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Report: इस वित्त वर्ष में 4-6% तक बढ़ेगी मुर्गीपालन क्षेत्र की आय, मुनाफे पर रहेगा दबाव, आंकड़ों से समझें

गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा Published by: Himanshu Mishra Updated Tue, 11 Nov 2025 01:43 PM IST
सार

क्रिसिल ने कहा कि कम मुनाफे के बावजूद कंपनियों की क्रेडिट प्रोफाइल पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। इस वित्त वर्ष में इंटरेस्ट कवरेज रेशियो 3.0-3.2 गुना और लेवरेज अनुपात 1.3 गुना के आसपास स्थिर रहने की संभावना है।

मुर्गीपालन
मुर्गीपालन - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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देश का मुर्गीपालन (Poultry) उद्योग इस वित्त वर्ष में 4 से 6 प्रतिशत तक राजस्व वृद्धि दर्ज कर सकता है। यह वृद्धि ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती मांग, प्रति व्यक्ति मांस उपभोग में वृद्धि और प्रोटीन-समृद्ध आहार की बढ़ती लोकप्रियता से प्रेरित होगी। हालांकि, रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (CRISIL Ratings) के अनुसार, इस साल ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव रहेगा, जो लगभग 80 से 100 बेसिस पॉइंट (bps) तक घट सकता है।

राजस्व बढ़ेगा, लेकिन लाभ घटेगा
क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष की पहली छमाही में ब्रॉयलर (चिकन) की कीमतों में गिरावट के कारण उद्योग की लाभप्रदता पर असर पड़ा है। हालांकि, दूसरी छमाही में कीमतों में सुधार और चारे की लागत में स्थिरता से कुछ राहत मिलेगी। क्रिसिल ने कहा कि मुर्गीपालन कंपनियों की वित्तीय स्थिति स्थिर बनी रहेगी, क्योंकि उद्योग में पूंजीगत व्यय (Capex) सीमित है और कर्ज में भी बड़ी बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। एजेंसी के मुताबिक, उसके द्वारा रेट की गई 34 कंपनियों का संयुक्त राजस्व पिछले वित्त वर्ष में 10,815 करोड़ रुपये रहा था। इनमें से अधिकांश की स्थिति इस साल भी स्थिर रहने की संभावना है।

ब्रॉयलर और अंडा सेगमेंट में अलग-अलग रुझान
पोल्ट्री उद्योग का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा अंडा (लेयर) सेगमेंट से आता है, जबकि 45 प्रतिशत हिस्सा ब्रॉयलर सेगमेंट का है।
  • ब्रॉयलर सेगमेंट: इस वर्ष राजस्व वृद्धि सिर्फ 1-3 प्रतिशत रहने की संभावना है, क्योंकि साल की शुरुआत में थोक कीमतें 20 प्रतिशत गिरकर 110-115 रुपये प्रति किलो रह गईं। इसकी वजह कम गर्मी, जल्दी मानसून और अधिक पक्षी वजन से सप्लाई बढ़ जाना था। त्योहारी सीजन के बाद कीमतों में सुधार जरूर हुआ है, लेकिन पूरे साल औसत कीमतें पिछले वर्ष की तुलना में 4-6 प्रतिशत कम रहने की उम्मीद है।
  • अंडा सेगमेंट: अंडा उद्योग बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। इस सेगमेंट में बिक्री मात्रा 4-6 प्रतिशत बढ़कर 15,750 करोड़ अंडे तक पहुंचने की संभावना है, जबकि कीमतें भी 2-4 प्रतिशत बढ़ सकती हैं। भारत में प्रति व्यक्ति अंडा खपत 102 प्रति वर्ष है, जो वैश्विक औसत 218 से काफी कम है। इसलिए, इस क्षेत्र में आगे भी तेजी से वृद्धि की संभावना बनी हुई है।

चारे की कीमतों में राहत
क्रिसिल के एसोसिएट डायरेक्टर ऋषि हरी ने बताया कि पोल्ट्री उद्योग की कुल लागत में 60-65 प्रतिशत हिस्सा चारे (Feed) का होता है, जिसमें सोया डी-ऑयल्ड केक और मक्का (Maize) का अनुपात 1:2 होता है। इस साल सोया डी-ऑयल्ड केक की कीमत 35-37 रुपये प्रति किलो रहने की उम्मीद है, जो पिछले वर्ष से थोड़ा कम है। मक्का की कीमतें भी 24-25 रुपये प्रति किलो पर स्थिर रह सकती हैं, क्योंकि बुवाई क्षेत्र बढ़ा है और आपूर्ति बेहतर है। कम चारा लागत से कंपनियों की वर्किंग कैपिटल जरूरतें भी नियंत्रित रहेंगी और इन्वेंट्री में भारी बढ़ोतरी की संभावना नहीं होगी।

क्रेडिट आउटलुक स्थिर
क्रिसिल ने कहा कि कम मुनाफे के बावजूद कंपनियों की क्रेडिट प्रोफाइल पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। इस वित्त वर्ष में इंटरेस्ट कवरेज रेशियो 3.0-3.2 गुना और लेवरेज अनुपात 1.3 गुना के आसपास स्थिर रहने की संभावना है। हालांकि, एजेंसी ने चेतावनी दी है कि ब्रॉयलर और अंडे की कीमतों में उतार-चढ़ाव, बर्ड फ्लू जैसी बीमारियां और मांग में कमी जैसे कारक उद्योग के लिए जोखिम बने रहेंगे।
 
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