विज्ञापन
Home› Pashudhan› African Boer Goat From South Africa Treasure For Cattle Breeders Demand Increasing Rapidly In India

African Boer Goat: पशुपालकों के लिए खजाना है अफ्रीका से आई बकरी की यह नस्ल, भारत में तेजी से बढ़ रही मांग

गांव जंक्शन, नोएडा Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 26 Jul 2025 05:31 PM IST
सार

सीआईआरजी (CIRG), मथुरा के विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में बोअर बकरी पालन का भविष्य उज्ज्वल है। सही प्रशिक्षण, बीमारियों की रोकथाम और बाजार तक पहुंच की सुविधा से यह ग्रामीण रोजगार का बड़ा साधन बन सकता है।
 

अफ्रीकन बोअर बकरी
अफ्रीकन बोअर बकरी - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

ग्रामीण भारत में बकरी पालन का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। पशुपालक इसके लिए उन नस्लों का चयन कर रहे हैं, जिसमें दूध से लेकर मांस उत्पादन अच्छा हो। ऐसी ही एक नस्ल अब बकरी पालकों की पसंद बनती जा रही है। यह खास नस्ल वाली बकरी अफ्रीकन बोअर कहलाती है, जो खासकर मांस उत्पादन के लिए पशुपालकों के बीच बेहद लोकप्रिय हो रहा है। 

दक्षिण अफ्रीका से लाई गई नस्ल 
यह नस्ल दक्षिण अफ्रीका से लाई गई है और अब भारत के अनेक राज्यों में इसका पालन जोर पकड़ रहा है। बोअर बकरी की सबसे बड़ी खासियत इसका तेज वजन बढ़ना है। एक वयस्क मादा बकरी का वजन 60 से 90 किलो तक होता है, जबकि नर बकरा 100 किलो से भी ऊपर पहुंच सकता है। इसके मांस की गुणवत्ता और स्वाद के चलते बाजार में भारी डिमांड है।

उत्तर प्रदेश में भी पकड़ बना रही है नस्ल
महाराष्ट्र के सांगली, कोल्हापुर से लेकर मध्य प्रदेश, राजस्थान और अब उत्तर प्रदेश में भी बोअर बकरी पालन को अपनाया जा रहा है। यह नस्ल गर्म और शुष्क जलवायु में भी अच्छे से अनुकूलित हो जाती है, जिससे यह उत्तर भारत के किसानों के लिए मुफीद विकल्प बन रही है।

ये भी पढ़ें : बकरियों की ये 10 नस्लें कर सकती हैं मालामाल, जलवायु परिवर्तन से लड़ने में दमदार, जानें खासियत

कम खर्च में व्यवस्था

पशुपालन विशेषज्ञों के मुताबिक, 10 बकरियों के लिए करीब 150-200 वर्ग फीट का शेड काफी होता है। मिट्टी या बांस की फर्श, उचित वेंटिलेशन और समय-समय पर सफाई के ज़रिए बीमारी से बचाव किया जा सकता है।

मुनाफे की कुंजी
बोअर बकरी को प्रतिदिन 2-3 किलो हरा चारा (बरसीम, मक्का), 500-700 ग्राम सूखा चारा और 200-300 ग्राम दाना देना पर्याप्त होता है। नीम पत्तियां और खनिज मिश्रण उनके स्वास्थ्य और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं।

बीमारियों से सुरक्षा और देखभाल
बकरी पालकों को पीपीआर, बकरी चेचक और कीट-नाशक टीकाकरण समय पर कराने की सलाह दी जाती है। साथ ही, नवजात मेमनों को कोलोस्ट्रम पिलाना अनिवार्य है।

ये भी पढ़ें : पाकिस्तान में गधे तो इस देश में होता है मगरमच्छ पालन, 1000 फार्म में 12 लाख Crocodile

दुगुनी कमाई का रास्ता

बोअर बकरी साल में दो बार बच्चे देती है। एक नर बकरे के साथ 20 मादा बकरियों का प्रबंधन किया जा सकता है। छह महीने में मेमना 25-30 किलो का हो जाता है, जो सीधे बिक्री योग्य होता है।

सालाना 2-3 लाख की कमाई
एक छोटे स्तर पर शुरू करने के लिए करीब 1 से 1.5 लाख रुपये का निवेश पर्याप्त है। सरकार कई राज्यों में 50-90% तक की सब्सिडी भी देती है। अगर कोई किसान 100 बकरियों का फार्म स्थापित करता है, तो सालाना 30-40 लाख रुपये तक की आय संभव है।

सरकार और बैंक भी दे रहे हैं समर्थन
बिहार, हरियाणा समेत कई राज्य सरकारें सब्सिडी के अलावा NABARD और अन्य बैंकों के ज़रिए कर्ज भी उपलब्ध करा रही हैं, ताकि इच्छुक किसान इस व्यवसाय को अपना सकें।
 
विज्ञापन
विज्ञापन