क्या धान की खेती में पानी और मजदूरी का खर्च कम किया जा सकता है? रोगरोधी किस्में किसानों को दवाओं पर होने वाले खर्च से कैसे बचा सकती हैं? नकली बीजों की पहचान का तरीका क्या है? और क्या कार्बन क्रेडिट किसानों के लिए कमाई का नया जरिया बन सकता है?
गांव जंक्शन पर पद्मश्री से सम्मानित कृषि वैज्ञानिक और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के पूर्व निदेशक डॉ. अशोक कुमार सिंह के साथ इस खास बातचीत के दूसरे भाग में इन सवालों के जवाब जानिए। यह चर्चा बासमती की खेती करने वाले किसानों के साथ-साथ धान उत्पादकों, कृषि विद्यार्थियों और खेती में नई तकनीक समझने वाले सभी लोगों के लिए उपयोगी है।
इस वीडियो में जानिए:
नकली बीजों से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखें?
साथी पोर्टल और प्रमाणित बीजों की क्या भूमिका है?
रोगरोधी बासमती किस्मों से खेती की लागत कैसे घट सकती है?
धान की सीधी बिजाई से पानी, मजदूरी और खर्च की कितनी बचत संभव है?
बासमती की खेती में खाद, दवाओं और पानी का सही प्रबंधन कैसे करें?
पराली का निस्तारण करके अतिरिक्त कमाई के क्या रास्ते हैं?
बासमती पर एमएसपी, एफपीओ और किसानों की बाजार में बेहतर भागीदारी पर वैज्ञानिक की क्या राय है?
जैविक खेती और कार्बन क्रेडिट से किसानों को क्या अवसर मिल सकते हैं?
ध्यान दें: यह इंटरव्यू दो भागों में प्रकाशित किया गया है। पहला भाग बासमती की ऐतिहासिक यात्रा, किस्मों, जीआई टैग और निर्यात पर केंद्रित है। यह दूसरा भाग खेती की तकनीक, लागत, किसानों की आमदनी और कृषि के भविष्य से जुड़े सवालों पर आधारित है।
आपके लिए सबसे उपयोगी जानकारी कौन-सी रही? कमेंट करके बताएं और वीडियो को दूसरे किसानों तक जरूर पहुंचाएं।
HIGHLIGHTS
नकली बीजों की पहचान और प्रमाणित बीज खरीदने का सही तरीका
रोगरोधी बासमती किस्मों से दवाओं और खेती की लागत में बचत
धान की सीधी बिजाई से पानी और मजदूरी का खर्च घटाने के तरीके
खाद, दवाओं और पानी के बेहतर प्रबंधन से खेती में फायदा
पराली प्रबंधन और कार्बन क्रेडिट से अतिरिक्त कमाई की संभावनाएं
बासमती की खेती में MSP, FPO और बाजार में किसानों की भागीदारी पर चर्चा