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Centre S Response In Parliament No Separate Assessment Conducted For Average Income Of Fisherfolk
संसद में केंद्र का जवाब : मछुआरों की औसत आय का नहीं हुआ कोई अलग आकलन, पर उत्पादन-निर्यात में उछाल से बढ़ी कमाई
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Devesh Saraswat
Updated Thu, 19 Mar 2026 06:25 PM IST
सार
संसद में मछुआरों की औसत आय के बारे में जानकारी मांगने पर सरकार ने बताया कि औसत आय का पता लगाने के लिए अलग से कोई गणना नहीं की गई है। हालांकि सरकार ने उत्पादन से लेकर निर्यात तक में हुई बढ़़ोतरी को मछुआरों और मछली पालकों की कमाई में बढ़ोतरी से जोड़ा है। जानिए विस्तार से...
मछुआरों की औसत आय पर सरकार का जवाब।
- फोटो : सोशल मीडिया
संसद में मछुआरों की औसत आय के बारे में जानकारी मांगने पर सरकार ने बताया कि औसत आय का पता लगाने के लिए अलग से कोई गणना नहीं की गई है। हालांकि सरकार ने उत्पादन से लेकर निर्यात तक में हुई बढ़़ोतरी को मछुआरों और मछली पालकों की कमाई में बढ़ोतरी से जोड़ा है।
राज्यसभा में सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने इस बात का ब्यौरा दिया है कि सरकार मछुआरों के लिए क्या-क्या काम कर रही है। केंद्रीय मंत्री के अनुसार, बीते पांच सालों में मछली पालन के विकास के लिए 28,898 करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी दी गई है। इस सरकारी जानकारी के आधार पर आइए आसान भाषा में जानते हैं कि मछुआरों और मत्स्य किसानों को क्या-क्या बड़े फायदे मिल रहे हैं:
5 लाख से ज्यादा मछुआरों के हाथ में केसीसी
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, मछुआरों को अपना काम-धंधा चलाने और रोजमर्रा के पैसों की जरूरत को पूरा करने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा दी जा रही है। अब तक देश के 5 लाख 4 हजार 848 (5,04,848) मछुआरों और मछली पालकों को यह कार्ड दिया जा चुका है, जिसके जरिए उन्हें 3837.80 करोड़ रुपये का लोन बांटा गया है। ताकि, पैसे की तंगी के कारण उनका काम न रुके।
विकास के लिए 28 हजार करोड़ से ज्यादा की मंजूरी
सरकार ने पिछले 5 सालों (2020-21 से 2024-25) में तीन अहम योजनाओं पर सबसे ज्यादा जोर दिया है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 21,274.14 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट पास किए गए हैं। फिशरीज इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत 7623.46 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह योजना के जरिए भी किसानों को मजबूत किया जा रहा है।
मुसीबत में ढाल बना 5 लाख का बीमा और 3000 रुपये की मदद
गरीब और पारंपरिक मछुआरों की भलाई के लिए PMMSY योजना के तहत कई बड़े कदम उठाए गए हैं। हादसे पर 5 लाख का बीमा: 18 से 70 साल के मछुआरों की दुर्घटना में मौत या पूरी तरह विकलांग होने पर 5 लाख रुपये का बीमा कवर मिलता है। अगर शरीर का कोई अंग आंशिक रूप से अपाहिज होता है तो 2.50 लाख रुपये और हादसे के बाद अस्पताल में भर्ती होने पर 25,000 रुपये की मदद दी जाती है।
खाली समय में गुजारा भत्ता: साल के जिस समय समंदर में मछली पकड़ने पर रोक (बैन) होती है, तब गरीब मछुआरा परिवारों को घर चलाने के लिए 3,000 रुपये प्रति मछुआरा आर्थिक मदद दी जाती है। योजना के तहत मछली पकड़ने वाली नाव का बीमा, पुराना जाल और नाव बदलने के साथ-साथ गहरे समंदर में मछली पकड़ने के लिए नई नाव खरीदने या उसे अपग्रेड करने में भी मदद दी जा रही है।
समंदर में सुरक्षा की गारंटी, 1 लाख नावों पर लगेंगे खास ट्रांसपोंडर
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, समंदर की लहरों के बीच मछुआरों की जान की सुरक्षा सरकार के लिए सबसे ज्यादा अहम है। मछुआरों को सुरक्षा किट और ट्रैकिंग डिवाइस तो दिए ही जा रहे हैं, साथ ही 364 करोड़ रुपये की लागत से एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट भी शुरू किया गया है। इसके तहत 1 लाख मछली पकड़ने वाली नावों पर ट्रांसपोंडर लगाए जा रहे हैं। इस खास मशीन की मदद से मछुआरे आपात स्थिति में मैसेज भेज सकेंगे। तूफान आने पर या गलती से समुद्री सीमा पार करने की स्थिति में यह मशीन तुरंत अलर्ट कर देगी।
मछली उत्पादन और निर्यात में आया बंपर उछाल
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार की इन कोशिशों और आधुनिक तरीकों से देश में मछली के उत्पादन और बाहर देशों में इसे बेचने (निर्यात) में जबरदस्त उछाल आया है। साल 2019-20 में जहां देश में 141.64 लाख टन मछली का उत्पादन होता था, वह 2024-25 में बढ़कर 197.75 लाख टन हो गया है। मछलियों का निर्यात भी 46,666 करोड़ रुपये (2019-20) से छलांग लगाकर 62,408 करोड़ रुपये (2024-25) तक पहुंच गया है।
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