महाराष्ट्र में सूखे की मार ने ट्रैक्टर उद्योग के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। फसलों को पहुंचे भारी नुकसान ने किसानों के उत्साह और खरीदारी की क्षमता को कम किया है। इस सब के चलते किसानों ने ट्रैक्टर जैसे बड़े यंत्रों की खरीदारी को फिलहाल टाल दिया है, जिसका असर बिक्री के आंकड़ों पर दिखा है।
अगस्त महीने में सबसे ज्यादा असर
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के आंकड़ों के अनुसार, इस साल अगस्त और सितंबर के दो महीनों में ट्रैक्टरों की बिक्री में पिछले साल के मुकाबले 27 प्रतिशत की गिरावट आई है। पिछले साल इस अवधि में 16,123 ट्रैक्टर बिके थे, जो इस साल घटकर केवल 11,813 रह गए हैं।
फाडा की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष सचिन महाजन के अनुसार, पूरी तरह से खेती पर निर्भर रहने वाले किसान बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। लंबे समय तक बारिश न होने से उन्हें खरीफ सीजन में भारी नुकसान हुआ है और आगे रबी सीजन की उम्मीदों पर भी पानी फिर गया है।
महाजन ने बताया कि अगस्त का महीना आमतौर पर त्योहारी बिक्री के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन इस बार सिर्फ अगस्त महीने में ट्रैक्टर की बिक्री में सबसे ज्यादा 43 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। महाजन के मुताबिक, प्रदेश सरकार ने अब 305 तहसीलों में सूखा का एलान कर दिया है।।
फसलों की पैदावार में 50 से 80% तक की कमी
किसान नेताओं का भी मानना है कि ट्रैक्टर बिक्री में आई यह कमी खेती के मौजूदा संकट का आईना है। महाराष्ट्र प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष भरत दिघोले ने बताया कि बारिश की कमी ने पूरे राज्य में फसलों को बर्बाद कर दिया है, जिससे किसानों की निवेश करने की क्षमता खत्म हो गई है। दिघोले के अनुसार, अलग-अलग इलाकों में कई फसलों की पैदावार 50 से 80 प्रतिशत तक गिर गई है। इनमें मक्का, कपास और सोयाबीन सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा, बारिश कम होने की वजह से खरीफ और लेट-खरीफ सीजन के प्याज की बुवाई में भी भारी कमी आई है।
किसानों की घटती आय और लगातार कमजोर होती ग्रामीण अर्थव्यवस्था के बीच, ट्रैक्टरों की बिक्री में आई यह सुस्ती महाराष्ट्र के कृषि क्षेत्र पर बढ़ते भारी दबाव का एक और स्पष्ट संकेत बनकर उभरी है।