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Sahyadri Farms: सीधे ग्राहकों तक पहुंचेगा किसानों का उत्पाद, सह्याद्री फार्म्स लॉन्च करेगी अपना ब्रांड

गांव जंक्शन डेस्क, दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 06 Jun 2026 02:40 PM IST
सार

सह्याद्री फार्म्स ने बी2सी कारोबार के लिए फिलहाल सीमित लेकिन दीर्घकालिक लक्ष्य तय किए हैं। कंपनी को उम्मीद है कि अगले तीन वर्षों में कुल राजस्व का कम से कम 10 फीसदी हिस्सा बी2सी कारोबार से आएगा। वहीं, अगले 10 वर्षों में यह हिस्सा बढ़कर 30 फीसदी तक पहुंच सकता है।
 

नैनीताल जिले के किसान विजय पांडे
नैनीताल जिले के किसान विजय पांडे - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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देश के सबसे सफल किसान उत्पादक संगठनों (FPO) में शामिल महाराष्ट्र की सह्याद्री फार्म्स (Sahyadri Farms) अब सीधे उपभोक्ताओं (B2C) तक अपने उत्पाद पहुंचाने की तैयारी कर रही है। कंपनी जल्द ही अपने ब्रांड नाम से प्रोसेस्ड बागवानी उत्पाद बाजार में उतारेगी।

सह्याद्री फार्म्स के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक विलास शिंदे ने बिजनेस लाइन को बताया कि संस्था फिलहाल ताजे फल और सब्जियों की ब्रांडिंग के बजाय प्रोसेस्ड उत्पादों के जरिए घरेलू बाजार में कदम रखेगी। इन उत्पादों की शेल्फ लाइफ अधिक होगी, जिससे उन्हें पूरे देश में आसानी से बेचा जा सकेगा।

देशभर में बिक्री के लिए तैयार हो रही रणनीति
विलास शिंदे के अनुसार, बी2सी कारोबार शुरू करने के लिए एक विशेष टीम तैयार की जा रही है। पिछले तीन वर्षों से कंपनी ने आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) को मजबूत करने पर काम किया है ताकि विभिन्न माध्यमों से देशभर में उत्पादों की पहुंच सुनिश्चित की जा सके।

उन्होंने कहा कि सह्याद्री फार्म्स बागवानी क्षेत्र में अमूल जैसा मॉडल विकसित करना चाहती है। जिस तरह अमूल ने डेयरी क्षेत्र में किसानों को मजबूत बाजार उपलब्ध कराया, उसी तरह सह्याद्री फार्म्स भी किसानों के उत्पादों को बेहतर मूल्य दिलाने की दिशा में काम कर रही है।

2,600 करोड़ रुपये का कारोबार
विलास शिंदे ने बताया कि पिछले 15 वर्षों में संस्था ने बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) मॉडल को मजबूत किया है। वर्तमान में सह्याद्री फार्म्स का कुल कारोबार करीब 2,600 करोड़ रुपये का है, जिसमें से लगभग 1,000 करोड़ रुपये का योगदान B2B कारोबार से आता है।

घरेलू बाजार पर रहेगा फोकस
उन्होंने कहा कि भविष्य में संस्था की वृद्धि का बड़ा आधार भारतीय घरेलू बाजार होगा। भारतीय उपभोक्ता फल और सब्जियों की कीमत और गुणवत्ता को लेकर अपनी अलग सोच रखते हैं। उनके मुताबिक, उपभोक्ताओं की सोच में बदलाव एक दिन में नहीं आता। इसके लिए खाद्य सुरक्षा, उत्पादों की ट्रेसबिलिटी (उत्पाद कहां और कैसे तैयार हुआ) और पारदर्शिता जैसे पहलुओं पर लगातार काम करना होगा।

तीन साल में B2C से 10% राजस्व का लक्ष्य
सह्याद्री फार्म्स ने बी2सी कारोबार के लिए फिलहाल सीमित लेकिन दीर्घकालिक लक्ष्य तय किए हैं। कंपनी को उम्मीद है कि अगले तीन वर्षों में कुल राजस्व का कम से कम 10 फीसदी हिस्सा बी2सी कारोबार से आएगा। वहीं, अगले 10 वर्षों में यह हिस्सा बढ़कर 30 फीसदी तक पहुंच सकता है।

IPO योजना फिलहाल टली
सह्याद्री फार्म्स ने अपनी आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (IPO) की योजना को फिलहाल आगे बढ़ा दिया है। विलास शिंदे के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पादन संबंधी चुनौतियां और वैश्विक संघर्षों की वजह से व्यापार प्रभावित हुआ है, जिसके चलते आईपीओ की प्रक्रिया में देरी हुई।

हालांकि, कंपनी का कहना है कि वित्त वर्ष 2026-27 के नतीजों की समीक्षा के बाद आईपीओ की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू की जाएगी। संस्था को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027-28 की अंतिम तिमाही तक IPO लाया जा सकता है।

किसानों के लिए क्या है महत्व?
सह्याद्री फार्म्स का यह कदम किसानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि एफपीओ सीधे उपभोक्ताओं तक अपने ब्रांड के जरिए उत्पाद पहुंचाने में सफल होते हैं, तो इससे किसानों को बेहतर कीमत मिलने, बिचौलियों पर निर्भरता घटने और मूल्य संवर्धित उत्पादों से अधिक आय अर्जित करने का अवसर मिल सकता है।
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