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छत्तीसगढ़ : 50 साल बाद गोमर्दा के जंगलों में लौटेंगे काले हिरण, फिर आबाद होगा अभयारण्य

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Thu, 15 Oct 2026 03:49 PM IST
सार

  • गोमर्दा अभयारण्य में करीब पांच दशक बाद काले हिरण फिर बसाए जाएंगे।
  • अगले एक सप्ताह में चरणबद्ध तरीके से हिरणों को बरनवापारा से स्थानांतरित किया जाएगा।
  • वर्ष 2017-18 में लाए गए 77 हिरणों के बाद वहां इनकी संख्या 150 से अधिक हो गई है।
  • शिकार, अतिक्रमण और विकास कार्यों के कारण गोमर्दा क्षेत्र से काले हिरण गायब हो गए थे।

50 साल बाद गोमर्दा के जंगलों में लौटेंगे काले हिरण
50 साल बाद गोमर्दा के जंगलों में लौटेंगे काले हिरण - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के गोमर्दा वन्यजीव अभयारण्य में करीब पांच दशक बाद काले हिरणों की वापसी होने जा रही है। वन विभाग की योजना के तहत अगले एक सप्ताह में चरणबद्ध तरीके से 50 काले हिरण यहां लाए जाएंगे। इन हिरणों को राज्य के ही बरनवापारा वन्यजीव अभयारण्य से स्थानांतरित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य क्षेत्र में वन्यजीवों की संख्या बढ़ाना और जैव विविधता को मजबूत करना है।

शिकार और अतिक्रमण से खत्म हो गई थी आबादी
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, शिकार, अवैध शिकार, अतिक्रमण और तेजी से हुए विकास कार्यों के कारण इस क्षेत्र में काले हिरणों की संख्या लगातार घटती गई। 1970 के दशक तक यहां से ये हिरण गायब हो गए थे। इसके बाद से इस इलाके में इन्हें स्थानीय रूप से विलुप्त माना जाता रहा है। अब वन विभाग ने काले हिरणों को दोबारा इस अभयारण्य में बसाने की योजना बनाई है। इसके तहत हिरणों को नए वातावरण में ढलने के लिए चरणबद्ध तरीके से स्थानांतरित किया जाएगा।

बरनवापारा में सफल रहा संरक्षण अभियान
गोमर्दा में काले हिरणों को बसाने की योजना के पीछे बरनवापारा अभयारण्य में मिली सफलता भी एक अहम वजह है। वर्ष 2017-18 में यहां 77 काले हिरण लाए गए थे। इनमें से 50 हिरण नई दिल्ली के नेशनल जियोलॉजिकल पार्क और 27 बिलासपुर के कानन पेंडारी जूलॉजिकल गार्डन से लाए गए थे।

इस अभियान के बाद बरनवापारा में काले हिरणों की संख्या बढ़कर 150 से अधिक हो गई है। अभयारण्य के सुपरिंटेंडेंट कृष्णनू चंद्राकर के मुताबिक, हिरणों को नए माहौल में ढलने में समय लगा था। इसलिए उन्हें चरणों में खुले वातावरण में छोड़ा गया।

गोमर्दा का वातावरण काले हिरणों के लिए अनुकूल
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गोमर्दा अभयारण्य में पर्याप्त पानी और घास के मैदान मौजूद हैं, जो काले हिरणों के लिए अनुकूल आवास हैं।वन्यजीव प्रबंधन एवं जैव विविधता संरक्षण के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) ओ.पी. यादव के अनुसार, गोमर्दा और बरनवापारा अभयारण्य करीब 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं और एक ही भौगोलिक क्षेत्र का हिस्सा हैं। ऐसे में दोनों अभयारण्यों के बीच वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

वन्यजीव पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
वन विभाग को उम्मीद है कि काले हिरणों की वापसी से गोमर्दा अभयारण्य की जैव विविधता मजबूत होगी। इसके साथ ही यहां वन्यजीव पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से आसपास के ग्रामीणों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अप्रैल को अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में देश में काले हिरणों के संरक्षण से जुड़े प्रयासों की सराहना की थी। अब गोमर्दा में काले हिरणों को फिर से बसाने की यह पहल छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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