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YouTube से कमाई के नियम होंगे सख्त : अब दोगुना वॉच टाइम करना होगा पूरा, फेसलेस वीडियो वालों की बढ़ेगी मुश्किल

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Sun, 13 Sep 2026 10:04 AM IST
सार

  • YouTube से कमाई करना मुश्किल होने वाला है।
  • नए चैनलों को कमाई के लिए पात्र होने के लिए पहले से ज्यादा सख्त शर्तें पूरी करनी होगी।
  • बिना चेहरा दिखाकर और AI वीडियो बनाने वाले चैनलों की कमाई पर काले बादल।
  • कमाई तय करने में करने में दर्शकों की लोकेशन अहम।

यूट्यूब से कमाई करने के नियमों में बड़ा बदलाव होने वाला है।
यूट्यूब से कमाई करने के नियमों में बड़ा बदलाव होने वाला है। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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यूट्यूब से पैसा कमाने के नियम एक बार फिर पूरी तरह से बदलने वाले हैं। वाशिंगटन से मिली एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, यूट्यूब 1 फरवरी 2027 से अपनी कमाई (मोनेटाइजेशन) के नियमों को पहले से दोगुना सख्त करने जा रहा है। इस बदलाव से उन भारतीय वीडियो बनाने वालों (क्रिएटर्स) की मुश्किलें सबसे ज्यादा बढ़ सकती हैं, जो बिना अपना चेहरा दिखाए (फेसलैस) वीडियो बनाते हैं।

कमाई शुरू करने की नई शर्तें
नए बदलावों के तहत, अब नए चैनलों को यूट्यूब पर विज्ञापनों से कमाई शुरू करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी होगी। लंबे वीडियो के लिए पहले जहां 4,000 घंटे के वॉच टाइम की जरूरत होती थी, वहीं अब 8,000 क्वालिफाइड वॉच आवर्स (घंटे) पूरे करने होंगे। शॉर्ट्स के लिए पहले 1 करोड़ व्यूज की जरूरत होती थी, जिसे बढ़ाकर अब 2 करोड़ व्यूज कर दिया गया है।

व्यूज से ज्यादा यह मायने रखता है कि दर्शक कहां के हैं?
एक विश्लेषण के हवाले से यह खुलासा हुआ है कि यूट्यूब पर सिर्फ ज्यादा व्यूज के पीछे भागना घाटे का सौदा साबित हो सकता है। भारत में चल रहे तीन अलग-अलग फेसलैस (बिना चेहरे वाले) चैनलों के आंकड़ों ने कमाई के एक बड़े अंतर को दिखाया है। एक हिंदी मोरल स्टोरी चैनल के 89% दर्शक भारत से हैं। इस चैनल के एक वीडियो पर 6.5 लाख से ज्यादा व्यूज आए, लेकिन उसकी महीने की कमाई महज 36 डॉलर (लगभग 3,000 रुपये) ही रही। वहीं दूसरी तरफ, एक अंग्रेजी इंजीनियरिंग व कंस्ट्रक्शन चैनल के 42.7% दर्शक अमेरिका से हैं। यह चैनल हर महीने लगभग 4,447 डॉलर (करीब 3.7 लाख रुपये) कमा रहा है।

मुफ्त वीडियो क्लिप और एआई (AI) की आवाज अब नहीं चलेगी
रिपोर्ट के मुताबिक, यूट्यूब अब अपनी 'रीयूज्ड कंटेंट पॉलिसी' (दूसरे की सामग्री को दोबारा इस्तेमाल करने के नियम) को लेकर बहुत ज्यादा सख्त हो गया है। अब इंटरनेट से मुफ्त के स्टॉक फुटेज (वीडियो क्लिप) उठाना, उसमें एक साधारण स्क्रिप्ट डालना और एआई (AI) कंप्यूटर की आवाज जोड़कर वीडियो बनाना अब यूट्यूब पर नहीं चलेगा।

सिर्फ विज्ञापनों के भरोसे रहना फायदे का सौदा नहीं
नए नियमों को देखते हुए एक्सपर्ट्स (जानकारों) का मानना है कि अब वीडियो बनाने वालों को केवल विज्ञापनों (एडसेंस) से होने वाली कमाई के भरोसे नहीं बैठना चाहिए। जानकारों के अनुसार, जो बड़े और सफल क्रिएटर्स हैं, वे अपनी कमाई के लिए कई अलग-अलग तरीके अपनाते हैं, जैसे— कंपनियों से स्पॉन्सरशिप लेना, एफिलिएट लिंक का इस्तेमाल करना और अपने खुद के डिजिटल उत्पाद (प्रोडक्ट्स) बेचना।


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