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कृषि मंत्र : प्लांटर मशीन अपनाएं किसान, कम खर्च में आसानी से बोएं आलू

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Tue, 20 Oct 2026 06:04 PM IST
सार

आलू की बुआई के समय मजदूरों की कमी और बढ़ती लागत के बीच ट्रैक्टर चालित प्लांटर मशीन किसानों का काम आसान और तेज कर सकती है।
 

आलू प्लांटर में बीज डालने के लिए हॉपर और खांचे बने होते हैं।
आलू प्लांटर में बीज डालने के लिए हॉपर और खांचे बने होते हैं। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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आलू देश की प्रमुख सब्जी फसलों में शामिल है। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, पंजाब और गुजरात इसके प्रमुख उत्पादक राज्यों में हैं। आलू की खेती में बुआई का काम समय और मजदूरी दोनों मांगता है। ऐसे में आलू बोने वाली मशीन किसानों के लिए उपयोगी विकल्प बन रही है। ट्रैक्टर से चलने वाली यह मशीन कम समय में खेत में एक समान दूरी पर बीज डालने में मदद करती है।

एक साथ कई काम में उपोयोगी यंत्र 
आलू प्लांटर में बीज डालने के लिए हॉपर और खांचे बने होते हैं। ट्रैक्टर के आगे बढ़ने के साथ मशीन निर्धारित दूरी पर आलू के बीज खांचों में डालती जाती है। इससे बुआई में एकरूपता रहती है और मजदूरों की जरूरत कम होती है। कुछ मशीनों में खाद डालने की सुविधा भी होती है, जिससे बुआई के साथ खाद देने का काम किया जा सकता है।

तीन तरह की मशीनें
  • अर्ध-स्वचालित प्लांटर : इसमें बीज डालने की प्रक्रिया आंशिक रूप से स्वचालित होती है। किसान या मजदूर को मशीन में बीज की निगरानी और फीडिंग करनी पड़ती है। इसे करीब 15 एचपी या अधिक क्षमता वाले ट्रैक्टर से चलाया जा सकता है। इसकी शुरुआती कीमत करीब 55 हजार रुपये बताई गई है।
  • पूरी तरह स्वचालित प्लांटर : इसमें घूमने वाला बीज चुनने वाला पहिया कप की मदद से आलू के बीज उठाकर निर्धारित दूरी पर डालता है। इसकी क्षमता करीब 6,000 से 14,000 आलू प्रति घंटे तक हो सकती है। कुछ मॉडलों में खाद डालने की सुविधा भी मिलती है। इसे आमतौर पर 35 एचपी या अधिक क्षमता वाले ट्रैक्टर से चलाया जाता है। इसकी कीमत करीब 1.6 लाख रुपये से शुरू होती है।
  • हाई-स्पीड स्वचालित प्लांटर : इसमें पिकर-पिन तकनीक का इस्तेमाल होता है, जिससे तेज गति से बुवाई की जा सकती है। इसकी कीमत करीब 5.5 लाख रुपये से शुरू बताई गई है। मशीन का चुनाव किसान को अपने खेत का आकार, ट्रैक्टर की क्षमता, मजदूरी और बजट देखकर करना चाहिए।

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