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कम पानी, ज्यादा पोषण, आ गया बिलासपुरिया गेहूं : आयरन-जिंक से भरपूर सीजी 1047, किसान की थाली व जेब दोनों भरेगा

अवधेश कुमार मलिक, ग्रामीण पत्रकार (रायपुर) Published by: Umashankar Mishra Updated Tue, 20 Oct 2026 05:49 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ के कृषि वैज्ञानिकों ने 10 साल के शोध से गेहूं की सीजी 1047 किस्म विकसित की है, जो 2-3 सिंचाई में 36 क्विंटल से अधिक उपज देती है। यह किस्म किसानों की आय और पोषण दोनों के लिए फायदेमंद हो सकती है।

गेहूं की किस्म की खूबियों के कारण बिलासपुर के किसान इसे ‘बिलासपुरिया गेहूं’ के नाम से पुकारने लगे है
गेहूं की किस्म की खूबियों के कारण बिलासपुर के किसान इसे ‘बिलासपुरिया गेहूं’ के नाम से पुकारने लगे है - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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किसान भाइयो! खेती-किसानी में आजकल सबसे बड़ी चिंता मौसम की बेरुखी और सिंचाई के लिए पानी की कमी होती है। अक्सर पानी की कमी से फसलें सूख जाती हैं या फिर तेज आंधी में खड़ी फसल गिरकर बर्बाद हो जाती है। लेकिन, अब आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है।

हमारे कृषि वैज्ञानिकों ने आपकी इन परेशानियों का एक शानदार हल खोज निकाला है। छत्तीसगढ़ के कृषि वैज्ञानिकों ने पूरे 10 साल की कड़ी मेहनत के बाद गेहूं की एक नई किस्म तैयार की है। गेहूं की इस किस्म का वैज्ञानिक नाम ‘सीजी 1047’ या ‘छत्तीसगढ़ ट्रॉम्बे कुमुद’ है।

इस गेहूं की किस्म की खूबियों के कारण बिलासपुर के किसान इसे ‘बिलासपुरिया गेहूं’ के नाम से पुकारने लगे हैं। यह नया गेहूं खेती और किसानों की आमदनी के लिए गेम चेंजर साबित होने वाला बताया जा रहा है।

सिर्फ 2-3 सिंचाई में 36.7 क्विंटल पैदावार
पानी की कमी से जूझ रहे इलाकों के लिए गेहूं की यह किस्म किसी संजीवनी से कम नहीं है। बिलासपुरिया गेहूं को पकने के लिए ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती। आप इसे सिर्फ 2 से 3 बार पानी देकर भी 36.7 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक बंपर पैदावार ले सकते हैं।

सबसे अच्छी बात यह है कि यह किस्म महज 107 से 110 दिनों में ही पककर पूरी तरह तैयार हो जाती है। कम समय और कम पानी में आपकी फसल घर आ जाएगी और खेत अगली फसल के लिए जल्दी खाली भी हो जाएगा।

आंधी-तूफान में भी खड़ी रहेगी फसल
गेहूं के किसानों का एक बड़ा दर्द यह होता है कि जब फसल पकने को होती है और तेज़ हवा या आंधी आ जाए, तो पौधे गिर जाते हैं। इससे दाने खराब हो जाते हैं और उपज घट जाती है। लेकिन वैज्ञानिकों ने इस नई किस्म के पौधे की ऊंचाई 85 से 90 सेंटीमीटर के बीच रखी है। इस संतुलित ऊंचाई और मजबूत तने के कारण यह गेहूं तेज़ हवाओं में भी आसानी से गिरता नहीं है और खेत में डटकर खड़ा रहता है।

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आयरन, जिंक और प्रोटीन से भरपूर दाने

आजकल बाजार में ऐसे अनाज के अच्छे दाम मिलते हैं, जो पेट भरने के साथ ही सेहत के लिए फायदेमंद भी हो। ‘सीजी 1047’ बायोफोर्टिफाइड किस्म है यानी इसमें कुदरती तौर पर पोषक तत्व ज्यादा पाए जाते हैं। इस किस्म के दानों में आयरन और जिंक दोनों 41-42 पीपीएम की मात्रा में मौजूद हैं।

इसके साथ ही इसमें 12 फीसदी से ज्यादा प्रोटीन भी पाया जाता है। यही खूबी इस गेहूं को उन इलाकों के लिए बहुत खास बना देती है, जहां की महिलाओं और बच्चों में खून की कमी (एनीमिया) या कुपोषण की शिकायत रहती है।

रोटी बनेगी मुलायम, बिस्किट भी लाजवाब 
किसान भाइयो, आप जो गेहूं उपजाते हैं, उसकी कीमत इस बात पर भी तय होती है कि उससे बनने वाली रोटियां कैसी हैं। बिलासपुरिया गेहूं के दाने बहुत आकर्षक, सुनहरे रंग के होते हैं और इसके एक हजार दानों का वजन लगभग 41.5 ग्राम होता है।

जांच में यह पाया गया है कि इसकी चपाती बहुत बेहतरीन बनती है, जिसे 10 में से 8.0 अंक मिले हैं। इतना ही नहीं, यह गेहूं बेकरी और बिस्किट उद्योग के लिए भी बहुत शानदार (स्कोर 8.7) है। इसका सीधा मतलब यह है कि बाजार में व्यापारियों और बेकरी वालों के बीच आपके इस गेहूं की अच्छी मांग रहेगी।

वैज्ञानिकों की 10 साल की तपस्या का फल
वैसे तो छत्तीसगढ़ की आबोहवा में यह गेहूं बेहतरीन नतीजे दे ही रहा है, लेकिन इसे खास तौर पर उन राज्यों के लिए विकसित किया गया है, जहां मौसम का मिजाज अनिश्चित रहता है। अगर आप महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक या तमिलनाडु जैसे प्रायद्वीपीय और तटीय इलाकों के किसान हैं, तो यह किस्म आपके खेतों के लिए एकदम अनुकूल है।

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यह किस्म रातों-रात नहीं बनी है। इसे इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के अंतर्गत बिलासपुर के वैज्ञानिकों ने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, मुंबई के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर तैयार किया है। डॉ. अजय प्रकाश अग्रवाल की अगुवाई में टीम ने 10 साल तक पसीना बहाया है।

हाल ही में (अगस्त 2026 में) इस किस्म को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट द्वारा आधिकारिक मान्यता का प्रमाण पत्र भी सौंपा गया है।

जो किसान पानी की कमी से जूझ रहे हैं और कम लागत में अधिक मुनाफे वाली सेहतमंद फसल अपने खेतों में उगाना चाहते हैं, तो अगली बुआई में बिलासपुरिया गेहूं (सीजी 1047) को अपने खेत का हिस्सा जरूर बनाएं। यह न सिर्फ आपके परिवार को पोषण देगा, बल्कि आपकी जेब को भी खुशियों से भर देगा।

(यह स्टोरी मूल रूप से गांव जंक्शन पत्रिका के अक्तूबर 2026 अंक में प्रकाशित की गई है।)
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