विज्ञापन
Home› Sair Sapata› Agricultural Tourism Is Creating New Income Opportunities For Maharashtra Farmers

बाड़ी से बाजार तक पहुंच हुई आसान: तीन महिलाओं ने बदल दिया खेती का मॉडल, कृषि पर्यटन को बनाया कमाई का जरिया

पंकज जोशी (कृषि पत्रकार), नासिक Published by: Umashankar Mishra Updated Tue, 15 Sep 2026 06:22 PM IST
सार

महाराष्ट्र के गांवों में खेती अब सिर्फ फसल बेचने तक सीमित नहीं है। किसान जमीन, स्थानीय भोजन और ग्रामीण जीवन को जोड़कर कमाई के नए रास्ते बना रहे हैं, जिसमें कृषि पर्यटन अहम भूमिका निभा रहा है।

नासिक जिले की तीन सहेलियों ने अनूठा कृषि पर्यटन केंद्र शुरू किया है।
नासिक जिले की तीन सहेलियों ने अनूठा कृषि पर्यटन केंद्र शुरू किया है। - फोटो : गांव जंक्शन
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

नासिक जिले के धोंडेगांव में दीपाली टेकवाड़े, स्नेहल और रुपाली तीन सहेलियों ने ‘बहार’ नामक कृषि पर्यटन केंद्र शुरू किया है। एक कमरे और खाली जमीन से शुरू हुई इस पहल में उन्होंने आम, ड्रैगन फ्रूट, अमरूद, गुलाब और मोगरे की खेती शुरू की है।

यहां खेत ही पर्यटन का आकर्षण और बाजार है। आम व ड्रैगन फ्रूट के मौसम में पर्यटक खेत में फसल को देखते व चखते हैं और सीधे खरीदते हैं, जिससे किसान का खेत उत्पादन के साथ ग्राहकों से जुड़ने का केंद्र भी बन गया है।

गुलाब से गुलकंद तक पहुंची यात्रा 
कृषि पर्यटन के इस केंद्र में गुलाब सिर्फ फूल नहीं रहता, उससे गुलकंद बनाया जाता है। यह खेती और मूल्यवर्धन के रिश्ते को दिखाता है। किसान अगर गुलाब को गुलकंद जैसे नए उत्पाद में बदले, तो पर्यटक तैयार माल खरीदकर घर ले जा सकता है।

यहां रुद्राक्ष, देसी गुलाब, चाफा, सोनचाफा, बकुल, आम, ड्रैगन फ्रूट और अमरूद जैसे पेड़-पौधे हैं। हर मौसम यहां नया अनुभव लाता है। आम के मौसम में आम, गर्मियों में गुलाब के पत्तों से बना गुलकंद। यही वजह है कि यहां खेती और पर्यटन एक-दूसरे के पूरक हैं। कृषि पर्यटन तभी सफल होता है जब 

खेती केंद्र में रहे और पर्यटन उसका सहारा बने।
ठाणे जिले के नेरल का सगुणा बाग भी महाराष्ट्र में कृषि पर्यटन की पुरानी और चर्चित मिसाल है, जहां कृषि उत्पादों और हस्तनिर्मित वस्तुओं की बड़ी रेंज उपलब्ध रहती है। बहार और सगुणा बाग के तरीकों में फर्क हो सकता है, लेकिन मूल सोच एक ही है - खेती को पर्यटन से जोड़ना।

महाराष्ट्र की कृषि विविधता कृषि पर्यटन को भी अलग रंग देती है। नासिक में अंगूर, आम और अनार लुभाते हैं तो जलगांव में केला, पुणे की जुन्नर तालुका में फलों के बाग, अंगूर की बेल, सब्जियां एवं डेयरी और कोकण में आम, काजू, नारियल तथा धान की खेती इसका आधार बन सकती है।

हर किसान के लिए एक जैसा मॉडल जरूरी नहीं है। किसान की अपनी फसल और संस्कृति ही सबसे बड़ा आकर्षण बन सकती है।

खेतों से सीधे ग्राहकोंं तक सीधा सफर 
कृषि पर्यटन ने परंपरागत मंडियों के समानांतर अब उपज की बिक्री के लिए नया रास्ता खोल दिया है। ग्राहक खेत में आता है, फसल को देखता है, अपनी पसंदीदा उपज को तोड़कर देखता है, चखता है और फिर कुछ खरीदता है। साथ ही, प्रसंस्कृत उत्पाद भी अपने साथ ले जाता है। इससे किसान को जहां कमाई होती है, वहीं उसे अपने उत्पाद के बारे में ग्राहक का फीडबैक भी तुरंत मिल जाता है। 

गांवों में खुली रोजगार की नई राह
कृषि पर्यटन केंद्र बढ़ने से किसान के अलावा खाना बनाने, सफाई और देखभाल जैसे कामों में स्थानीय लोगों, खासकर महिलाओं को रोजगार मिलता है। बहार की तीन महिलाओं ने अपने लिए कारोबार खड़ा करने के साथ आसपास के लोगों के रोजगार भी पैदा किया है।

बहार के शुरुआती चार महीने ग्राहक के इंतजार में बीते, लेकिन तीनों ने हिम्मत नहीं हारी। धीरे-धीरे महिला समूह, स्कूल और परिवार आने लगे। सोशल मीडिया और मशहूर मिसाल नाश्ते ने पहचान बनाई, और संतुष्ट ग्राहकों के अनुभवों ने इस केंद्र को दूसरों तक पहुंचाया। 

गांव की संस्कृति और देसी स्वाद
पोहा, मिसल, शिरा, पिठलं-भाकरी, ठेचा जैसे देसी व्यंजनों के साथ यहां मौसमी पकवान बनाए जाते हैं, जिससे स्थानीय खाने को बाजार मिलता है और पर्यटक को गांव का असली स्वाद मिलता है। कृषि पर्यटन केंद्र शहरी बच्चों को मिट्टी, पौधों और फसल से जोड़ते हैं।

गाय-बछड़ों के साथ समय बिताना और बैलगाड़ी की सैर बच्चों को गांव से जोड़ने का काम करती है। महाराष्ट्र की कृषि पर्यटन नीति खेती को मुख्य और पर्यटन को सहायक व्यवसाय मानती है। संशोधित नीति में कृषि पर्यटन केंद्रों को उपज सीधे पर्यटकों को बेचने की अनुमति है, जिससे किसान को वैकल्पिक बाजार मिलता है।

(यह स्टोरी मूल रूप से गांव जंक्शन पत्रिका के सितंबर 2026 अंक में प्रकाशित की गई है) 
विज्ञापन
विज्ञापन