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कृषि व आपदा प्रबंधन को मिलेगी मजबूती : स्वदेशी ड्रोन-रडार तकनीक को बढ़ावा दे रहे युवा डीप-टेक स्टार्टअप

ग्रेटर नोएडा/कोलकाता Published by: Umashankar Mishra Updated Mon, 10 Aug 2026 07:03 PM IST
सार

भारत के युवा डीप-टेक स्टार्टअप दुर्गम इलाकों में लॉजिस्टिक्स से लेकर रक्षा, कृषि और आपदा प्रबंधन तक के लिए स्वदेशी ड्रोन और SAR रडार तकनीक विकसित कर रहे हैं।

तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की कोशिशों को युवा डीप-टेक स्टार्टअप नई गति दे रहे हैं।
तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की कोशिशों को युवा डीप-टेक स्टार्टअप नई गति दे रहे हैं। - फोटो : AI
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विस्तार
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देश में विकसित हो रहे स्वदेशी ड्रोन और रडार सिस्टम का इस्तेमाल रक्षा और लॉजिस्टिक्स से लेकर कृषि और आपदा प्रबंधन तक विभिन्न क्षेत्रों में किया जा सकता है। यह उभरता हुआ डीप-टेक इकोसिस्टम भारत की तकनीकी दुनिया में हो रहे बदलाव को भी दिखाता है, जहां स्टार्टअप आयातित प्रणालियों पर निर्भर रहने के बजाय महत्वपूर्ण हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर देश में ही विकसित करने पर जोर दे रहे हैं।

भारत की जरूरतों के हिसाब से ड्रोन तकनीक
ग्रेटर नोएडा का डीप-टेक स्टार्टअप EndureAir भारत के विविध भौगोलिक क्षेत्रों और कठिन परिचालन परिस्थितियों के लिए एडवांस ड्रोन और एरियल रोबोटिक्स विकसित कर रहा है। कंपनी के CEO और सह-संस्थापक रमा कृष्णन ने कहा कि भारत की भौगोलिक परिस्थितियां ऐसी तकनीक की मांग करती हैं, जिसे स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाए।

जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों से लेकर पूर्वी क्षेत्र, समुद्री सीमाओं और पश्चिमी रेगिस्तानों तक ड्रोन को अलग-अलग और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। उनके मुताबिक, दूसरे देशों के लिए विकसित तकनीक भारत की सभी परिचालन जरूरतों को पूरा नहीं कर सकती। इसी वजह से EndureAir हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों को इन-हाउस विकसित कर रहा है।

20 किलो पेलोड वाला SABAL-20 ड्रोन
कंपनी के प्रमुख प्लेटफॉर्म SABAL-20 को कठिन इलाकों में सामरिक लॉजिस्टिक्स और हवाई आपूर्ति मिशनों के लिए तैयार किया गया है। यह ड्रोन करीब 20 किलो पेलोड ले जा सकता है, लगभग 40 मिनट तक उड़ान भर सकता है और इसकी परिचालन रेंज करीब 10 किलोमीटर है। इसमें हेलीकॉप्टर से प्रेरित वेरिएबल-पिच तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिसका उद्देश्य चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में ड्रोन को अधिक स्थिरता और बेहतर लिफ्ट देना है।

ड्रोन पायलट इशिका के अनुसार, बड़े ब्लेड अधिक हवा का प्रवाह और लिफ्ट पैदा करते हैं। इससे ड्रोन छोटे मल्टी-रोटर सिस्टम की तुलना में खासकर तेज गति पर बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।

बादल और अंधेरे में भी इमेजिंग करेगा SAR
ड्रोन की क्षमता बढ़ने के साथ उन्नत सेंसर तकनीक की जरूरत भी बढ़ रही है। इसी दिशा में कोलकाता का डीप-टेक और स्पेस-टेक स्टार्टअप SisIR Radar काम कर रहा है। पूर्व ISRO वैज्ञानिक तपन मिश्रा द्वारा स्थापित कंपनी ड्रोन, विमान और उपग्रहों के लिए Synthetic Aperture Radar (SAR) तकनीक विकसित कर रही है।

पारंपरिक ऑप्टिकल इमेजिंग के विपरीत SAR बादल, कोहरा, धुआं और अंधेरे में भी तस्वीरें लेने में सक्षम है। इस वजह से इसका इस्तेमाल रक्षा, कृषि और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। मिश्रा ने बताया कि कंपनी ड्रोन के लिए लो-फ्रीक्वेंसी SAR सिस्टम और उपग्रहों के लिए हाई-रिजॉल्यूशन रडार सिस्टम विकसित कर रही है।

दो मीटर रिजॉल्यूशन वाले L-band रडार पर काम
कंपनी के अनुसार, उसका L-band सैटेलाइट रडार करीब दो मीटर रिजॉल्यूशन देने के लिए डिजाइन किया गया है, जबकि वैश्विक बेंचमार्क करीब 10 मीटर बताया गया है। SisIR Radar ऐसे रडार हार्डवेयर पर भी काम कर रहा है, जिन्हें दोबारा इस्तेमाल और अलग-अलग मिशन के लिए सॉफ्टवेयर के जरिए री-कॉन्फिगर किया जा सके। कंपनी की वैज्ञानिक मेहली पहाड़ी ने बताया कि एक ही हार्डवेयर प्लेटफॉर्म को अलग-अलग कार्यों के लिए प्रोग्राम किया जा सकता है। इससे सिस्टम को दोबारा इस्तेमाल करना, अलग जरूरतों के अनुसार ढालना और नए मिशन में तैनात करना आसान होता है।

'Trinetra' से आसान होगा रडार डेटा का इस्तेमाल
SisIR Radar ने 'Trinetra' नाम का एक सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म भी विकसित किया है। इसका उद्देश्य खासकर रक्षा क्षेत्र में रडार डेटा के इस्तेमाल और उसकी व्याख्या को आसान बनाना है। कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट अभिषेक रॉय चौधरी ने बताया कि कंपनी के प्रमुख उत्पादों में L-band और P-band SAR सिस्टम शामिल हैं।

कंपनी के अनुसार, इन तकनीकों से सब-मीटर रिजॉल्यूशन वाला डेटा हासिल किया जा सकता है। उनके मुताबिक, कंपनी के SAR सिस्टम सब-मीटर रिजॉल्यूशन दे सकते हैं, जो Sentinel के मुफ्त डेटा से उपलब्ध करीब 10 मीटर रिजॉल्यूशन की तुलना में काफी अधिक बारीक जानकारी प्रदान करता है।

स्वदेशी विकास की ओर बढ़ता डीप-टेक इकोसिस्टम
दुर्गम इलाकों में जरूरी सामान पहुंचाने वाले सामरिक ड्रोन से लेकर बादल और अंधेरे के पार इमेजिंग करने वाले रडार तक, भारत के युवा स्टार्टअप देश की विशिष्ट परिचालन जरूरतों को ध्यान में रखकर तकनीक विकसित कर रहे हैं। EndureAir और SisIR Radar जैसी कंपनियों की बढ़ती क्षमताएं भारत के डीप-टेक इकोसिस्टम में एक बड़े बदलाव को दर्शाती हैं।

यह बदलाव उन्नत तकनीकों के लिए आयात पर निर्भरता से आगे बढ़कर महत्वपूर्ण प्रणालियों के देश में ही डिजाइन और निर्माण की दिशा में हो रहा है।
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