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Home› Pashudhan› Munger Farmers Succeed In Shrimp Farming Earn Rs 800 Per Kg In Darjeeling Market

किसानों ने रचा इतिहास: मुंगेर के तालाब में नीली क्रांति, पहली बार सफल झींगा पालन, दार्जिलिंग में ₹800/Kg भाव

गांव जंक्शन डेस्क, मुंगेर Published by: Umashankar Mishra Updated Wed, 28 Oct 2026 08:54 PM IST
सार

मुंगेर के धरहरा में किसानों ने पहली बार सफल व्यावसायिक झींगा पालन किया। 120 दिन में तैयार झींगा दार्जिलिंग में 800 रुपये किलो तक बिकी।
 

झींगा
झींगा - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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बिहार के मुंगेर जिले के धरहरा प्रखंड के किसानों ने मत्स्य विभाग के सहयोग से वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर जिले में पहली बार झींगा मछली का सफल व्यावसायिक उत्पादन किया है। स्थानीय तालाबों की यह ताजी झींगा अब भागलपुर के साथ पश्चिम बंगाल के पर्यटन स्थल दार्जिलिंग के थोक बाजारों तक पहुंच चुकी है। इस "नीली क्रांति" से किसानों को अच्छा मुनाफा हो रहा है।

व्यावसायिक उत्पादन की शुरुआत
भलार गांव के अशोक कुमार और महरना गांव की उषा देवी ने मार्च 2026 में 0.5 एकड़ के तालाब से झींगा पालन शुरू किया। पहले क्षेत्र के लोग नदियों और पश्चिम बंगाल की आपूर्ति पर निर्भर थे। मत्स्य विभाग ने किसानों को 8,000 झींगा बीज (लार्वा), उच्च गुणवत्ता का दाना और जरूरी दवाएं शत-प्रतिशत तकनीकी मार्गदर्शन के साथ उपलब्ध कराईं।

120 दिन में तैयार पैदावार
विभागीय अधिकारियों की निरंतर देखरेख में मात्र चार महीने यानी 120 दिनों में झींगा 45 से 50 ग्राम वजन की हो गई। दोनों किसान अब तक दो बार में कुल 300 किलो झींगा बेच चुके हैं। अधिकारियों ने सफलता सुनिश्चित करने के लिए दो बार तालाब का स्थल निरीक्षण भी किया।

दार्जिलिंग में 800 रुपये किलो का भाव
भागलपुर के थोक बाजार में किसानों को 600 रुपये प्रति किलो का भाव मिला, जबकि दार्जिलिंग में मुंगेर की झींगा 800 रुपये प्रति किलो बिकी। अधिक मुनाफे के कारण किसान अब ज्यादातर माल दार्जिलिंग भेज रहे हैं।

अन्य किसानों के लिए प्रेरणा
विभाग ने पहले किसानों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया, फिर अनुदान पर लार्वा, दाना, बीज और दवाएं उपलब्ध कराईं। लगातार तकनीकी निगरानी से यह प्रयोग सफल रहा और अब जिले के अन्य किसान भी पारंपरिक मत्स्य पालन छोड़कर इस ओर प्रेरित हो रहे हैं।
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