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त्योहारी सीजन में खाद्य तेल का गणित : पूड़ी, कचौड़ी और अचार के लिए अलग तेल क्यों बेहतर, कैसे चुनें सही तेल

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Wed, 07 Oct 2026 05:33 PM IST
सार

दिवाली के दौरान पूड़ी, कचौड़ी, पकौड़े और दूसरी तली हुई चीजों के कारण घर में तेल की खपत बढ़ जाती है। विशेषज्ञ सलाह के अनुसार, अलग-अलग पकवानों के लिए तेल का चुनाव उसके स्वाद और पकाने के तरीके के आधार पर किया जा सकता है। तेल को बार-बार गर्म करने से बचना और संतुलित मात्रा में इस्तेमाल करना भी जरूरी है।

ना पकाने के लिए तेल चुनते समय उसके स्वाद, इस्तेमाल और पकाने के तापमान को ध्यान में रखना उपयोगी हो सकता है।
ना पकाने के लिए तेल चुनते समय उसके स्वाद, इस्तेमाल और पकाने के तापमान को ध्यान में रखना उपयोगी हो सकता है। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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दिवाली नजदीक आते ही घरों में पूड़ी, कचौड़ी, पकौड़े, चकली, सेव, मठरी और दूसरी पारंपरिक चीजें बनाने की तैयारी शुरू हो जाती है। ऐसे में रसोई में इस्तेमाल होने वाले तेल की मात्रा भी सामान्य दिनों के मुकाबले बढ़ जाती है। खाना पकाने के लिए तेल चुनते समय उसके स्वाद, इस्तेमाल और पकाने के तापमान को ध्यान में रखना उपयोगी हो सकता है। मूंगफली, सरसों और सूरजमुखी जैसे तेल अलग-अलग तरह के व्यंजनों में इस्तेमाल किए जाते हैं।

तलने के लिए मूंगफली तेल
मूंगफली का तेल अपेक्षाकृत हल्के स्वाद वाला होता है और कई तरह के तले हुए व्यंजनों में इस्तेमाल किया जाता है। पूड़ी, कचौड़ी, समोसा, पकौड़े, चकली, सेव और मठरी जैसे व्यंजनों के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। गहरी कड़ाही में तलने के दौरान तेल का तापमान बहुत कम होने पर खाद्य पदार्थ अधिक तेल सोख सकते हैं, जबकि अत्यधिक तापमान पर बाहर की परत जल्दी जल सकती है।

अचार और क्षेत्रीय व्यंजनों में सरसों तेल
सरसों का तेल अपने तेज और विशिष्ट स्वाद के कारण अचार तथा कई क्षेत्रीय व्यंजनों में प्रमुखता से इस्तेमाल होता है। सरसों का साग, कुछ सब्जियों और उत्तर तथा पूर्वी भारत के कई पारंपरिक व्यंजनों में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।

रोजमर्रा के लिए सूरजमुखी तेल
सूरजमुखी तेल का स्वाद अपेक्षाकृत हल्का होता है। इसका इस्तेमाल दाल, सब्जी, पराठे और सामान्य खाना पकाने में किया जा सकता है। हल्के स्वाद वाले व्यंजनों के लिए यह विकल्प उपयोगी हो सकता है।

तलने के तेल को बार-बार गर्म न करें
तेल को बार-बार गर्म करने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। लंबे समय तक या बार-बार इस्तेमाल किए गए तेल में ऐसे यौगिक बन सकते हैं जो स्वास्थ्य के लिए उचित नहीं माने जाते। अगर तेल का रंग बहुत गहरा हो जाए, तेज गंध आने लगे, झाग बनने लगे या कम तापमान पर धुआं निकलने लगे तो उसे दोबारा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इस्तेमाल किए हुए तेल को नाली में डालने से भी बचना चाहिए।

दिवाली में तेल की खपत बढ़ सकती है
तली हुई कई तरह की चीजें बनाने वाले परिवारों में दिवाली के दौरान तेल की खपत सामान्य दिनों से काफी अधिक हो सकती है। कई तरह के स्नैक्स बनाने पर एक परिवार को केवल तलने के लिए कई लीटर तेल की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, जरूरत से ज्यादा तेल खरीदने के बजाय व्यंजनों और परिवार की जरूरत के अनुसार मात्रा तय करना बेहतर है।

संतुलित मात्रा में इस्तेमाल जरूरी
भारतीयों के लिए 2024 में जारी ICMR-NIN के आहार संबंधी दिशा-निर्देशों में कुल वसा के सेवन को सीमित रखने और अलग-अलग स्रोतों से वसा लेने पर जोर दिया गया है। दिवाली के दौरान तली हुई चीजों की मात्रा बढ़ने के कारण भोजन में सब्जियों, सलाद और फाइबर वाले खाद्य पदार्थों को भी शामिल करना उपयोगी है। 
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