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Not One But More Than 20 Know The Tastiest Varieties Of Mangoes Grown In The Country Where Can You Get The
Mango Varieties: देशभर में पाई जाने वाली आम की किस्में, जानें कहां मिलता है सबसे बेहतरीन आम?
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Devesh Saraswat
Updated Fri, 20 Jun 2025 04:46 PM IST
सार
देश के अलग-अलग हिस्सों में आम की कई किस्मों का उत्पादन होता है। दक्षिण भारत में उगने वाली आम की किस्मों का स्वाद उत्तर भारत में रहने वाले आम के शौकीनों ने नहीं चखा है। लेकिन आज इस लेख के माध्यम से हम आपकों देश की प्रमुख आमों की किस्मों से मिलाने जा रहे है।
देश के अलग-अलग हिस्सों में उगने वाली बेहतरीन आम की किस्में
- फोटो : गांव जंक्शम
आम को फलों का राजा यूं ही नहीं कहा जाता। आम एक फल से आगे बढ़कर संस्कृति, स्वाद और किस्सों से जुड़ा एक अनुभव है। घर में आम की खुशबु का मतलब बच्चों के लिए गर्मियों की छुट्टियों का पास आना है। वहीं, बड़ों के लिए यह आम का आचार बनाने का सही समय है। देश के अलग-अलग हिस्सों में आम की कई किस्मों का उत्पादन होता है। दक्षिण भारत में उगने वाली कई किस्मों का स्वाद उत्तर भारत में रहने वाले आम के शौकीनों ने नहीं चखा है। लेकिन आज इस लेख के माध्यम से हम आपकों देश की प्रमुख आमों की किस्मों से मिलाने जा रहे है।
हापुस आम
हापुस आम के खाते में कई उपाधि दर्ज हैं। महाराष्ट्र में इसे स्वर्ण आम कहते हैं, तो वहीं इस आम के पास आमों का राजा वाली उपाधि भी है, हो भी क्यों न? सालों से भारतीय आम के निर्यात में हापुस आम का एकतरफा दबदबा रहा है और रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, पालघर, ठाणे और रायगढ़ जिलों में उगने वाले हापुस आम को जीआई टैग से भी नवाजा जा चुका है। आम प्रेमियों की मानें तो रत्नागिरी का हापुस स्वाद में काफी बेहतरीन होता है। इस किस्म का औसत वजन करीब 250 ग्राम हो सकता है। यह किस्म महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश में उगाई जाती है। पूरी तरह पककर तैयार हुए हापुस का रंग चमकीला पीला होता है और छिलके पर हल्का-हल्का लाल रंग दिखाई पड़ता है।
बंगनपल्ली – आंध्र प्रदेश की शान
बंगनपल्ली आम को बेनीशान और सफेदा नाम से भी पुकारा जाता है। 350 से 600 ग्राम वजनी एक बंगनपल्ली आम आपका पेट कई घंटों तक भरकर रख सकता है। यह अपने खट्टे-मीठे स्वाद के लिए जाना जाता है। इस किस्म का उत्पादन आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु में होता है। बेनीशान नाम के बाद भी इस किस्म की सतह पर हल्का दाग दिखाई देता है। आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में उगने वाले बंगनपल्ली को जीआई टैग मिला हुआ है। आमों के निर्यात में इस किस्म का भी एक प्रमुख स्थान है।
बॉम्बे ग्रीन – उत्तर भारत की हरी मिठास
बॉम्बे ग्रीन नाम में बॉम्बे पढ़कर ये मत सोचिए कि यह आम महाराष्ट्र में उगाया जाता है। इस किस्म के प्रमुख उत्पादक राज्यों में बिहार, यूपी, राजस्थान, एमपी और पश्चिम बंगाल का नाम शामिल है। उत्तर भारत में इसे मालदा नाम से भी पहचाना जाता है। एक आम का औसत वजन 350 से 600 ग्राम तक जा सकता है। खट्टा-मीठा स्वाद पसंद करने वाले इस किस्म को काफी पसंद करते हैं। मध्यम आकार वाला यह आम पूरी तरह पककर तैयार होने के बाद भी हरा ही रहता है।
चौसा – बेहतरीन स्वाद का मालिक
बाजार में जून से जुलाई के बीच चौसा आम आसानी से दिखाई पड़ सकता है। पीले रंग वाले इस आम का गूदा बेहद मुलायम और मीठा होता है। इस आम में रेशों की संख्या बहुत कम होती है। बिहार, यूपी, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में उगने वाले इस किस्म का इस्तेमाल आइसक्रीम, मिल्कशेक आदि में किया जा सकता है। वर्तमान में चौसा को जीआई टैग मिलने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
दशहरी – मलीहाबाद की खास पहचान
उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में रहने वाले लोग इस किस्म से भली भांति परिचित हैं। पूर्वी हिस्से के अलावा भी दशहरी किस्म को पसंद करने वाले पूरे उत्तर प्रदेश में रहते हैं। मलीहाबाद और उसके आसपास के इलाकों में उगने वाले दशहरी आम को जीआई टैग प्राप्त है। इसका छिलका गहरे पीले रंग का होता है और गूदा बेहद मुलायम और रेशेदार रहित होता है।
फजली – बंगाल का वजनी आम
फजली आम का आकार काफी बड़ा होता है – 700 ग्राम से लेकर 1.5 किलो तक। यह आम जून-जुलाई में आता है और बिहार, एमपी, पश्चिम बंगाल और हरियाणा में पाया जाता है। इसका आकार तिरछा अंडाकार होता है। मालदा के फजली को जीआई टैग मिला हुआ है।
गुलाबखास – सुगंधित आम
गुलाबखास आम मई से जून तक बाजार में आता है और यह बिहार और पश्चिम बंगाल में उगाया जाता है। इसका वजन 350 से 600 ग्राम तक होता है। इस आम की खासियत इसकी हल्की गुलाबी आभा है, जो इसे दूसरे आमों से अलग बनाने का काम करती है।
हिमसागर – बंगाल का मीठा आम
मालदा के हिमसागर आम को जीआई टैग प्राप्त है। यह आम पीले रंग का और मध्यम आकार का होता है। मई से जून तक इसका सीजन रहता है। इसका स्वाद बेहद मीठा और गूदा पूरी तरह रेशेदार रहित होता है।
केसर – गुजरात की ‘क्वीन ऑफ मैंगोज
एक तरफ हापुस को आमों का राजा कहा जाता है, तो दूसरी और केसर को आम की रानी कहा जाता है। बीते सालों में गुजरात की इस किस्म ने देश के आम निर्यात में तेजी से अपना दर्जा बढ़ाया है। गुजरात के गिर क्षेत्र में उगने वाले केसर आम को जीआई टैग मिला हुआ है। यह आम मई से जून तक उपलब्ध रहता है और गुजरात और महाराष्ट्र में उगाया जाता है। इसका वजन 250 से 300 ग्राम होता है।
किशनभोग – मुर्शिदाबाद की मिठास
किशनभोग आम बिहार और पश्चिम बंगाल में उगाया जाता है। यह आम 300 से 400 ग्राम वजन का होता है और मई-जून में उपलब्ध रहता है। इसका आकार अंडाकार होता है और यह लंबे समय तक खराब नहीं होता।
लंगड़ा – बनारस की विरासत
वाराणसी का लंगड़ा आम जीआई टैग प्राप्त किस्म है। इसका सीजन मई से जुलाई तक होता है और वजन 130 से 200 ग्राम तक होता है। पकने पर भी इसका रंग हल्का हरा रहता है। यह बिहार, यूपी, एमपी, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में उगाया जाता है। इसका स्वाद खट्टा-मीठा होता है। लेकिन, रेशों की भरमार आम का आनंद लेने में रुकावट बन सकता है।
मलगोवा – दक्षिण का आम
मलगोवा आम आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु में उगाया जाता है। इसका वजन 470 ग्राम से अधिक हो सकता है। इसका आकार गोल और रंग पीला होता है, जो पकने पर ऊपर की तरफ गुलाबी हो जाता है। इसका सीजन जुलाई से अगस्त तक रहता है।
नीलम – छोटे आकार में गहरा स्वाद
नीलम आम जून से जुलाई में आता है और इसका वजन करीब 280 ग्राम होता है। इसकी त्वचा हल्के नारंगी रंग की होती है और यह आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, एमपी और तमिलनाडु में उगता है।
पैरी – खट्टा-मीठा संतुलन
पैरी आम अप्रैल से जुलाई तक उपलब्ध रहता है। इसका वजन 150 से 220 ग्राम तक होता है। यह महाराष्ट्र और कर्नाटक में उगाया जाता है। इसका स्वाद हल्का खट्टा-मीठा होता है, जो इसे अन्य आमों से अलग बनाता है।
तोतापुरी – तोते की चोंच जैसा सिरा
तोतापुरी आम का आकार कुछ-कुछ तोते की चोंच जैसा होता है। यह मई से जुलाई में आता है और इसका वजन 500 से 800 ग्राम तक होता है। यह गुजरात, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में उगाया जाता है। इसका स्वाद थोड़ा हल्का और गूदा पूरी तरह रेशेदार रहित होता है।
जरदालु – बिहार की गौरवशाली किस्म
ज़रदालु आम खासतौर पर बिहार में उगाया जाता है और यह मई से जुलाई तक उपलब्ध रहता है। इसका रंग सुनहरा पीला होता है और आकार अंडाकार होता है। इसका वजन 220 से 250 ग्राम तक होता है और इसे GI टैग प्राप्त है।
हर आम की अपनी अलग पहचान है, स्वाद है और एक कहानी है। भारत के कोने-कोने से आने वाले ये आम न सिर्फ स्वाद में बेहतरीन होते हैं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा भी हैं।
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