विज्ञापन
Home› Sair Sapata› Tour Shergaon Hidden Paradise Of Arunachal Pradesh Where Unique Confluence Of Nature Peace And Culture

सैर सपाटा : अरुणाचल प्रदेश का छुपा स्वर्ग शेरगांव... जहां प्रकृति, शांति और संस्कृति का अनोखा संगम

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sun, 29 Mar 2026 05:38 PM IST
सार

घने जंगलों, बादलों से ढकी पहाड़ियों और शांत बौद्ध मठों से घिरे शेरगांव में शोर-शराबा नहीं, बल्कि सादगी और अपनापन है। यह गांव अपने प्राकृतिक सौंदर्य, शांत वातावरण और स्थानीय संस्कृति के माध्यम से यात्रियों के दिलों में बस जाता है। 
 

जंगल, गोम्पा और संस्कृति के बीच बसा शांत शेरगांव
जंगल, गोम्पा और संस्कृति के बीच बसा शांत शेरगांव - फोटो : गांव जंक्शन
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले में बसा शेरगांव उन यात्रियों के लिए किसी गुप्त रत्न से कम नहीं, जो भीड़-भाड़ से दूर प्रकृति, आध्यात्म और स्थानीय संस्कृति को एक साथ महसूस करना चाहते हैं। गांव की पहचान उसके जेंगबू गोम्पा से शुरू होती है। गांव से थोड़ी ऊंचाई पर स्थित यह लगभग 200 वर्ष पुराना बौद्ध मठ घने जंगल के बीच शांति का प्रतीक है। 

स्थानीय लोग इस गोम्पा की देखरेख पूरे समर्पण से करते हैं और आसपास के वन क्षेत्र को भी सामूहिक रूप से संरक्षित रखते हैं। यहां आने वाले यात्री श्रद्धा से मोमबत्ती जलाते हैं और कुछ पल ध्यान में बिताते हैं। हवा में घुली प्रार्थनाओं की गूंज और देवदार के पेड़ों की खुशबू मन को सहज ही स्थिर कर देती है।

आकर्षक है बोमडिला मठ
शेरगांव के आसपास का एक और प्रमुख आकर्षण है बोमडिला मठ। वर्ष 1965 में स्थापित यह मठ तिब्बत के त्सोना गोन्त्से मठ की प्रतिकृति माना जाता है और महायान बौद्ध परंपरा का अनुसरण करता है। भिक्षुओं और लामाओं का यह निवास स्थान तीन हिस्सों- ऊपरी, मध्य और निचले गोम्पा में बंटा है। विशाल प्रार्थना कक्ष, बौद्ध मंदिर और पहाड़ियों से दिखता विस्तृत दृश्य यहां आने वाले हर यात्री को एक गहरी आध्यात्मिक अनुभूति देता है।

रोमांचक खोज जैसा है जलप्रपात 
प्रकृति प्रेमियों और रोमांच के शौकीनों के लिए शेरगांव का चोस्कोरोंग जलप्रपात किसी रोमांचक खोज जैसा है। वैली व्यू इंग्लिश मीडियम स्कूल से लगभग 1.5 किलोमीटर दूर स्थित यह जलप्रपात अभी भी अपेक्षाकृत कम जाना-पहचाना है। अंतिम 150 मीटर का ट्रेक थोड़ा चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन जैसे ही खड़ी चट्टान से गिरता दूधिया पानी सामने आता है, सारी थकान गायब हो जाती है। घने पत्तों से घिरा यह स्थान शांति और ताजगी से भर देता है।

ईगलनेस्ट वन्यजीव अभयारण्य
आप पक्षी प्रेमी हैं, तो ईगलनेस्ट वन्यजीव अभयारण्य आपके लिए स्वर्ग है। भारतीय सेना की रेड ईगल डिवीजन से प्रेरित नाम वाला यह अभयारण्य सेसा ऑर्किड अभयारण्य और पाखुई टाइगर रिजर्व से घिरा हुआ है। यहां लगभग 700 प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं, जिनमें दुर्लभ बुगुन लिओसिचला, वार्ड्स ट्रोगन और वेज-बिल्ड बैबलर जैसे नाम शामिल हैं। रंग-बिरंगी वनस्पतियां और जीवंत वन्यजीव इस इलाके को और भी खास बनाते हैं।

शेरडुकपेन जनजाति का घर
शेरगांव की आत्मा उसकी स्थानीय संस्कृति में बसती है। यह गांव शेरडुकपेन जनजाति का घर है, जिनकी जीवनशैली कृषि, शिकार और पारंपरिक मछली पकड़ने से जुड़ी है। शेरडुकपेन भाषा तिब्बती-बर्मी भाषाओं से जुड़ी मानी जाती है। 

पुरुष रेशमी बिना आस्तीन के वस्त्र, याक के बालों से बनी गुरदम टोपी और पारंपरिक तिब्बती तलवार धारण करते हैं, जबकि महिलाएं कढ़ाईदार जैकेट और खूबसूरती से बुने गए वस्त्र पहनती हैं। उनका पहनावा और जीवनशैली आज भी परंपरा से गहराई से जुड़ी हुई है।

खान-पान और ठहराव
खान-पान की बात करें तो शेरगांव में सादगी के साथ स्वाद का अनोखा मेल देखने को मिलता है। सेइंथुक किचन अपने प्रामाणिक स्थानीय व्यंजनों, घरेलू माहौल और देर रात तक चलने वाले संगीत के लिए जाना जाता है। वहीं फूड हट में मिलने वाला थुकपा और थेनथुक ठंडे मौसम में खास तौर पर याद रह जाता है। 

शेरगांव को सही मायनों में समझने के लिए होमस्टे में ठहरना सबसे बेहतर विकल्प है। रेड बेरी रिवरव्यू हेरिटेज होमस्टे, योंगी रिट्रीट और ट्यूलिप वैली होमस्टे जैसे विकल्प न सिर्फ आराम देते हैं, बल्कि स्थानीय जीवन को करीब से देखने का मौका भी देते हैं।

पहुंचना है आसान
शेरगांव पहुंचना भी अपेक्षाकृत आसान है। निकटतम हवाई अड्डा तेजपुर है, जो लगभग 70 किलोमीटर दूर है। रेलवे से आने वाले यात्रियों के लिए आसन सबसे नजदीकी स्टेशन है, जबकि गुवाहाटी से टैक्सी द्वारा सड़क मार्ग सबसे सुविधाजनक माना जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन