IIT खड़गपुर ने अनाज प्रसंस्करण की बेहतर तकनीक का विकास किया है। यह तकनीक प्रसंस्करण के काम में तेजी और लागत में कमी लाने का काम कर सकती है। खास बात यह है कि संस्थान ने इस तकनीक को व्यावसायिक स्तर पर उपयोग में लाने का काम एक निजी कंपनी को सौंप दिया है।
इस तकनीक के शोध दल का नेतृत्व प्रोफेसर ब्रजेश कुमार पांडा ने किया है।उनकी टीम में प्रोफेसर पी. श्रीनिवास राव और प्रोफेसर प्रवीण कुमार सप्पती के साथ-साथ शोधकर्ता समरन पी. भी शामिल थे। हाल ही में हुए एक औपचारिक समझौते के तहत, इस तकनीक को एसकेएफ बॉयलर्स एंड ड्रायर्स प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी को सौंप दिया गया है।
अनाज का नुकसान होगा कम और बचेगी लागत
इस तकनीक से व्यावसायिक स्तर पर अनाज की प्रोसेसिंग में सुधार होने और समय की बर्बादी कम होने की उम्मीद है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह नई तकनीक खाद्यान्न के नुकसान को कम करने में भी काफी मदद कर सकती है। इसके जरिए अनाज को तेजी से प्रोसेस करके कृषि उपज को खाने और आगे के उपयोग के लिए जल्दी और आसानी से तैयार किया जा सकेगा।
उद्योगों और शिक्षा जगत की साझेदारी पर जोर
इस समझौते पर आईआईटी खड़गपुर की ओर से अनुसंधान एवं विकास के एसोसिएट डीन प्रोफेसर देबदीप मुखर्जी ने हस्ताक्षर किए। इस मौके पर संस्थान के बौद्धिक संपदाऔर प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यों की देखरेख करने वाले प्रोफेसर संदीप डी. कुलकर्णी के अलावा शोध दल के सदस्य और अन्य शिक्षक भी मौजूद थे।
संस्थान के प्रवक्ता ने बताया कि यह साझेदारी सिर्फ तकनीक सौंपने तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दोनों पक्ष भविष्य में फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में नए समाधान खोजने के लिए मिलकर शोध के अवसरों की तलाश करेंगे। इस पूरी पहल का मुख्य उद्देश्य संस्थान में होने वाले शोध को उद्योगों के जमीन पर उपयोग में लाना और उद्योग समेत शिक्षा जगत के बीच आपसी सहयोग को मजबूत करना है।