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किसान नेटवर्क : 50,000 से बढ़ाकर अब 2 लाख किसानों का कुनबा बनाने निकला गुरुग्राम का ये कृषि स्टार्टअप

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Wed, 21 Oct 2026 02:51 PM IST
सार

गुरुग्राम की डायरेक्ट-फ्रॉम-ओरिजिन खाद्य ब्रांड किसानसे वित्त वर्ष 2027 तक अपना किसान नेटवर्क चार गुना बढ़ाकर 2 लाख करने और खरीद का दायरा 10 से 15 राज्यों तक ले जाने की तैयारी में है। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी की आमदनी चार गुना बढ़कर 20 करोड़ रुपये हो गई है। उसके को-ब्रांड, को-प्रॉफिट मॉडल में हर पैक पर उपभोक्ता के खर्च का 50 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा सीधे किसानों तक पहुंचता है।

गुरुग्राम की डायरेक्ट-फ्रॉम-ओरिजिन खाद्य ब्रांड किसानसे अब बड़ी उड़ान की तैयारी में है।
गुरुग्राम की डायरेक्ट-फ्रॉम-ओरिजिन खाद्य ब्रांड किसानसे अब बड़ी उड़ान की तैयारी में है। - फोटो : स्टॉक
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विस्तार
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डायरेक्ट-फ्रॉम-ओरिजिन खाद्य ब्रांड किसानसे वित्त वर्ष 2027 तक अपना किसान नेटवर्क चार गुना बढ़ाकर 2,00,000 तक पहुंचाना चाहती है। साथ ही वह अपनी खरीद का दायरा 10 राज्यों से बढ़ाकर 15 राज्यों तक ले जाएगी। इस विस्तार में मिजोरम, हिमाचल प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल में नई खरीद साझेदारियां जुड़ेंगी, जिससे किसानों से जुड़ी उसकी आपूर्ति शृंखला और मजबूत होगी।

50,000 किसानों का कुनबा
अभी किसानसे 25 किसान उद्यमों और किसान उत्पादक कंपनियों (एफपीसी) के जरिये 50,000 किसानों के साथ काम कर रही है। ब्रांड 12 श्रेणियों में 100 से ज्यादा एकल-मूल यानी सिंगल-ओरिजिन उत्पाद पेश करता है। इन उत्पादों की खरीद, हल्की प्रसंस्करण और पैकिंग उनके अपने उत्पत्ति स्थान पर ही होती है, और जोर रहता है उत्पाद की जड़ों, उसकी पूरी राह पर नजर रखने की सुविधा और मूल्य शृंखला में किसानों की भागीदारी पर।

हर पैक में किसान का 50 से ज्यादा हिस्सा
कंपनी के को-ब्रांड और को-प्रॉफिट मॉडल की खास बात यह है कि हर पैक पर उपभोक्ता जो रकम खर्च करता है, उसका 50 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा सीधे किसानों तक पहुंचता है।

कमाई और पूंजी का सहारा
इस विस्तार से पहले वित्त वर्ष 2026 में कंपनी की आमदनी चार गुना बढ़कर 20 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले वित्त वर्ष में 5 करोड़ रुपये थी। अप्रैल 2026 में कंपनी ने नैबवेंचर्स की अगुआई में एग्रीश्योर फंड के जरिये सीरीज ए दौर में 34 करोड़ रुपये जुटाए। इस पूंजी से वितरण, तकनीकी ढांचे और आपूर्ति शृंखला की क्षमता को मजबूत किया जा रहा है, खरीद का तंत्र फैलाया जा रहा है और बाजार तक पहुंच बढ़ाई जा रही है।

बिक्री का सीधा-सा है गणित
किसानसे की मौजूदा बिक्री में सबसे बड़ा हिस्सा सीधे उपभोक्ता तक पहुंचने वाले डी2सी माध्यम का है, जो आमदनी में 60 प्रतिशत योगदान देता है। ऑनलाइन मार्केटप्लेस का हिस्सा 30 प्रतिशत है और बाकी 10 प्रतिशत ऑफलाइन खुदरा बिक्री से आता है।

थाली तक ऐसे पहुंच रहे उत्पाद 
कंपनी अपने उत्पाद अपने खुद के मंच के साथ अमेजन, जेप्टो, ब्लिंकिट और बिगबास्केट जैसे प्रमुख ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स मंचों से बेचती है। दिल्ली-एनसीआर के चुनिंदा ऑफलाइन खुदरा स्टोरों में भी उसकी मौजूदगी है। यह विस्तार ऐसे समय हो रहा है, जब सीधी खरीद, खाद्य पदार्थों की उत्पत्ति पर नजर रखने की सुविधा और पारदर्शी कृषि आपूर्ति शृंखलाओं में दिलचस्पी बढ़ रही है। 

बदलते बाजार की आहट
किसान नेटवर्क और भौगोलिक पहुंच बढ़ाकर किसानसे का इरादा मूल-आधारित खाद्य उत्पादों तक अपनी पहुंच मजबूत करना और किसान समुदायों के लिए बाजार के नए अवसर मुहैया कराना है। किसानों से साझेदारी, मूल आधारित खरीद और बहु-माध्यम वितरण की उसकी रणनीति उसे भारत के उभरते डायरेक्ट-फ्रॉम-ओरिजिन खाद्य क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की स्थिति में रखती है।
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