विज्ञापन
Home› Pashudhan› Poultry› Kolkata Chamber Urges Pm To Act On Maize Shortage Price Volatility For Poultry Sector

Poultry Sector : पोल्ट्री के लिए मक्के की किल्लत और दामों में उछाल पर प्रधानमंत्री से दखल की उठी मांग

गांव जंक्शन डेस्क, कोलकाता Published by: Umashankar Mishra Updated Tue, 03 Nov 2026 08:13 PM IST
सार

कोलकाता के मर्चेंट्स चैंबर ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर पोल्ट्री फीड के लिए मक्के की बार-बार होने वाली कमी और कीमतों में उतार-चढ़ाव पर दखल मांगा है। चैंबर ने इसे ढांचागत समस्या बताया है।

पोल्ट्री फार्मिंग
पोल्ट्री फार्मिंग - फोटो : AI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कोलकाता के मर्चेंट्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एमसीसीआई) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर देश के पोल्ट्री क्षेत्र के लिए मक्के और अन्य जरूरी चारे की "बार-बार होने वाली कमी और कीमतों में उतार-चढ़ाव" में दखल देने का आग्रह किया है। चैंबर का दावा है कि यह ढांचागत समस्या बन चुकी है, जिसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित हस्तक्षेप जरूरी है।

पोल्ट्री से आगे भी पड़ेगा असर
सोमवार को सौंपे ज्ञापन में संगठन ने कहा कि समस्या पोल्ट्री उद्योग तक सीमित नहीं है। इसका असर लाखों पोल्ट्री किसानों और संबद्ध उद्यमों की व्यवहार्यता, मक्का उत्पादकों के आर्थिक हितों, ग्रामीण रोजगार, कृषि ऋण, औद्योगिक निवेश और देश की विदेशी मुद्रा पर भी पड़ता है। चैंबर ने कहा कि इस संकट के लिए "अस्थायी उपायों से अधिक" की जरूरत है, और केंद्र व राज्य सरकारों को मिलकर आपूर्ति संबंधी अड़चनें दूर करनी चाहिए ताकि चारे की उपलब्धता और कीमतें स्थिर रहें।

पोल्ट्री उद्योग ने दी ये चेतावनी
एनमोल फीड्स के प्रबंध निदेशक और एमसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष अमित सराओगी ने कहा है कि कच्चे माल की कमी से पोल्ट्री फीड उद्योग पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने इसके लिए आंशिक रूप से इथेनॉल क्षेत्र की मांग और कम फसल उत्पादन को जिम्मेदार ठहराया।

उनके मुताबिक, "अगले तीन महीनों में पशु प्रोटीन की भारी किल्लत होगी।" फीड की कीमतों में महंगाई 20 प्रतिशत पार कर चुकी है। कच्चे माल की कमी से लागत का दबाव और बढ़ सकता है और पशु प्रोटीन की उपलब्धता व किफायत पर असर पड़ेगा। सराओगी के अनुमान से भारतीय पशु आहार बाजार करीब 10 लाख करोड़ रुपये का है।

एमसीसीआई ने की ये मांग 
एमसीसीआई अध्यक्ष मुनीश जायसवाल ने पत्र में संबंधित मंत्रालयों और राज्य सरकारों के साथ मिलकर कार्य समूह बनाने, हितधारकों से परामर्श करने और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने की इच्छा जताई। चैंबर ने उद्योग की राय, तकनीकी विशेषज्ञता और प्रस्तावित उपायों के क्रियान्वयन पर जमीनी फीडबैक देने की भी पेशकश की।

उसने प्रधानमंत्री से संबंधित विभागों को मुद्दों की जांच कर समयबद्ध कार्रवाई शुरू करने का निर्देश देने का अनुरोध किया। ज्ञापन की प्रतियां वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू समेत अन्य को भी भेजी गई हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन