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सरसों की बुवाई : खेत की तैयारी, खाद प्रबंधन और बीजाई की सही तकनीक, जानें बंपर पैदावार का फॉर्मूला

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: shreya singh Updated Sun, 25 Oct 2026 01:15 PM IST
Mustard Sowing: Field preparation, fertilizer management, and the right sowing techniques,learn the formula fo
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सरसों की बंपर पैदावार के लिए खेत की तैयारी, सही बीज दर, संतुलित खाद और समय पर बुवाई बेहद जरूरी है। भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान, भरतपुर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रामस्वरूप जाट बता रहे हैं सरसों की खेती की वैज्ञानिक तकनीकें, जिनसे उत्पादन में 25–30% तक बढ़ोतरी संभव है। जानिए डीएपी की जगह SSP का इस्तेमाल क्यों जरूरी है, यूरिया कब डालें, बीज की मात्रा और पौधों के बीच दूरी कितनी रखें, जीरो टिलेज से बुवाई कैसे करें और खरपतवार नियंत्रण के लिए कौन-से उपाय अपनाएं। 

गांव जंक्शन के लिए शैलेश अरोड़ा की रिपोर्ट..

HIGHLIGHTS 
खेत की तैयारी : 1 बार कल्टीवेटर और 2 बार हैरो चलाकर पाटा लगाएं
डीएपी की जगह सिंगल सुपर फास्फेट (SSP) डालें, तेल की मात्रा बढ़ेगी
नाइट्रोजन (यूरिया) को दो भागों में दें—आधा बुवाई पर, आधा पहली सिंचाई पर
लाइन से लाइन 45 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 15 सेमी रखें
सीड ड्रिल मशीन में बीज की मात्रा संतुलित करने के लिए भुना बाजरा मिलाएं
पूर्वोत्तर राज्यों में धान के बाद बिना जुताई 'जीरो टिलेज' से करें बुवाई
मैदानी क्षेत्रों में 10 से 30 अक्टूबर के बीच बुवाई पूरी करने की सलाह
बुवाई के 48-72 घंटे में पेंडीमेथालिन के स्प्रे से खरपतवार पर रोक
सही वैज्ञानिक विधियों से सरसों की पैदावार में 25 से 30% तक की वृद्धि

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