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चित्तौड़गढ़ में महका 'पीला सोना' : गेंदे की खेती से खिले किसानों के चेहरे, रिकॉर्ड 75 हजार गेंदा के पौधे बिके

गांव जंक्शन डेस्क, चित्तौड़गढ़ Published by: Umashankar Mishra Updated Wed, 28 Oct 2026 08:40 PM IST
सार

चित्तौड़गढ़ में गेंदे के पौधों की बिक्री रिकॉर्ड 75 हजार पहुंची। कम लागत-पानी और माला बनाकर पांच गुना तक कमाई ने इसे किसानों की पसंदीदा फसल बना दिया है।

गेंदा की खेती
गेंदा की खेती - फोटो : Ai
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विस्तार
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राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में गेंदे की खेती किसानों की पहली पसंद बन रही है। चालू वर्ष में अब तक रिकॉर्ड 75 हजार पौधे बिक चुके हैं। कम लागत, कम देखभाल और कम पानी में तुरंत नकद कमाई के कारण यह फूल जिले में "पीला सोना" बनकर महक रहा है।

साड़ास, विजयपुर, भदेसर, निंबाहेड़ा और चित्तौड़गढ़ के किसान पारंपरिक फसलों के साथ गेंदे का बंपर उत्पादन कर रहे हैं। जिस फूल के लिए पहले दूसरे जिलों और बाहरी मंडियों पर निर्भर रहना पड़ता था, वही अब खेतों की नई पहचान बन गया है।

पौधों की बिक्री में रिकॉर्ड उछाल
वर्ष 2023-24 में केवल 9 हजार पौधे बिके थे, जबकि 2024-25 में यह आंकड़ा घटकर 1,500 रह गया। इसके बाद मांग में भारी उछाल आया और 2025-26 में बिक्री 71 हजार पौधों तक पहुंच गई। चालू वर्ष में अब तक 75 हजार पौधे बिक चुके हैं। किसानों के अनुसार कम पानी और कम देखभाल में बेहतर कमाई से गेंदा तेजी से खेतों में जगह बना रहा है।

माला बनाकर पांच गुना कमाई
खुले गेंदे के फूल बाजार में सामान्यतः 20 से 25 रुपये प्रति किलो बिकते हैं। थोड़ी अतिरिक्त मेहनत कर मालाएं बनाने पर एक किलो फूल से करीब 100 रुपये तक की बिक्री हो जाती है, यानी कमाई पांच गुना तक बढ़ जाती है। कम लागत और नकद आय के कारण किसान पारंपरिक खेती छोड़ने के बजाय उसके साथ गेंदा लगा रहे हैं।

दो उन्नत किस्मों की बंपर पैदावार
एक बीघा खेत में लगभग छह हजार पौधे लगाए जाते हैं। इस समय मुख्यतः टेनिस बॉल और पुष्पराज केसरिया किस्मों की शानदार पैदावार हो रही है। इनकी पंखुड़ियां घनी और रंग आकर्षक होता है, इसलिए बाजार में पहुंचते ही मांग बढ़ जाती है और किसानों को हाथों-हाथ अच्छी कीमत मिलती है।
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