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Home› Pashudhan› Mp To Give Rs 900 Monthly Aid For Rearing Desi Cows Scheme Launch On November 15

मध्य प्रदेश में 15 नवंबर से नई योजना: गौ पालकों को सरकार की सौगात, देसी गाय पालें किसान, हर माह पाएं 900 रुपये

गांव जंक्शन डेस्क, भोपाल Published by: Umashankar Mishra Updated Wed, 28 Oct 2026 08:47 PM IST
सार

मध्य प्रदेश सरकार 15 नवंबर से देसी गाय पालकों को प्रति माह 900 रुपये तक अनुदान देगी। पहले चरण में 100 गांवों के 500 पशुपालक जुड़ेंगे और सालाना 40 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

100 गांवों को चिह्नित किया गया है, जहां देसी नस्ल की गायें अधिक हैं।
100 गांवों को चिह्नित किया गया है, जहां देसी नस्ल की गायें अधिक हैं। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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मध्य प्रदेश सरकार देसी नस्ल की गायों के संरक्षण और गौ पालकों की आय बढ़ाने के लिए नई योजना शुरू करने जा रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव 15 नवंबर को बिरसा मुंडा जयंती पर इसका औपचारिक शुभारंभ करेंगे। योजना के तहत देसी गाय पालने वाले पशुपालकों को प्रति माह 900 रुपये तक का अनुदान मिलेगा। सरकार इस पर सालाना 40 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

पहले चरण में 100 गांव, 500 पशुपालक
पहले चरण में उन 100 गांवों को चिह्नित किया गया है, जहां देसी नस्ल की गायें अधिक हैं। प्रत्येक गांव से पांच-पांच पशुपालक चुने जाएंगे, यानी शुरुआत में 500 गौ पालकों को सीधा वित्तीय अनुदान मिलेगा। आगे पात्र लाभार्थियों की संख्या बढ़ाई जाएगी। योजना का शुभारंभ 15 नवंबर को राज्यस्तरीय कार्यक्रम में हो सकता है।

महाकौशली और मालवी नस्ल
प्रदेश में आमतौर पर गाय की पांच देसी नस्लें पाली जाती हैं। जबलपुर के नानाजी देशमुख पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय ने पांचवीं देसी नस्ल "महाकौशली" की खोज की है। राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, करनाल ने इसे देश की 57वीं पंजीकृत देसी गौवंश नस्ल के रूप में मान्यता दी है।

यह जबलपुर, मंडला, डिंडोरी और अमरकंटक क्षेत्र में पाई जाती है। मालवा अंचल की "मालवी" नस्ल इंदौर, उज्जैन और शाजापुर में मिलती है और बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता तथा दुग्ध उत्पादन के लिए जानी जाती है।

निमाड़ी, केनकथा और गाओलाओ
निमाड़ी नस्ल बड़वानी, खंडवा और खरगोन में मिलती है। इसका विकास गिर और खिलारी नस्लों की क्रॉसब्रीडिंग से हुआ है, इसलिए इसके लक्षण दोनों से मेल खाते हैं। बुंदेलखंड के सागर, छतरपुर, पन्ना और टीकमगढ़ में केनकथा नस्ल पाई जाती है, जिसका कद छोटा लेकिन बनावट मजबूत होती है।

छिंदवाड़ा और पांढुर्णा से महाराष्ट्र के सीमावर्ती जिलों तक गाओलाओ (स्थानीय नाम "अरवी") मिलती है, जो फुर्तीली है और अत्यधिक गर्मी में भी खुद को ढाल लेती है।
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