उत्तर प्रदेश के किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए मंगलवार को सीएम योगी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य पशुधन मिशन को मंजूरी दे दी गई है। सरकार के अनुसार, इस मिशन का मुख्य उद्देश्य पशुपालन को एक संगठित क्षेत्र बनाना और इसे आधुनिक तकनीक, उद्यम और व्यापार से जोड़कर ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। इस मिशन में मुख्य रूप से छोटे और सीमांत किसानों तथा नए उद्यमियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
उन्नत नस्ल की गायों पर मिलेगा सरकारी अनुदान
पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह के अनुसार, उत्तर प्रदेश इस समय देश में सबसे अधिक पशुधन वाला राज्य है और दूध उत्पादन में भी पहले स्थान पर है। राज्य सरकार अब उत्पादकता, बाजार की व्यवस्था और डिजिटल प्रबंधन को इस नए मिशन के जरिए और बेहतर बनाने पर काम कर रही है।
इस योजना के तहत साहीवाल, देसी और हरियाणवी जैसी गायों की अच्छी नस्लों के विकास पर जोर दिया जा रहा है। सरकार के अनुसार, किसानों को एक उन्नत नस्ल की गाय पालने पर 40 हजार रुपये और दो गायों के लिए 80 हजार रुपये का अनुदान (सब्सिडी) दिया जाएगा। इसके साथ ही बकरी, भेड़, सुअर और मुर्गी पालन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। गांव के जरूरतमंद परिवारों को सरकार की तरफ से सौ-सौ चूजे (मुर्गी के बच्चे) भी मुफ्त उपलब्ध कराए जाएंगे।
पांच उप-मिशनों से मिलेगी पशुपालन को नई दिशा
पशुधन मंत्री के मुताबिक, पशुपालन में नए रोजगार और उद्यम को बढ़ावा देने के लिए पांच अलग-अलग उप-मिशन बनाए गए हैं। इनमें पशुधन उद्यमिता (स्टार्टअप), नस्ल विकास, नवाचार और डिजिटल तकनीक, चारा विकास और अनुसंधान शामिल हैं।
पशुओं के चारे, उत्पादों की गुणवत्ता और बाजार तक पहुंच को सुधारने के लिए आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI) और मौसम के अनुकूल आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही, पशुपालकों को सही जानकारी और प्रशिक्षण देकर उनका कौशल भी बढ़ाया जाएगा।
सीधे बैंक खाते में आएगा योजना का पैसा
सरकार के अनुसार, यह पूरी तरह से राज्य सरकार के फंड से चलने वाली योजना है। योजना में स्क्रीनिंग समिति की जांच और तय नियम पूरे होने के बाद, अनुदान की राशि सीधे किसानों और पशुपालकों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। इसके अलावा, क्षेत्र में पशुपालन से जुड़ी सुविधाएं और सेवाएं बढ़ाने के लिए सरकार सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी मॉडल) को भी प्रोत्साहित करेगी।