सुपारी की छंटाई को आसान बनाने और उत्पाद की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए एग्रोग्रेड स्टार्टअप ने भारत का पहला ऑप्टिकल सॉर्टिंग सिस्टम लॉन्च किया है। इसकी पहली कमर्शियल मशीन कर्नाटक के मैंगलोर स्थित विकास ट्रेडर्स में लगाई गई है। इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य सुपारी की छंटाई में लगने वाली भारी मेहनत को कम करना और अच्छी गुणवत्ता बनाए रखना है।
एक घंटे में 1 टन सुपारी की छंटाई
यह मशीन एक घंटे में लगभग एक टन सुपारी की छंटाई कर सकती है। इसके जरिए मैंगलोर का यह केंद्र अब एक दिन में करीब 8 टन सुपारी की छंटाई कर रहा है। सामान्य मशीनों के उलट, यह मशीन कंप्यूटर विजन और एआई तकनीक का इस्तेमाल करके हर एक सुपारी की बारीकी से जांच करती है। यह उन बाहरी कमियों को भी पहचान लेती है, जो सिर्फ रंग देखकर पता नहीं चलतीं और खराब सुपारी को अच्छे माल से अपने आप अलग कर देती है।
शुरुआत में इस मशीन की छंटाई की सटीकता 75 प्रतिशत थी। लेकिन जैसे-जैसे काम बढ़ा और नया डेटा मिला, मशीन के एआई मॉडल को अपडेट किया गया और अब इसकी सटीकता लगभग 89 प्रतिशत तक पहुंच गई है। आगे और डेटा मिलने पर इसके और बेहतर होने की उम्मीद है।
मजदूरों पर निर्भरता होगी कम
मशीन लगने से पहले 'विकास ट्रेडर्स' पूरी तरह से हाथों से होने वाली छंटाई पर निर्भर था। कंपनी के अनुसार, एक मजदूर दिन भर में मुश्किल से दो बोरी सुपारी छांट पाता था और 15 लोगों की टीम 40 से 45 बोरी का ही काम कर पाती थी। मजदूरों की उपलब्धता के आधार पर ही माल की पैकिंग और डिलीवरी तय होती थी।
नई मशीन लगने से अब छंटाई का काम तय समय पर और तेजी से हो रहा है। इसके अलावा, मशीन हर लॉट (बैच) के बाद एक रिपोर्ट भी देती है, जिसमें सुपारी के आकार, खराबियों की जानकारी और पैक की गई सुपारी की संख्या दर्ज होती है। इससे व्यापारियों को गुणवत्ता पर नजर रखने में मदद मिलती है।
कैसे काम करती है यह मशीन?
यह मशीन एग्रोग्रेड की पेटेंट-पेंडिंग 'वेक्टर तकनीक' पर काम करती है, जो एक सुपारी की 10 से 12 तस्वीरें खींचती है। मशीन के एआई (AI) मॉडल कुछ ही मिलीसेकंड में इन तस्वीरों की जांच करके खराब सुपारी को अलग कर देते हैं। इस तकनीक को लाखों तस्वीरों के जरिए तैयार किया गया है और यह एनवीडिया (NVIDIA) के उच्च क्षमता वाले कंप्यूटर सिस्टम पर चलती है।
एग्रोग्रेड के सह-संस्थापक राकेशकुमार बराई के अनुसार, "सुपारी के लिए भारत की पहली स्वचालित मशीन बनाने में हमें 5 महीने लगे और इसके 3 डिजाइन बदले गए। हम फसल की हर खूबी का अध्ययन करते हैं, जैसे वह कैसे लुढ़कती है, कितनी धूल उड़ती है और अलग-अलग किस्मों में क्या अंतर है। हम 'विकास ट्रेडर्स' की टीम के आभारी हैं जिन्होंने हमारी तकनीक पर भरोसा किया।"
कंपनी के प्रोडक्ट इंजीनियरिंग प्रमुख अनिकेत घाडगे ने बताया कि यह मशीन गर्मी, धूल और नमी जैसे मुश्किल हालात में भी आसानी से काम करने के लिए बनाई गई है।
भारतीय स्टार्टअप पर जताया भरोसा
'विकास ट्रेडर्स' के राज पडलिया ने कहा, "मैं यह देखने के लिए उत्सुक था कि क्या सुपारी उद्योग में एआई और रोबोटिक्स का इस्तेमाल हो सकता है। हम यह जानकर बहुत खुश थे कि एक भारतीय स्टार्टअप इस पर काम कर रहा है। हमने उनके साथ मिलकर कई मॉडलों पर काम किया और अब हमारी छंटाई प्रक्रिया लगभग पूरी तरह से स्वचालित (ऑटोमैटिक) हो गई है। हम सुपारी उद्योग की पहली निजी कंपनी हैं जिसने इतनी आधुनिक एआई तकनीक को अपनाया है।"
बता दें कि इससे पहले 'एग्रोग्रेड' प्याज, आलू और सेब जैसे कृषि उत्पादों के लिए भी छंटाई मशीनें बना चुका है। कंपनी ने हाल ही में भारत के 15 राज्यों में अपनी 150वीं मशीन लगाई है। सुपारी क्षेत्र में उनका यह कदम उस उद्योग में एक बड़ा बदलाव है, जहां अब तक सारा काम सिर्फ हाथों से होता था।