातायात भी प्रभावित हुआ है। खराब मौसम को देखते हुए 35 से अधिक ट्रेनें रद्द कर दी गईं, जबकि 14 ट्रेनों के मार्ग बदलने पड़े। आठ ट्रेनों के समय में बदलाव किया गया। कई उड़ानें भी रद्द कर दी गईं।

12 हजार से ज्यादा लोग राहत शिविरों में
आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक, चक्रवात से जुड़ी घटनाओं में दो लोगों की मौत हुई है। वहीं, 12,230 लोग अभी राहत शिविरों में रह रहे हैं। राज्य सरकार ने 171 राहत शिविर बनाए हैं और जरूरतमंदों को 14,810 भोजन के पैकेट बांटे हैं।

राहत और बचाव कार्यों के लिए दमकल विभाग की 185 टीमें लगाई गई हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की 11 और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की 13 टीमें भी तैनात हैं। तूफान का असर राज्य के 15 जिलों के 132 मंडलों में पड़ा है।

स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी एहतियाती कदम उठाए गए हैं। सरकार ने 3,066 गर्भवती महिलाओं और 1,008 स्तनपान कराने वाली माताओं को सुरक्षित अस्पतालों में पहुंचाया है। 13 जिलों में 725 मेडिकल टीमें भेजी गई हैं और 362 एंबुलेंस को तैयार रखा गया है।

बापटला में 22 सेंटीमीटर बारिश
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार सुबह 8:30 बजे से मंगलवार सुबह 8:30 बजे तक बापटला में 22 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा नरसापुर में 20 सेंटीमीटर, करमचेडु में 16 सेंटीमीटर, अड्डंकी में 15 सेंटीमीटर और भीमवरम में 13 सेंटीमीटर बारिश हुई।

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने चक्रवात से निपटने में केंद्र सरकार की मदद के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि राज्य प्रशासन केंद्रीय टीमों के साथ मिलकर राहत और बचाव कार्य कर रहा है। उन्होंने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और वहां के लोगों का भी मदद के लिए आभार जताया।

बुधवार को भी भारी बारिश का अनुमान
मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवात ‘मुरासु’ के 3 नवंबर की आधी रात तक कमजोर होकर गहरे दबाव के क्षेत्र में बदलने की संभावना है। हालांकि, इसके बाद भी खतरा पूरी तरह टला नहीं है। बुधवार को तटीय आंध्र प्रदेश के कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है।
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