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अंडा और चिकन हो सकता है महंगा : फीड लागत बढ़ी तो पोल्ट्री उद्योग ने 25% उत्पादन घटाने का किया फैसला

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Fri, 05 Jun 2026 12:59 PM IST
सार

पोल्ट्री उद्योग ने अचानक 25% उत्पादन घटाने का फैसला किया है। वजह है सोयाबीन खली की कीमतों में एक महीने में 40% से ज्यादा उछाल। उद्योग का दावा है कि फीड लागत बेकाबू हो गई है और कई राज्यों में ब्रीडर पक्षियों की संख्या में कटौती भी शुरू हो चुकी है। यदि हालात नहीं सुधरे तो आने वाले महीनों में चिकन और अंडों की कीमतों पर असर पड़ सकता है। अब सबकी नजर केंद्र सरकार के अगले कदम पर है।

पोल्ट्री उत्पादन घटाने के लिए देशभर में पैरेंट ब्रीडर पक्षियों की संख्या कम की जा रही है।
पोल्ट्री उत्पादन घटाने के लिए देशभर में पैरेंट ब्रीडर पक्षियों की संख्या कम की जा रही है। - फोटो : AI
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विस्तार
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देश में सोयाबीन खली (सोयामील) की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के चलते पोल्ट्री उद्योग ने उत्पादन में 25 प्रतिशत कटौती करने का निर्णय लिया है। उद्योग संगठनों का कहना है कि फीड लागत में भारी वृद्धि के कारण पोल्ट्री उत्पादकों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।

40% से अधिक बढ़े सोयामील के दाम
ऑल इंडिया पोल्ट्री ब्रीडर्स एसोसिएशन (AIPBA) के अध्यक्ष बहादुर अली की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में देश के प्रमुख पोल्ट्री संगठनों ने मौजूदा हालात की समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि पिछले एक महीने के दौरान सोयाबीन खली की कीमतों में 40 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है, जिससे पोल्ट्री फीड की लागत में भारी इजाफा हुआ है।

उत्पादन में तत्काल 25% कटौती
उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि बढ़ती लागत के साथ जुलाई से अक्टूबर के बीच सावन, नवरात्र और दुर्गा पूजा जैसे त्योहारों के दौरान चिकन की मांग में परंपरागत गिरावट भी देखने को मिलती है। इन परिस्थितियों को देखते हुए पोल्ट्री उत्पादन में तत्काल प्रभाव से 25 प्रतिशत कटौती का फैसला लिया गया है।

पैरेंट ब्रीडर स्टॉक में कटौती शुरू
उत्पादन घटाने के लिए देशभर में पैरेंट ब्रीडर पक्षियों की संख्या कम की जा रही है। उद्योग के अनुसार, जो ब्रीडर पक्षी पहले लगभग 140 रुपये प्रति पक्षी बिक रहे थे, उन्हें अब अतिरिक्त स्टॉक कम करने के लिए करीब 65 रुपये प्रति पक्षी के भाव पर बेचा जा रहा है।

जमाखोरी और सट्टेबाजी पर उठाए सवाल
पोल्ट्री उद्योग संगठनों का आरोप है कि सोयाबीन खली की कीमतों में वृद्धि का प्रमुख कारण जमाखोरी और सट्टेबाजी है, जबकि देश में उत्पादन घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त है। उद्योग का कहना है कि नेफेड द्वारा सोयाबीन स्टॉक की बिक्री के दौरान कुछ बड़े कारोबारियों ने सट्टा गतिविधियों के जरिए कीमतों को प्रभावित किया।

सरकार से राहत की मांग
उद्योग संगठनों ने केंद्र सरकार से जीएम (जेनिटिकली मॉडिफाइड) सोयाबीन खली के आयात की अनुमति देने की मांग दोहराई है। उनका मानना है कि इससे फीड लागत में कमी आएगी और पोल्ट्री क्षेत्र को राहत मिलेगी। उद्योग को उम्मीद है कि सरकार जल्द आवश्यक कदम उठाकर किसानों और उत्पादकों को राहत प्रदान करेगी।
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