भारत के गांवों में ड्रोन आधारित सेवाओं और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) ने निजी ड्रोन और एग्री-टेक कंपनी AVPL के साथ National Entrepreneurs Empowerment Drive (NEED) के तहत साझेदारी की है। इस पहल का लक्ष्य ‘1 पंचायत-1 ड्रोन उद्यमी’ मिशन के जरिए देशभर में 2 लाख प्रशिक्षित ड्रोन उद्यमी तैयार करना और उन्हें ड्रोन आधारित सेवा कारोबार से जोड़ना है।
‘एक कंपनी नहीं, पूरी ड्रोन इंडस्ट्री मिलकर बनाए बाजार’
AVPL के संस्थापक डॉ. दीप सिहाग सिसाई ने ड्रोन उद्योग की कंपनियों से 2 लाख ड्रोन उद्यमी तैयार करने के इस बड़े मिशन में एकजुट होकर सहयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य किसी एक कंपनी के लिए हासिल करना संभव नहीं है, इसलिए ड्रोन निर्माता, कंपोनेंट कंपनियां, टेक्नोलॉजी प्रदाता, प्रशिक्षण संस्थान और सेवा कंपनियां साथ आएं। उनके अनुसार, कंपनियां बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकती हैं, लेकिन बाजार के विस्तार और निर्माण के लिए पूरे उद्योग को मिलकर काम करना होगा।
‘1 पंचायत–1 ड्रोन उद्यमी’ मॉडल कैसे करेगा काम?
इस मॉडल के तहत प्रत्येक ड्रोन उद्यमी पंचायत स्तर पर ड्रोन और ग्रामीण तकनीक सेवा केंद्र संचालित करेगा, जहां किसानों को फसल छिड़काव, नैनो-फर्टिलाइजर का इस्तेमाल, बीज प्रसार, फसल निगरानी, सर्वे-मैपिंग और अन्य कृषि व सरकारी सेवाएं उपलब्ध होंगी। शेयर-सर्विस मॉडल के तहत किसानों को खुद ड्रोन खरीदने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि एक प्रशिक्षित ड्रोन उद्यमी एक पंचायत या आसपास के कई गांवों में सैकड़ों किसानों को ड्रोन आधारित सेवाएं प्रदान कर सकेगा।
NEED: स्किल ट्रेनिंग से सीधे एंटरप्राइज बनाने की पहल
NSDC की NEED पहल का उद्देश्य प्रशिक्षित और इच्छुक युवाओं को टिकाऊ उद्यमों में बदलना है। इसके तहत तकनीकी प्रशिक्षण के साथ बिजनेस प्लानिंग, वित्त, टेक्नोलॉजी सपोर्ट, बाजार से जुड़ाव, मेंटरशिप और लंबे समय तक उद्यम संचालन में सहायता देने का मॉडल अपनाया गया है। यह पहल 1 मई 2026 को जयपुर के बिड़ला ऑडिटोरियम में शुरू की गई थी।
₹1.85 लाख करोड़ का अनुमानित बाजार अवसर
AVPL के अनुमान के अनुसार, ड्रोन और कृषि सेवाओं से जुड़ा एकीकृत बाजार अवसर करीब ₹1.85 लाख करोड़ का हो सकता है। इसमें लगभग ₹25,000 करोड़ का कृषि ड्रोन किट बाजार, ₹60,000 करोड़ का वार्षिक ड्रोन-एज-ए-सर्विस बाजार और ₹1 लाख करोड़ का वार्षिक कृषि इनपुट कारोबार शामिल है।
बैटरी, स्पेयर पार्ट्स, वार्षिक रखरखाव, सॉफ्टवेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्रॉप एनालिटिक्स, ट्रेनिंग, फाइनेंस, बीमा, सरकारी परियोजनाओं और निर्यात में भी बड़े अवसर पैदा हो सकते हैं।
हिसार में बन रही ‘Drone City Haryana’
AVPL हरियाणा के हिसार जिले के हांसी के सिसाई में 11.5 एकड़ के परिसर में ‘Drone City Haryana’ विकसित कर रहा है। करीब ₹80 करोड़ की प्रस्तावित परियोजना को हरियाणा एंटरप्राइज एंड एम्प्लॉयमेंट पॉलिसी, 2020 के तहत ₹58.51 करोड़ की स्वीकृत प्रोत्साहन सहायता मिली है। यह केंद्र ड्रोन निर्माण, कंपोनेंट उत्पादन, रिसर्च, प्रोडक्ट टेस्टिंग, प्रशिक्षण, स्किलिंग, इनोवेशन, उद्यमिता, मरम्मत और निर्यात आधारित विकास के लिए सहयोगी प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जा रहा है।
ड्रोन कंपनियों, बैंकों और टेक्नोलॉजी संस्थानों को जोड़ने की तैयारी
योग्य ड्रोन OEMs, कंपोनेंट निर्माताओं, सॉफ्टवेयर कंपनियों, शोध संस्थानों, बैंकों, NBFCs और टेक्नोलॉजी पार्टनर्स को इस पहल से जोड़ने की योजना भी बनाई जा रही है।इसका उद्देश्य केवल ड्रोन बेचने का बाजार बनाना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन आधारित सेवाओं, प्रशिक्षण और उद्यमिता का एक व्यापक इकोसिस्टम तैयार करना है।
‘2 लाख Drone Udyamis से पूरी इंडस्ट्री को मिलेगा फायदा’
डॉ. दीप सिहाग सिसई के अनुसार, जब 2 लाख Drone Udyamis काम करना शुरू करेंगे, तो इससे ड्रोन, बैटरी, कंपोनेंट, सॉफ्टवेयर, ट्रेनिंग, मेंटेनेंस, वित्तीय सेवाओं और कृषि इनपुट की मांग बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि यह मिशन केवल एक कंपनी के लिए नहीं, बल्कि पूरे ड्रोन उद्योग के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है।
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