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NAFPO: ज्यादातर FPO बाजार से सही ढंग से नहीं जुड़ पा रहे, बाहरी एजेंसियों के ज्ञान से कई गुना बढ़ा व्यापार

गांव जंक्शन डेस्क, लखनऊ Published by: Devesh Saraswat Updated Tue, 13 Oct 2026 12:09 PM IST
सार

  • अधिकतर किसान उत्पादक संगठन सही ढंग से बाजार से जुड़ नहीं पा रहे हैं।
  • NAFPO की नई रिपोर्ट के अनुसार, कई एफपीओ आज भी केवल कागजों पर मौजूद हैं और व्यापार क्षमता की कमी से जूझ रहे हैं।
  • बाहरी संस्थाओं के सहयोग से कुछ एफपीओ की आमदनी में बड़ी बढ़त देखने को मिली है।
     

किसान उत्पादक संगठनों के सामने बाजार से जुड़ने की चुनौती।
किसान उत्पादक संगठनों के सामने बाजार से जुड़ने की चुनौती। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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वर्तमान में अधिकतर किसान उत्पादक संगठनों के सामने बाजार से जुड़ना चुनौती है। इस चुनौती से पार पाने के लिए विशेषज्ञ संस्थाओं की भूमिका अहम हो सकती है। नेशनल एसोसिएशन ऑफ फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन का अध्ययन आलोचकों की इस बात पर पूरी तरह सहमत दिखाई देता है कि कई संगठन आज भी केवल कागजों पर ही मौजूद हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इनके पास व्यापार करने की क्षमता नहीं है और ये अपने सदस्य किसानों को बुनियादी सेवाएं देने में भी संघर्ष कर रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, सरकार की एफपीओ के गठन और संवर्धन योजना की मदद से 2025 के फरवरी महीने में 10 हजार किसान उत्पादक संगठन स्थापित करने में सफलता मिली है। लेकिन, इन संगठनों के सामने चुनौतियां भी हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस सरकारी योजना का मुख्य योगदान यही है कि इससे बड़े पैमाने पर किसानों को एकजुट करने में आने वाली समस्याओं को गहराई से समझने में मदद मिली है।

मार्केटिंग के ज्ञान की कमी
मार्केट लिंकेज अध्याय में तीन केस स्टडी के जरिए बताया गया है कि वर्तमान में मार्केटिंग की जिम्मेदारी FPO के बाहर की एजेंसियों और लोगों पर है। खरीदारों की जरूरतों को समझने और उसके अनुसार माल की आपूर्ति करने का जो ज्ञान चाहिए, वह अक्सर FPO के पास नहीं होता है। रिपोर्ट के अनुसार, बाहरी एजेंसियां अपनी विशेषज्ञता से किसानों की इसी कमी को पूरा कर रही हैं।

स्टार्टअप्स और बाहरी कंपनियां कैसे कर रहीं मदद
अध्ययन में बाजार से जुड़ने के तीन अलग-अलग तरीकों का जिक्र किया गया है। Arya.ag और बायर का फार्मराइज वन, ये दोनों बिजनेस-टू-बिजनेस मॉडल पर काम करते हैं। ये एफपीओ को संगठित क्षेत्र के बड़े और संस्थागत खरीदारों से सीधा जुड़ने में मदद करते हैं। किसानसे (KisaanSay) एक स्टार्टअप है जो बिजनेस-टू-कंज्यूमर मॉडल पर काम करता है और एफपीओ को ब्रांडिंग गतिविधियों में मदद करता है। इसके सह-संस्थापक नितिन पुरी के अनुसार, उपभोक्ताओं के भोजन की जरूरतें अलग-अलग भौगोलिक, जलवायु और जनसांख्यिकीय स्थितियों के अनुसार बहुत विविध (अलग-अलग) होती हैं।

आमदनी बढ़ाने और माल बेचने में मिल रहा सही मार्गदर्शन
रिपोर्ट के अनुसार, Arya.ag एफपीओ का मार्गदर्शन करता है कि उन्हें अपना माल कब और किसे बेचना है। इसमें उत्पादन, माल इकट्ठा करने और बाजार तक पहुंच को एक साथ जोड़ा गया है। कम्युनिटी वैल्यू चेन रिसोर्स पर्सन्स और डिजिटल उपकरणों के जरिए माल इकट्ठा करने की प्रक्रिया को मजबूत किया जाता है, जबकि गोदाम, कार्यशील पूंजी और खरीदारों से जुड़ाव बाजार में उनकी भागीदारी का समर्थन करते हैं। उदाहरण के तौर पर, उत्तर प्रदेश की 'मथुरा मांट मस्टर्ड प्रोड्यूसर कंपनी' को Arya.ag का समर्थन प्राप्त है, जिससे इस एफपीओ की कमाई 50 लाख रुपये से बढ़कर 1.2 करोड़ रुपये हो गई है।

वहीं, दूसरी तरफ बायर एफपीओ में अपने खास कर्मचारियों को तैनात करता है, जो सदस्य किसानों को फसल उगाने और कटाई के बाद के रखरखाव का प्रशिक्षण देते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, फार्मराइज वन विश्वसनीय कॉर्पोरेट खरीदार खोजने, कीमतों पर मोलभाव करने, भुगतान के समन्वय और माल ढुलाई में एफपीओ की पूरी मदद करता है।


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