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अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA): भारत को लगातार तीसरी बार मिली कमान, किसानों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की तैयारी

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Tue, 03 Nov 2026 08:22 PM IST
सार

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) के नौवें सत्र में भारत को लगातार तीसरी बार अध्यक्ष और फ्रांस को सह-अध्यक्ष चुना गया। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने निवेश, किसानों और क्षमता निर्माण पर जोर दिया।
 

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी।
केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भारत को लगातार तीसरी बार अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) का अध्यक्ष चुना गया है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मंगलवार को भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन (बीआरई समिट) 2026 में आईएसए के नौवें सत्र के दौरान यह जानकारी दी। फ्रांस को फिर से सह-अध्यक्ष चुना गया है।

130 देशों का मंच है आईएसए 
जोशी ने कहा कि आईएसए का उद्देश्य सौर ऊर्जा के लाभ सभी देशों तक पहुंचाना है। भारत ने सभी सदस्य देशों का आभार जताते हुए अंतरराष्ट्रीय सौर सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि 2015 में भारत और फ्रांस की पहल से बने इस गठबंधन में अब 130 हस्ताक्षरकर्ता और सदस्य देश हैं। यह खासकर ग्लोबल साउथ के देशों के लिए सहयोग का अहम मंच बन गया है।

अफ्रीका में निवेश पर जोर
मंत्री ने उन क्षेत्रों में सौर ऊर्जा के लिए निवेश बढ़ाने पर जोर दिया, जहां इसकी सबसे अधिक जरूरत है। उन्होंने बताया कि अफ्रीका के वितरित नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए 20 करोड़ डॉलर की अफ्रीका सोलर फैसिलिटी बनाई गई है। इसमें भारत ने करीब 2.5 करोड़ डॉलर यानी 225 करोड़ रुपये देने की प्रतिबद्धता जताई है। वहीं, 30 करोड़ डॉलर का नाइजीरिया वितरित नवीकरणीय ऊर्जा कोष इस मॉडल को पूरे महाद्वीप में विस्तार देने की दिशा में अहम पहल है।

किसानों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की तैयारी
जोशी ने 30 लाख किसानों को सौर ऊर्जा से सशक्त बनाने और कृषि-फोटोवोल्टिक (एग्री-पीवी) के विस्तार की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि पीएम-कुसुम योजना से सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई के जरिए किसानों की लागत घटाने और अतिरिक्त आय के अवसर बनाने में मदद मिल सकती है। आईएसए इस मॉडल को सदस्य देशों, खासकर अफ्रीका में अपनाने की दिशा में काम कर रहा है।

स्वास्थ्य और खेती को मिलेगा लाभ
मंत्री के मुताबिक फिजी, मेडागास्कर, कोमोरोस और सेशेल्स में आईएसए की पहल से स्वास्थ्य केंद्रों और स्कूलों को बिजली, स्वच्छ पेयजल तथा कृषि उत्पादों के लिए कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है। गठबंधन छोटे द्वीपीय विकासशील देशों के लिए सौर ऊर्जा और भंडारण के बड़े मॉडल तैयार करने पर भी काम कर रहा है।

तकनीक और कौशल पर ध्यान
जोशी ने बताया कि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में राष्ट्रीय क्षमताएं बढ़ाने के लिए 17 सोलर टेक्नोलॉजी एप्लीकेशन रिसोर्स सेंटर, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर-शाइन और एआई-सक्षम आईएसए अकादमी स्थापित की गई हैं। इनका मकसद संस्थानों को मजबूत करना, कौशल विकसित करना और नई तकनीकों के जरिए सौर ऊर्जा का विस्तार तेज करना है।

उन्होंने कहा कि एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ किफायती, भरोसेमंद और स्वच्छ बिजली की जरूरत भी बढ़ेगी। नए कार्यकाल में आईएसए का जोर निवेश जुटाने, सौर ऊर्जा परियोजनाओं को तेजी से लागू करने और सदस्य देशों के लिए ठोस नतीजे हासिल करने पर रहेगा।

कई देशों के प्रतिनिधि रहे मौजूद
सम्मेलन में एमएनआरई सचिव संतोष कुमार सारंगी, आईएसए के महानिदेशक आशीष खन्ना, फ्रांस, डेनमार्क, सूरीनाम, सेशेल्स और श्रीलंका के मंत्री व प्रतिनिधि शामिल हुए। बीआरई समिट एवं एक्सपो 2026 का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 नवंबर को किया था। यह 5 नवंबर तक चलेगा।
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