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27 राज्यों में ई20 पेट्रोल की गुणवत्ता की हुई जांच : ज्यादा इथेनॉल के आरोपों को पेट्रोलियम मंत्रालय ने नकारा

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Sat, 07 Nov 2026 07:13 PM IST
सार

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लिए गए ई20 पेट्रोल के सभी 893 नमूनों में इथेनॉल की मात्रा निर्धारित 19-21 फीसदी के दायरे में मिली। कर्नाटक सरकार ने कुछ पेट्रोल पंपों पर इथेनॉल की मात्रा 26-31 फीसदी होने का दावा किया था, जिसे सरकारी तेल कंपनियों ने चुनौती दी है। जानिए, विस्तार से...

रकारी तेल कंपनियों की ओर से देशभर में जांचे गए 893 नमूनों में एथेनॉल की मात्रा निर्धारित मानकों के अनुरूप मिली है।
रकारी तेल कंपनियों की ओर से देशभर में जांचे गए 893 नमूनों में एथेनॉल की मात्रा निर्धारित मानकों के अनुरूप मिली है। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाने की व्यवस्था यानी ई20 को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने इसकी गुणवत्ता का बचाव किया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि सरकारी तेल कंपनियों की ओर से देशभर में जांचे गए 893 नमूनों में एथेनॉल की मात्रा निर्धारित मानकों के अनुरूप मिली है।

मंत्रालय के अनुसार, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) ने 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से नमूने लिए थे। सभी में भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के मानक आईएस 17021 के तहत निर्धारित 19 से 21 फीसदी एथेनॉल मिला।

कर्नाटक में 56 नमूनों की जांच
मंत्रालय के अनुसार, कर्नाटक में तीनों सरकारी तेल कंपनियों के अलग-अलग स्थानों से लिए गए 56 नमूनों में एथेनॉल की मात्रा 19 से 20 फीसदी के बीच रही। इनका औसत 19.30 फीसदी दर्ज किया गया।

यह आंकड़ा कर्नाटक सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के विभाग के उस दावे से अलग है, जिसमें अक्तूबर 2026 में कुछ पेट्रोल पंपों से लिए गए नमूनों में एथेनॉल की मात्रा 26 से 31 फीसदी बताई गई थी।

तेल कंपनियों ने कर्नाटक में अपनाई गई नमूना लेने और जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत नमूने लेने और जांच के तकनीकी विवरण सार्वजनिक किए बिना इन नतीजों की स्वतंत्र पुष्टि संभव नहीं है।

नमूने लेने की प्रक्रिया पर विवाद
मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल आपूर्ति, वितरण एवं अनियमितताओं की रोकथाम संबंधी आदेश 2005 और मार्केटिंग डिसिप्लिन गाइडलाइंस 2024 के अनुसार, निरीक्षण के दौरान एक-एक लीटर के छह नमूने लेने होते हैं। इनमें दो डीलर को, दो तेल कंपनी या विभाग को और दो अधिकृत प्रयोगशाला को दिए जाते हैं।

तेल कंपनियों का कहना है कि सितंबर में लिए गए नमूनों को निर्धारित प्रक्रिया से जांच के लिए भेजा गया था, लेकिन अक्तूबर में हुई जांच के दौरान उनके प्रतिनिधि मौजूद नहीं थे। कंपनियों को संबंधित सुरक्षित नमूने, पेट्रोल पंप के हिसाब से पूरी जानकारी और प्रयोगशाला रिपोर्ट भी नहीं मिली हैं।

उन्होंने तीसरी पार्टी की प्रयोगशाला से जारी प्रमाणपत्रों पर भी सवाल उठाए हैं। कंपनियों के अनुसार, इनमें गैस क्रोमैटोग्राफी जांच के मानक, नमूने को पतला करने की प्रक्रिया और संदर्भ सामग्री का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।

माइलेज और वाहन मरम्मत खर्च पर भी सवाल
ई20 पेट्रोल के कारण उपभोक्ताओं को सालाना 62,000 करोड़ रुपये के माइलेज नुकसान और 39,000 करोड़ रुपये के वाहन मरम्मत खर्च होने के अनुमानों को भी मंत्रालय और तेल कंपनियों ने चुनौती दी है।

मंत्रालय के अनुसार, ई20 के लिए तैयार वाहनों में माइलेज में करीब 1-2 फीसदी और कुछ अन्य वाहनों में 3-6 फीसदी तक कमी हो सकती है। यह वाहन की श्रेणी और इंजन की बनावट पर निर्भर करता है। सभी वाहनों में 10 फीसदी माइलेज गिरावट मानकर राष्ट्रीय स्तर पर नुकसान का आकलन करना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है।

मंत्रालय के मुताबिक, 2014-15 से एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के कारण 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचत हुई है। करीब 316 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल की जगह एथेनॉल का इस्तेमाल हुआ और लगभग 952 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम हुआ। इस दौरान किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान भी किया गया।

तेल कंपनियों ने कर्नाटक सरकार से जांच के सभी दस्तावेज और प्रयोगशाला रिपोर्ट उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने दोनों पक्षों की मौजूदगी में अधिकृत प्रयोगशाला से संयुक्त जांच कराने की पेशकश भी की है।
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