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मानसून में किचन गार्डन की देखभाल : इन आसान टिप्स से आपका बगीचा रहेगा हराभरा, बारिश में भी स्वस्थ दिखेंगे पौधे

गांव जंक्शन, नोएडा Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 21 Jun 2025 03:19 PM IST
सार

मानसून ने दस्तक दे दी है और बारिश का सिलसिला शुरू हो गया है। इस मौसम को बागवानी प्रेमियों के लिए विशेष रूप से अनुकूल माना जाता है, क्योंकि प्राकृतिक वर्षा पौधों की वृद्धि को गति देती है। ऐसे में पौधों का ख्याल रखा जाना भी बेहद जरूरी होता है। चलिए, जानते हैं किचन गार्डन के लिए जरूरी ये टिप्स।

मानसून में किचन गार्डन की देखभाल
मानसून में किचन गार्डन की देखभाल - फोटो : AI Image
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विस्तार
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बरसात का मौसम एक ओर जहां धरती को जीवन देने वाला माना जाता है, वहीं यह घरों में बनाए गए किचन गार्डन यानी रसोई बगीचों के लिए भी बहुत खास समय होता है। वर्षा की प्राकृतिक जलधारा पौधों की वृद्धि के लिए फायदेमंद तो होती है, लेकिन इसी के साथ कई नई चुनौतियाँ भी सामने आती हैं। यदि आप मानसून में अपने बगीचे को पौष्टिक, हरा-भरा और रोगमुक्त बनाए रखना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए बिंदुओं पर ध्यान देना बहुत जरूरी है।

जलभराव से बचाव 
मानसून में अत्यधिक बारिश से गमलों, क्यारियों या गार्डन बेड्स में जलभराव की समस्या आम हो जाती है। यह स्थिति पौधों की जड़ों को सड़ने और फफूंदी लगने की वजह बन सकती है।
  • सुनिश्चित करें कि गमलों के नीचे ड्रेनेज होल्स हों।
  • जमीन पर बने गार्डन बेड्स में ढलान रखें ताकि पानी बह जाए।
  • पानी के रुकने वाले स्थानों में नालियां या ग्रेवल बिछाकर पानी निकालने की व्यवस्था करें।
  • बारिश के बाद पौधों की जड़ों के पास की मिट्टी को ढीला करें ताकि हवा लगती रहे।

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सही पौधे, अधिक उत्पादन
सही पौधे, अधिक उत्पादन - फोटो : AI Image
सही पौधे, अधिक उत्पादन
हर मौसम में पौधों की पसंद-नापसंद अलग होती है। बरसात के मौसम में कुछ विशेष फूल और सब्जियाँ बहुत अच्छी बढ़ती हैं।
  • फूलों के लिए: गेंदा, गुड़हल, चमेली, कनेर
  • सब्जियों के लिए: लौकी, तुरई, भिंडी, खीरा, पालक, धनिया
  • जड़ी-बूटी के लिए: तुलसी, पुदीना, अजवाइन\
  • बेलदार पौधे: लौकी, कद्दू, टमाटर – इन्हें सहारा देना न भूलें

कीट एवं रोग नियंत्रण 
मानसून में बढ़ी नमी के कारण फंगल इन्फेक्शन, एफिड, माइट्स और स्लग्स जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं।
  • सप्ताह में एक बार नीम का तेल या लहसुन-अदरक का जैविक स्प्रे करें
  • पत्तियों के नीचे स्लग्स या कीड़ों की जांच करें
  • जरूरत पड़ने पर हल्के रसायनिक कीटनाशक कृषि विशेषज्ञ की सलाह पर ही इस्तेमाल करें
फफूंदी से बचाव
  • गीले पत्तों को तुरंत हटाएं
  • पौधों को अधिक पास-पास न लगाएं ताकि हवा चलती रहे
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पौधों को सहारा और सुरक्षा 
पौधों को सहारा और सुरक्षा  - फोटो : AI Image
मिट्टी को बनाएं उपजाऊ
भारी बारिश के कारण मिट्टी के पोषक तत्व बह जाते हैं। पौधों की सेहत बनाए रखने के लिए पौष्टिक खाद देना जरूरी है। वर्मीकम्पोस्ट, गोबर खाद, नीम खली, केले के छिलके, चायपत्ती और राख जैसे प्राकृतिक खादों का प्रयोग करें। हर 15-20 दिन में एक बार जैविक खाद डालें। माइक्रो न्यूट्रिएंट्स के लिए एप्सम सॉल्ट (मैग्नीशियम सल्फेट) का 1% घोल छिड़कें।

पौधों को सहारा और सुरक्षा 
मानसून में तेज हवाएं और भारी बारिश पौधों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। बेल और झाड़ीदार पौधों के लिए विशेष देखभाल जरूरी है।
  • बांस, लकड़ी या प्लास्टिक स्टिक का सहारा दें
  • भारी बारिश से पहले झाड़ियों की हल्की छंटाई करें
  • गमलों को ऐसी जगह रखें जहां बहुत तेज पानी या हवा न आए
  • खुले गार्डन में छतरी या प्लास्टिक शेड की व्यवस्था की जा सकती है

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मिट्टी का संतुलन बनाए रखें
अधिक गीली मिट्टी पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचाती है। मिट्टी में कोकोपीट, रेत और खाद मिलाकर उसका जलनिकासी गुण बढ़ाया जा सकता है। पॉटिंग मिक्स को हर सीजन में नया करें ताकि मिट्टी हल्की, पोषक और सांस लेने योग्य बनी रहे। बच्चों को बीज बोने, पौधों की देखभाल और पौष्टिक सब्जियाँ उगाने में शामिल करें। इससे उन्हें प्रकृति के साथ जुड़ने और हेल्दी लाइफस्टाइल की आदत पड़ती है।
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