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Dussehra Special 10 Traditional Indian Sweets And Foods To Savour On Vijayadashami
दशहरा की थाली में भारत की परंपराओं का स्वाद : रसोई से रिवाज तक रची परंपरा की मिठास, विजयदशमी के 10 खास पकवान
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Umashankar Mishra
Updated Tue, 20 Oct 2026 12:22 PM IST
सार
जलेबी की चाशनी, पूरन पोली का घी, पायसम की मलाईदार मिठास, सुंदल की सादगी और रसगुल्ले का रस - हर पकवान अपने क्षेत्र की संस्कृति और रसोई की कहानी कहता है। इनमें कुछ विजयादशमी या दुर्गा पूजा से जुड़े हैं, जबकि कुछ दूसरे त्योहारों में अधिक प्रचलित हैं और शुभ अवसरों पर भी बनाए जाते हैं।
दशहरे का असली आनंद देश के विभिन्न हिस्सों में बनने वाले विविधता में छिपा है।
- फोटो : एआई
दशहरे का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश लेकर आता है। रावण दहन, मेले, पूजा-पाठ और अपनों से मिलने-जुलने के बीच इस पर्व का एक रंग रसोई से भी जुड़ता है। कहीं चाशनी में डूबी जलेबी उत्सव की मिठास बढ़ाती है, तो कहीं घी की खुशबू से महकती पूरन पोली घर-आंगन में त्योहार का उल्लास घोल देती है। देश के अलग-अलग हिस्सों में पकवानों के नाम और स्वाद भले बदल जाएं, लेकिन उनके साथ जुड़ी परंपराएं और अपनापन एक-सा रहता है।
विजयादशमी का उत्सव नवरात्र और दुर्गा पूजा से भी जुड़ा है। इन दिनों कई घरों में विशेष भोग बनते हैं, मेहमानों का स्वागत पकवानों से होता है और परिवार एक साथ बैठकर त्योहार का आनंद लेता है। आइए, देश के अलग-अलग हिस्सों के ऐसे दस पारंपरिक पकवानों और मिठाइयों से परिचित हों, जो उत्सवी स्वादों की इस थाली को खास बनाते हैं।
दशहरे के मेले में जलेबी की खुशबू और मिठास उत्सव की यादों का हिस्सा बन जाती है।
- फोटो : एआई
1. जलेबी : चाशनी में घुला उत्सव का रंग
उत्तर भारत के मेलों और त्योहारों में जलेबी का अपना अलग आकर्षण है। घोल को गर्म तेल या घी में गोल-गोल आकार देकर तला जाता है और फिर चाशनी में डुबोया जाता है। बाहर से हल्की कुरकुरी और भीतर से रस से भरी जलेबी गरमागरम मिले, तो त्योहार का आनंद दोगुना हो जाता है। दशहरे के मेले में इसकी खुशबू और मिठास उत्सव की यादों का हिस्सा बन जाती है।
गेहूं के आटे की पतली रोटी के भीतर चने की दाल और गुड़ से तैयार मीठी भरावन रखकर पूरन पोली बनाते हैं।
- फोटो : एआई
2. पूरन पोली : घी की खुशबू में रची परंपरा
महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में पूरन पोली खास मौकों पर बनाई जाती है। गेहूं के आटे की पतली रोटी के भीतर चने की दाल और गुड़ से तैयार मीठी भरावन रखी जाती है। इलायची इसकी सुगंध बढ़ाती है और ऊपर से लगा घी स्वाद को और निखार देता है। होली और गुड़ी पड़वा जैसे त्योहारों पर भी बनने वाला यह पकवान घर की रसोई में पीढ़ियों से चली आ रही पाक-परंपरा की याद दिलाता है।
दक्षिण भारत में पायसम धार्मिक अनुष्ठानों और उत्सवी भोज का प्रिय हिस्सा है।
- फोटो : एआई
3. पायसम: दक्षिण भारत की मीठी सौगात
दक्षिण भारत में पायसम धार्मिक अनुष्ठानों और उत्सवी भोज का प्रिय हिस्सा है। इसे चावल, सेवई या दाल से बनाया जा सकता है। दूध या नारियल के दूध में पकाकर इसमें चीनी अथवा गुड़ मिलाया जाता है। कहीं इसका स्वाद हल्का और मलाईदार होता है, तो कहीं गुड़ और नारियल की सुगंध इसे अलग पहचान देती है। त्योहार के भोजन में पायसम मिठास के साथ श्रद्धा का भाव भी जोड़ता है।
तमिलनाडु में नवरात्र के दौरान सुंदल बनाने और बांटने की परंपरा खास तौर पर दिखाई देती है।
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4. सुंदल: सादगी में स्वाद, भोग में अपनापन
तमिलनाडु में नवरात्र के दौरान सुंदल बनाने और बांटने की परंपरा खास तौर पर दिखाई देती है। उबले चने या दूसरी फलियों में कसा हुआ नारियल, मसाले और करी पत्ते मिलाकर यह स्वादिष्ट पकवान तैयार किया जाता है। इसे पूजा में अर्पित करने और आने वाले मेहमानों में बांटने का चलन भी है। सुंदल बताता है कि उत्सव का स्वाद हमेशा मिठाइयों में ही नहीं, सादगी से बने पौष्टिक पकवानों में भी मिलता है।
रसगुल्ला बंगाल की प्रसिद्ध मिठाइयों में से एक है।
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5. रसगुल्ला: बंगाल की मिठास और आत्मीयता
पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा का समापन विजयादशमी के साथ होता है। इस अवसर पर परिवार और परिचित एक-दूसरे से मिलते हैं, शुभकामनाएं देते हैं और मिठाइयों के साथ खुशियां बांटते हैं। रसगुल्ला बंगाल की प्रसिद्ध मिठाइयों में से एक है। छेना से बने मुलायम गोलों को चाशनी में पकाया जाता है, जिससे वे रस से भर जाते हैं। इसकी कोमल बनावट और हल्की मिठास उत्सव की थाली को खास बना देती है।
पकते दूध में चावल की खुशबू घुलती है, तो इलायची, मेवे और किशमिश खीर का स्वाद और बढ़ा देते हैं।
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6. खीर: हर घर की अपनी मिठास
चावल, दूध और चीनी से धीमी आंच पर तैयार होने वाली खीर भारतीय घरों की सबसे परिचित पारंपरिक मिठाइयों में है। पकते दूध में चावल की खुशबू घुलती है, तो इलायची, मेवे और किशमिश इसका स्वाद और बढ़ा देते हैं। कहीं इसे गर्म परोसा जाता है, तो कहीं ठंडा करके। पूजा के भोग से लेकर पारिवारिक भोज तक, खीर हर मौके पर अपनापन और उत्सव की मिठास लेकर आती है।
कर्नाटक की पहचान से जुड़ी मैसूर पाक मिठाई बेसन, चीनी और घी से तैयार होती है।
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7. मैसूर पाक: घी में पका दक्षिण का खास स्वाद
कर्नाटक की पहचान से जुड़ी मैसूर पाक मिठाई बेसन, चीनी और घी से तैयार होती है। इसकी बनावट बनाने के तरीके के अनुसार मुलायम से लेकर हल्की भुरभुरी तक हो सकती है। घी की समृद्ध खुशबू और बेसन का स्वाद इसे दूसरी मिठाइयों से अलग पहचान देते हैं। त्योहारों, पारिवारिक समारोहों और खास अवसरों पर परोसी जाने वाली मैसूर पाक दक्षिण भारत की पारंपरिक मिठास का एक लोकप्रिय उदाहरण है।
बंगाल में त्योहारों के भोजन की बात हो और लूची-आलूर दम का जिक्र न आए, ऐसा कम ही होता है।
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8. लूची और आलूर दम: बंगाल की उत्सवी जोड़ी
बंगाल में त्योहारों के भोजन की बात हो और लूची-आलूर दम का जिक्र न आए, ऐसा कम ही होता है। मैदे से बनी लूची गर्म तेल में तलने पर फूलकर हल्की और नरम हो जाती है। इसके साथ मसालों में पका आलू का गाढ़ा व्यंजन, आलूर दम, परोसा जाता है। दुर्गा पूजा और पारिवारिक आयोजनों में पसंद की जाने वाली यह जोड़ी बताती है कि उत्सव का आनंद केवल मीठे पकवानों में नहीं, नमकीन और मसालेदार स्वादों में भी छिपा है।
तमिलनाडु का चक्करै पोंगल चावल, मूंग दाल, गुड़ और घी से बनाया जाने वाला मीठा पकवान है।
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9. चक्करै पोंगल: गुड़, चावल और घी का मेल
तमिलनाडु का चक्करै पोंगल चावल, मूंग दाल, गुड़ और घी से बनाया जाने वाला मीठा पकवान है। इसमें काजू और दूसरी सामग्री भी मिलाई जा सकती है। यह खास तौर पर पोंगल पर्व से जुड़ा है और पूजा-पाठ तथा अन्य शुभ अवसरों पर भी बनाया जाता है। गुड़ की मिठास और घी की सुगंध इसे विशिष्ट स्वाद देती है। चक्करै पोंगल दक्षिण भारत की उस परंपरा का हिस्सा है, जिसमें भोजन के जरिए प्रकृति और समृद्धि के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है।
मालपुआ देश के कई हिस्सों में त्योहारों और खास अवसरों पर बनाया जाता है।
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10. मालपुआ: त्योहार की थाली में मीठी परत
मालपुआ देश के कई हिस्सों में त्योहारों और खास अवसरों पर बनाया जाता है। आटे के घोल में दूध और कभी-कभी मसला हुआ केला मिलाकर इसे तैयार किया जाता है। फिर छोटे पुए तलकर चाशनी में डुबोए जाते हैं या मीठे रूप में परोसे जाते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में इसकी विधि और स्वाद बदल जाते हैं। कहीं यह नरम और रसदार होता है, तो कहीं किनारों से कुरकुरा। मालपुआ की यही विविधता भारतीय मिठाइयों की समृद्ध परंपरा को सामने लाती है।
जलेबी की चाशनी, पूरन पोली का घी, पायसम की मलाईदार मिठास, सुंदल की सादगी और रसगुल्ले का रस - हर पकवान अपने क्षेत्र की संस्कृति और रसोई की कहानी कहता है। इनमें कुछ विजयादशमी या दुर्गा पूजा से जुड़े हैं, जबकि कुछ दूसरे त्योहारों में अधिक प्रचलित हैं और शुभ अवसरों पर भी बनाए जाते हैं।
दशहरे का असली आनंद इसी विविधता में है। देश के अलग-अलग हिस्सों में परोसे जाने वाले ये पकवान याद दिलाते हैं कि त्योहार केवल रीति-रिवाजों से नहीं, बल्कि साथ बैठकर भोजन करने, खुशियां बांटने और परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने से भी जीवंत रहते हैं।
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