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न सड़क, न जमीन… : पानी पर तैरता है पूरा गांव, मणिपुर की लोकटक झील में बसी अनोखी दुनिया

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sun, 18 Oct 2026 03:17 PM IST
सार

मणिपुर के विष्णुपुर जिले का चंपू खंगपोक अपनी अनोखी पहचान के लिए जाना जाता है। इसे ‘फ्लोटिंग विलेज’ कहा जाता है। यहां की जमीन असल में ठोस नहीं, बल्कि पानी पर तैरने वाली ‘फुमदी’ है। 
 

मणिपुर की लोकटक झील में बसी अनोखी दुनिया
मणिपुर की लोकटक झील में बसी अनोखी दुनिया - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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क्या आपने कभी ऐसे गांव की कल्पना की है, जहां जमीन के बजाय पानी दिखाई देता हो, घर बांस से बने हों और आने-जाने के लिए सड़क नहीं, बल्कि नाव का सहारा लेना पड़ता हो? जहां बच्चों की पढ़ाई से लेकर लोगों के रोजगार तक, जिंदगी का हर हिस्सा झील से जुड़ा हो। सुनने में यह किसी फिल्म की कहानी लग सकती है, लेकिन मणिपुर की लोकटक झील पर ऐसी अनोखी दुनिया वास्तव में मौजूद है।

मणिपुर के विष्णुपुर जिले में स्थित चंपू खंगपोक को तैरता हुआ गांव यानी ‘फ्लोटिंग विलेज’ कहा जाता है। यह गांव लोकतक झील में तैरती वनस्पतियों की मोटी परतों पर बसा है, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘फुमदी’ कहा जाता है। यहां घूमने पहुंचने वाले पर्यटकों के लिए यह जगह प्रकृति, रोमांच और स्थानीय जीवन का अनोखा अनुभव देती है।

जमीन नहीं, पानी पर तैरती है बस्ती
पहली नजर में चंपू खंगपोक की जमीन किसी सामान्य गांव जैसी ही दिखाई दे सकती है। लेकिन जैसे ही आप फुमदी के बारे में जानेंगे, यह जगह और भी दिलचस्प लगने लगेगी। फुमदी मिट्टी, घास, जलीय पौधों और दूसरे जैविक पदार्थों के लंबे समय तक जमा होने और सड़ने-गलने से बनी मोटी परत होती है।

समय के साथ यह परत इतनी घनी हो जाती है कि पानी पर तैरते हुए छोटे द्वीप जैसा रूप ले लेती है। इसी परत पर यहां लोगों ने अपने घर और दूसरी जरूरत की जगहें बनाई हैं। लोकटक झील का पानी बढ़ने या घटने के साथ फुमदी की स्थिति भी बदल सकती है। हवा और पानी के बहाव के कारण इनमें हलचल होती रहती है।

बांस के घर और नाव से सफर
चंपू खंगपोक में रहने वाले लोगों ने अपनी जरूरतों के अनुसार जीवन जीने का अनोखा तरीका विकसित किया है। यहां बांस से बने घर और झोपड़ियां देखने को मिलती हैं। गांव में एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए नाव सबसे जरूरी साधन है। सुबह होते ही नावें झील में चलती दिखाई देती हैं। यहां मछली पकड़ना और मछली पालन लोगों की आजीविका का प्रमुख साधन है। झील उनके लिए सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि रोजगार और परिवहन का आधार भी है।

पानी के बीच स्कूल और सामुदायिक जीवन
यह तैरता हुआ गांव केवल घरों का समूह नहीं है। यहां रहने वाले लोगों ने अपनी जरूरतों के अनुसार सामुदायिक सुविधाएं भी विकसित की हैं। बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल और सामाजिक गतिविधियों के लिए कम्युनिटी हॉल जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। आधुनिक सुविधाएं भी धीरे-धीरे यहां पहुंच रही हैं। बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए कई जगहों पर सौर ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाता है। इससे पता चलता है कि पानी के बीच रहने वाले लोग परंपरा और आधुनिकता के बीच अपना रास्ता बना रहे हैं।

लोकटक झील का सबसे बड़ा आकर्षण
चंपू खंगपोक की यात्रा पर निकलें तो लोकटक  झील का अनुभव अपने आप में यादगार होता है। यह झील पूर्वोत्तर भारत की महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों में शामिल है। इसी क्षेत्र में कीबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान भी स्थित है, जिसे दुनिया का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान माना जाता है। यह पार्क भी फुमदी की मोटी परतों पर स्थित है। यहां मणिपुर का प्रसिद्ध और दुर्लभ संगई हिरण पाया जाता है। इसे ‘डांसिंग डियर’ यानी नाचता हुआ हिरण भी कहा जाता है। संगई मणिपुर की प्राकृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

कब और कैसे पहुंचे?
अगर आप लोकटक झील और आसपास के तैरते गांवों की यात्रा करना चाहते हैं तो मानसून के बाद का समय अच्छा विकल्प हो सकता है। हवाई यात्रा से मणिपुर पहुंचने के लिए इम्फाल का बीर टिकेंद्रजीत अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा प्रमुख विकल्प है। इम्फाल से सड़क मार्ग के जरिए मोइरांग या थांगा की ओर जाया जा सकता है। 
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