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पंजाब में पराली जलाने की 3,144 घटनाएं: खेतों में आग लगाने में तरनतारन सबसे आगे, 795 एफआईआर दर्ज

गांव जंक्शन डेस्क, चंडीगढ़ Published by: Umashankar Mishra Updated Sat, 07 Nov 2026 07:17 PM IST
सार

पंजाब में 15 सितंबर से छह नवंबर के बीच पराली जलाने की 3,144 घटनाएं दर्ज की गईं। तरनतारन जिले में सबसे ज्यादा 611 मामले सामने आए। अब तक 1,077 मामलों में 54.55 लाख रुपये का पर्यावरण मुआवजा लगाया गया है। जानिए, विस्तार से...

पंजाब में जिलावार आंकड़ों में तरनतारन सबसे आगे रहा। यहां पराली जलाने के 611 मामले सामने आए।
पंजाब में जिलावार आंकड़ों में तरनतारन सबसे आगे रहा। यहां पराली जलाने के 611 मामले सामने आए। - फोटो : AI Image (सांकेतिक तस्वीर)
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विस्तार
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पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं तीन हजार का आंकड़ा पार कर गई हैं। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, 15 सितंबर से छह नवंबर के बीच राज्य में खेतों में आग लगाने की 3,144 घटनाएं दर्ज की गईं। पांच नवंबर तक यह संख्या 2,787 थी।

पंजाब में जिलावार आंकड़ों में तरनतारन सबसे आगे रहा। यहां पराली जलाने के 611 मामले सामने आए। इसके बाद फिरोजपुर में 410, संगरूर में 281, बठिंडा में 262 और अमृतसर में 231 घटनाएं दर्ज की गईं।

1,077 मामलों में लगाया गया जुर्माना
पीपीसीबी के अनुसार, पराली जलाने के 1,077 मामलों में पर्यावरण मुआवजे के रूप में 54.55 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसमें से 30.05 लाख रुपये की वसूली हो चुकी है।

इस अवधि में भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत 795 एफआईआर भी दर्ज की गई हैं। इसके अलावा पराली जलाने वाले किसानों के भूमि रिकॉर्ड में 931 रेड एंट्री की गई हैं। इनमें तरनतारन में 301 और फिरोजपुर में 98 मामले शामिल हैं।

रेड एंट्री होने पर किसान अपनी कृषि भूमि के बदले कर्ज लेने या उसे बेचने में सक्षम नहीं रहते।

पिछले वर्षों के मुकाबले कम हुई घटनाएं
धान की कटाई अक्तूबर और नवंबर में होती है। इसके बाद रबी सीजन की गेहूं की बुवाई के लिए किसानों के पास कम समय बचता है। खेत जल्दी खाली करने के लिए कुछ किसान फसल अवशेषों में आग लगा देते हैं। पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने को दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण बढ़ने की एक प्रमुख वजह माना जाता है। 

आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब में 2025 के धान कटाई सीजन में पराली जलाने की 5,114 घटनाएं दर्ज की गई थीं। वर्ष 2024 में यह संख्या 10,909 और 2023 में 36,663 रही थी।
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